UP Police Crime Report: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर जातीय और सामाजिक समीकरणों को लेकर बहस तेज हो गई है। आगामी चुनावों की आहट के बीच विभिन्न राजनीतिक दल अपने-अपने सामाजिक आधार को मजबूत करने में जुटे हैं। इसी बीच उत्तर प्रदेश पुलिस की एक रिपोर्ट ने नया राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। रिपोर्ट में जनवरी 2026 से अप्रैल 2026 के बीच अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम यानी एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज मामलों के आंकड़े जारी किए गए हैं, जिन पर अब सियासी चर्चाएं तेज हो गई हैं।
चार महीनों में दर्ज हुए हजारों मामले| UP Police Crime Report
पुलिस मुख्यालय की रिपोर्ट के अनुसार जनवरी से अप्रैल 2026 के बीच पूरे उत्तर प्रदेश में एससी-एसटी एक्ट के तहत कुल 4,741 मामले दर्ज किए गए। इन मामलों में कुल 14,672 लोगों को नामजद आरोपी बनाया गया है। रिपोर्ट में आरोपियों की सामाजिक पृष्ठभूमि का भी उल्लेख किया गया है। आंकड़ों के अनुसार सबसे अधिक 2,160 आरोपी यादव समुदाय से जुड़े बताए गए हैं। इसके बाद दूसरे स्थान पर मुस्लिम समुदाय के 1,983 लोगों के नाम दर्ज किए गए हैं।
इन आंकड़ों के सामने आने के बाद प्रदेश की राजनीति में नए सिरे से बहस शुरू हो गई है। विपक्ष और सत्तापक्ष के समर्थक अपने-अपने तरीके से इन आंकड़ों की व्याख्या कर रहे हैं।
वाराणसी और लखनऊ जोन में सबसे ज्यादा मामले
पुलिस द्वारा जारी जोनवार विवरण में वाराणसी और लखनऊ क्षेत्र को सबसे अधिक संवेदनशील बताया गया है। वाराणसी जोन में एससी-एसटी एक्ट के तहत दर्ज मामलों में 650 आरोपी यादव समुदाय से और 428 आरोपी मुस्लिम समुदाय से संबंधित बताए गए हैं। यह प्रदेश में सबसे अधिक संख्या मानी जा रही है। लखनऊ जोन में भी स्थिति कम गंभीर नहीं है। यहां 410 आरोपी यादव समुदाय से और 428 आरोपी मुस्लिम समुदाय से जुड़े बताए गए हैं। गोरखपुर जोन में 297 यादव और 344 मुस्लिम आरोपी दर्ज किए गए हैं। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मेरठ जोन में मुस्लिम समुदाय के 319 लोगों को आरोपी बनाया गया है।
कमिश्नरेट स्तर पर भी सामने आए आंकड़े
रिपोर्ट के अनुसार लखनऊ कमिश्नरेट में 77 यादव और 82 मुस्लिम आरोपी दर्ज किए गए हैं। वहीं प्रयागराज कमिश्नरेट में दलित उत्पीड़न से जुड़े मामलों में 91 आरोपी यादव समुदाय से बताए गए हैं। पुलिस के आंकड़ों में यह भी उल्लेख किया गया है कि ब्राह्मण समुदाय से 1,601 लोगों और क्षत्रिय समुदाय से 1,698 लोगों को विभिन्न मामलों में आरोपी बनाया गया है।
हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया है कि ये आंकड़े केवल दर्ज मामलों और नामजद आरोपियों से संबंधित हैं। किसी व्यक्ति को आरोपी बनाए जाने का अर्थ यह नहीं है कि वह दोषी सिद्ध हो चुका है। अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया और अदालतों के फैसलों के आधार पर ही तय होता है।
राजनीति में शुरू हुई नई बहस
रिपोर्ट सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में इसे लेकर चर्चा तेज हो गई है। विभिन्न दलों के नेता और समर्थक इन आंकड़ों को अपने-अपने नजरिए से देख रहे हैं। कुछ लोग इसे सामाजिक हकीकत का आईना बता रहे हैं, जबकि कुछ का कहना है कि केवल आरोपी बनाए जाने के आधार पर किसी समुदाय के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
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