Yuva Shakti Dal controversy: सोशल मीडिया पर इन दिनों युवा शक्ति दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष रवि गौतम का एक सनसनीखेज और विवादित वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में रवि गौतम भारत के मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार पर बेहद गंभीर आरोप लगाते और सीधी आपत्तिजनक टिप्पणी करते नजर आ रहे हैं। चुनावी निष्पक्षता और लोकतांत्रिक व्यवस्था पर तीखे सवाल उठाते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि संवैधानिक पदों पर बैठे लोग व्यवस्था का दुरुपयोग कर रहे हैं, जिससे पूरे देश के लोकतांत्रिक ढांचे को भारी चोट पहुंची है।
‘150 करोड़ जनता का भविष्य काटा गया’| Yuva Shakti Dal controversy
वायरल वीडियो में रवि गौतम ने मर्यादा की तमाम सीमाएं लांघते हुए कहा कि अगर सुप्रीम कोर्ट और राष्ट्रपति उन्हें एक कत्ल माफ कर दें, तो वे सबसे पहले मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की गर्दन काटेंगे। अपने इस भड़काऊ बयान के पीछे दलील देते हुए उन्होंने कहा कि इस अधिकारी ने देश की 150 करोड़ जनता का भविष्य खत्म किया है, महिलाओं के हक छीने हैं और युवाओं के रोजगार पर डाका डाला है।
उन्होंने दावा किया कि एक खास राजनीतिक दल यानी भाजपा सरकार को जिताने के लिए संवैधानिक पद का जमकर दुरुपयोग किया गया और चुनावों में बड़े पैमाने पर वोट कटवाए गए। इसके साथ ही उन्होंने यह भी दावा कर दिया कि भाजपा के भीतर भी उन नेताओं को पीछे धकेलने और नुकसान पहुंचाने की साजिश हुई, जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की लाइन पर नहीं चल रहे थे।
ईवीएम, वोट कटने और संसद निलंबन का उठाया मुद्दा
रवि गौतम ने इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) पर सवाल दागते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में लगभग 40 हजार मतदाताओं के नाम खामोशी से काटकर उन्हें मताधिकार से वंचित कर दिया गया। उन्होंने कहा कि दिल्ली में केजरीवाल की सियासत पर असर डाला गया और बसपा जैसी पार्टी आज हाशिए पर
पहुंच गई है, जबकि मायावती लगातार बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग उठा रही हैं। उन्होंने यह गंभीर आरोप भी लगाया कि पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग के दफ्तर में आगजनी तक कराई गई, ताकि धांधली के सबूत छुपाए जा सकें।
इसके अलावा, उन्होंने दिसंबर 2023 में संसद से 141 सांसदों (लोकसभा के 95 और राज्यसभा के 46) के निलंबन का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्ष को बाहर करके मनमाने कानून पास कराए गए और इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि देश के सैकड़ों अहम संस्थानों में ऐसे लोग काबिज हैं जो लोकतंत्र और संविधान को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
मेरठ के हंगामे और पुलिस विवाद से जुड़ा रहा है पुराना नाता
रवि गौतम का विवादों से पुराना नाता रहा है। इससे पहले जुलाई 2026 में मेरठ में छात्रा ललिता गौतम की मौत के बाद हुए भारी विरोध प्रदर्शन के दौरान भी वे सुर्खियों में आए थे। उस समय तत्कालीन एसएसपी अविनाश पांडेय और रवि गौतम से जुड़ा एक वीडियो सामने आया था, जिसमें पुलिस वैन के अंदर उनके साथ मारपीट का आरोप लगा था। उस घटना के बाद मेरठ में जमकर विरोध-प्रदर्शन और बड़ी महापंचायत हुई थी।
सितंबर में रवि गौतम ने दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर धरना और भूख हड़ताल भी की थी। अब मुख्य निर्वाचन आयुक्त के खिलाफ इतना उग्र और आपत्तिजनक वीडियो सामने आने के बाद रवि गौतम एक बार फिर पुलिस और प्रशासन के रडार पर आ गए हैं।














































