वो किस्सा…जब जेल गए थे Dilip Kumar और इस वजह से कैदियों के साथ रहे थे भूख हड़ताल पर!

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 16 नवम्बर 2021, 05:30 AM Updated: 16 नवम्बर 2021, 05:30 AM
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ट्रेजडी किंग दिलीप कुमार की लाइफ से जुड़े कई किस्से हैं, जिसकी चर्चाएं आज भी होती रहती है। क्या आपको ये पता है कि दिलीप कुमार की लाइफ में एक ऐसा भी मोड़ आया था जब उनको जेल जाना पड़ा था? क्या है जेल जाने का ये पूरा किस्सा? चलिए इसे जानते हैं…

अंग्रेजों के खिलाफ दिया था भाषण

दिलाप कुमार जुड़ा ये वाक्या कुछ यूं था कि जब वो यंग हुआ करते थे तो उन्होंने उसी दौरान एक क्लब में भाषण दिया या और कहा कि आजादी की लड़ाई जायज है। साथ ही उन्होंने ये तक कह दिया कि हिन्दुस्तान में सारी मुसीबतें ब्रिटिशों की वजह से ही पैदा हो रही हैं। इस क्रान्तिकारी भाषण पर वैसे तो खूब तालियां बजाई गई, लेकिन फिर जल्द ही वहां पुलिस आई और अंग्रेजी हुकूमत के अगेंट्स भाषण देने के आरोप में दिलीप कुमार को गिरफ्तार कर ले गई।

इस दौरान दिलीप कुमार को यरवदा जेल में डाला गया, जिसमें कुछ कैदी पहले से ही बंद थे। वो सभी कैदी सत्याग्रही थे। वहां दिलीप कुमार ये जान पाए कि उसी जेल की किसी कोठरी में सरदार बल्लभभाई पटेल भी कैद हैं। वैसे सभी कैदी उनके साथ भूख हड़ताल पर थे। ऐसे में दिलीप कुमार भी उनका साथ देते हुए भूख हड़ताल पर बैठ गए।

कभी क्रिकेटर बनना चाहते थे दिलीप कुमार

एक बेहतरीन क्रिकेटर बनना चाहते थे दिलीप कुमार तो वहीं कारोबार को लेकर अपनी फैमिली के साथ वो मुंबई रहने लगे। तब उन पर क्रिकेट का जुनून सवार था। वो क्रिकेटर बनने का ख्वाब देखते थे। बेहद शर्मीले दिलीप कुमार ने कॉलेज के नाटक में हिस्सा लेने से तो साफ इनकार कर दिया था।

फिर यूं एक्टिंग की दुनिया में रखा कदम

साल 1943 था जब अपने फिल्मी करियर की दिलीप कुमार ने शुरुआत की। मुंबई के सबसे बड़े स्टूडियों बॉम्बे टॉकीज में वो एक इंटरव्यू के लिए गए जहां की मालकिन देविका रानी की नजर उन पर जा पड़ी। फिर देविका ने उन्हें गौर से पहले देखा फिर पूछा एक्टिंग करोगे- जिस पर दिलीप कुमार ने कहा मुझे नहीं आती, फिर देविका ने कहा सीख जाओगे।

इस दौरान दिलीप कुमार के पिता का जो व्यवसाय था वो एकाएक डूब गया था और फिर फैमिली की पूरी जिम्मेदारी दिलीप कुमार पर आ गई। बॉम्बे टॉकीज में 1250 रुपये महीने का वेतन पाते थे दिलीप कुमार, लेकिन तब एक्टिंग का पेशा काफी बदनाम माना जाता था। ऐसे में पर्दे के पीछे काम करने लगे दिलीप कुमार और फिर साल 1944 में उनकी एंट्री ज्वार भाटा में हुई बतौर एक्टर।

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