भांग की खेती को लेकर देश में क्या कानून है?

👤 vickynedrick@gmail.com | Nedrick News 🕒 Published: 04 मई 2023, 12:00 AM 🔄 Updated: 04 मई 2023, 12:00 AM
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भांग की खेती को लेकर देश में क्या कानून है? भांग जिसे कई लोग भोले का प्रसाद कहते हैं तो कई लोग कहते हैं कि भांग का सेवन करने से इन्सान सातवें असमान पर पहुंच गया हो ऐसा फील करता है. भांग इस तरह हमारे मूड को कंट्रोल करता है कि सफलता पाने के बाद जो खुशी महसूस होती है, उससे कहीं ज़्यादा ख़ुशी का अहसास भांग लेने के बाद होता है. दरअसल, भांग खाने से डोपामीन हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है. जिसकी वजह से भांग का सेवन करने पर अजीब सी ख़ुशी महसूस होती है. जहाँ भांग का नाम सुनते ही हमारे दिमाग में ख्याल आता है कि यह तो नशा है और इससे दूर रहना चाहिए , जहाँ भरत के कई राज्यों में भांग की खेती प्रतिबंधित हैं. तो वहीं कुछ राज्यों में विशेष छूट के साथ इसकी खेती की जा सकती है.

भांग और गांजे में क्या फर्क है?

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भांग की खेती के साथ गांजे का भी जिक्र होता है. लेकिन आपको बता दें, कि ये दोनों एक ही प्रजाति पौधे हैं.  ये प्रजाति नर और मादा के रूप में विभाजित की जाती है. इसमें नर प्रजाति से भांग बनती है और मादा प्रजाति से गांजा बनता है और दोनों जिस पौधे से बनते हैं उसे कैनाबिस (Cannbis) कहते हैं और इसकी  खेती करने के लिए प्रशासन से अनुमति लेनी होती है.

भांग की खेती पर प्रतिबंध कब लगा?

1985 में भारत सरकार ने नार्कोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंसेज (NDPS) अधिनियम के तहत भांग की खेती करना प्रतिबंधित कर दिया था. मगर इसी NDPS अधिनियम राज्य सरकारों को बागवानी और औद्योगिक उद्देश्य के लिए भांग की खेती की अनुमति प्रदान करने का अधिकार दिया.

कहां कहां वैध है भांग की खेती

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रिपोर्ट के अनुसार, उत्तराखंड में भांग की खेती वैध है. साल 2018 में राज्य सरकार ने किसानों को भांग की खेती करने की अनुमति दे दी थी. भांग की खेती के लिए लेने वाली अनमुति की प्रक्रिया को हम उत्तराखंड द्वारा तय नियम के अनुसार समझते हैं.उत्तराखंड में नियंत्रित और विनियमित तरीके से भांग की खेती की जाती है. इसके अलावा उत्तर प्रदेश में भी इसी तरह की नीति के अनुसार भांग की खेती की जाती है.

भांग की खेती के लिए लाइसेंस कैसे लें?

वहीं भांग की खेती के लिए लाइसेंस मिलता है लाइसेंस के लिए प्रति हेक्टेयर एक हजार रुपये का शुल्क देना होता है. एक जिले से दूसरे जिले में बीज लेने जाने के लिए भी डीएम की अनुमति की जरूरत पड़ती है. डीएम फसल की जांच भी कर सकता है. यदि खेती के दौरान तय मानकों का उल्लंघन होगा तो तय क्षेत्रफल से अधिक की फसल को नष्ट कर दिया जाएगा.

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भांग की खेती के लिए आवेदन कैसे करें?

भांग की खेती कानून – उत्तराखंड में शासन के आदेश के अनुसार, स्वंय की जमीन थवा पट्टाधारक को ही भांग के पौधे की खेती के लिए अनुमति प्रदान की जाती है.जिस व्यक्ति के नाम जमीन होगी, वह किसी वाणिज्यिक व औद्योगिक इकाई के साथ साझेदारी में ही भांग की खेती के लिए आवेदन कर सकता है. भांग की खेती करने के लिए किसी भी व्यक्ति को खेत विवरण, क्षेत्रफल व सामग्री भंडारण करने के परिसर की जानकारी के अलावा चरित्र प्रमाण पत्र के साथ डीएम के सामने आवेदन करना होता है.

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