छात्रों को खाना खिलाने वाले Junaid Malik पर क्यों उठे सवाल? जुनैद ने खुद बताया सच!

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Junaid Malik: जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान जिसने छात्रों को भूखा रहने नहीं दिया, आज उसी शख्स पर कई सवाल उठ रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली के जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के ऐतिहासिक छात्र आंदोलन के दौरान प्रदर्शनकारियों को खाना-पानी बांटने वाले मोहम्मद जुनैद मलिक चर्चा में हैं। सोशल मीडिया पर उनके अचानक गायब होने और पुलिस हिरासत के दावों के बाद, उन्होंने खुद सामने आकर अपनी आपबीती सुनाई है और फंडिंग से जुड़े सवालों के जवाब दिए हैं।

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कहां से आई फंडिंग?

Junaid Malik ने बताया है कि वह पेशे से एक वकील हैं और न्यायिक सेवा परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं। 20 जून को अपनी एक सरकारी नौकरी की परीक्षा देकर जब वह जंतर-मंतर पहुंचे, तो वहां भीषण गर्मी में छात्रों के लिए पीने के पानी की किल्लत थी। उन्होंने सबसे पहले अपने स्तर पर एक पानी का स्टॉल लगाया। जब प्रदर्शन लंबा चला, तो जुनैद आंदोलन स्थल पर ही रुक गए। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारियों के लिए भोजन और पानी की व्यवस्था आम जनता, समर्थकों और आंदोलन से जुड़े लोगों के सहयोग और डोनेशन से हो रही थी। लोग खुद वहां सामान और रसद डिलीवर करवा रहे थे।

क्या है गायब होने और हिरासत की कहानी?

24 जुलाई की रात को जुनैद के अचानक गायब होने पर छात्र संगठनों (AISA और CJP) ने गहरी चिंता जताई थी। वापस लौटने के बाद जुनैद ने एक वीडियो जारी कर उस रात की पूरी आपबीती बताई। उन्होंने बताया कि जंतर-मंतर पर उन्हें एक आवारा कुत्ते ने काट लिया था, जिसके बाद वह दिल्ली के आरएमएल (RML) अस्पताल से इलाज करवाकर लौट रहे थे। इसी दौरान रास्ते में कुछ लोगों ने उन्हें और उनके दोस्त को रोका, जिन्होंने खुद को दिल्ली पुलिस का कर्मी बताया।

जुनैद का आरोप है कि पुलिस उन्हें उठाकर उत्तराखंड ले गई और पूरी रात आंखों पर पट्टी बांधकर हिरासत में रखा। अगली सुबह एक पुलिस अधिकारी ने उनसे पूछताछ की कि आंदोलन में खाना बांटने के लिए फंडिंग कहां से आ रही है और इसके पीछे कौन है? पूछताछ के बाद उन्हें मसूरी में छोड़ दिया गया, जहां से वह 25 जुलाई को कैब करके वापस दिल्ली लौटे।

Junaid Malik के परिवार लोगों के भी की पुछताछ

जुनैद (Junaid Malik) के आंदोलन में सक्रिय होने के कारण गाजियाबाद नाहल गांव में रहने वाले उनके परिवार की मुश्किलें बढ़ गईं और यूपी पुलिस द्वारा उनके पिता तथा नाबालिग भाई को हिरासत में लेने का आरोप लगा है। जुनैद के अनुसार, पुलिस ने मेरठ में उनकी बहन के ससुराल वालों से पूछताछ की और परिवार के जरूरी दस्तावेज अपने कब्जे में ले लिए थे। दूसरी तरफ, यूपी पुलिस ने इन आरोपों का खंडन करते हुए इसे रूटीन जांच बताया है और किसी को भी अवैध रूप से परेशान न करने की बात कही है।

Rajni

rajni@nedricknews.com

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