Trump India 100 tariff: भारत और अमेरिका के कारोबारी रिश्तों में एक बार फिर भारी हलचल देखने को मिल रही है। भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के एक ताजा बयान ने व्यापार जगत में खलबली मचा दी है। राजधानी दिल्ली में आयोजित ‘ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम’ में बोलते हुए सर्जियो गोर ने संकेत दिया कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने पर विचार कर रहे हैं और अगले करीब 10 दिनों में व्हाइट हाउस इस पर अंतिम फैसला ले सकता है।
गोर ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच इस संवेदनशील मुद्दे पर लगातार कूटनीतिक बातचीत जारी है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित पाबंदियां किसी एक देश को निशाना बनाकर नहीं तैयार की गई हैं, बल्कि इन्हें तीन अलग-अलग श्रेणियों में बांटा गया है। भारत का इनमें आना महज एक संयोग है। राजदूत के मुताबिक, इन प्रतिबंधों का मकसद किसी को सजा देना नहीं, बल्कि यूक्रेन जंग के लिए रूस को मिल रही आर्थिक मदद की कमर तोड़ना है।
रूस से सस्ता तेल और वाशिंगटन की नाराजगी| Trump India 100 tariff
इस पूरे विवाद की जड़ में रूस का तेल कारोबार है। मॉस्को की कमाई का सबसे बड़ा जरिया कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस हैं। जंग शुरू होने के बाद रूस से रियायती दरों पर तेल मिलने लगा, तो भारत ने अपनी भारी-भरकम ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने और आयात बिल घटाने के लिए वहां से खरीद बढ़ा दी। भारत का तर्क हमेशा से व्यावहारिक रहा है कि 140 करोड़ की आबादी वाले देश की ऊर्जा सुरक्षा सर्वोपरि है और जहां से वाजिब दाम मिलेंगे, वहीं से तेल खरीदा जाएगा।
मगर वॉशिंगटन का मानना है कि इस खरीद से रूस की अर्थव्यवस्था को सहारा मिल रहा है। इसी खींचतान में अब अमेरिका ऐसे कड़े कानून की तैयारी कर रहा है, जिसके तहत रूसी ऊर्जा आयात करने वाले भारत और चीन जैसे देशों पर 100% तक सीमा शुल्क (टैरिफ) थोपा जा सके।
भारत के लिए दांव पर क्या लगा है?
अमेरिका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। आधिकारिक व्यापार आंकड़ों के मुताबिक, साल 2025 में अमेरिका ने भारत से करीब 103.8 अरब डॉलर का सामान खरीदा था, जबकि दोनों मुल्कों के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार 239.6 अरब डॉलर तक पहुंच चुका था। अगर 100% टैरिफ लागू होता है, तो अमेरिका पहुंचने वाला भारतीय माल सीधे दोगुना महंगा हो जाएगा। उदाहरण के तौर पर, यदि भारत में बनी कोई शर्ट अमेरिकी बाजार में 100 डॉलर की बिकती है, तो 100 डॉलर का अतिरिक्त टैक्स लगते ही उसकी कीमत 200 डॉलर हो जाएगी। ऐसे में अमेरिकी खरीदार वियतनाम, बांग्लादेश या अन्य देशों का रुख करेंगे। इसका सीधा असर भारत के टेक्सटाइल, लेदर, जूते, कालीन, जेम्स एंड ज्वैलरी और सी-फूड जैसे रोजगार देने वाले प्रमुख सेक्टरों पर पड़ेगा, जिससे देश में नौकरियों और उत्पादन में कटौती का खतरा पैदा हो सकता है।
पहले भी लग चुका है 50% तक झटका
टैरिफ की यह मार भारत के लिए एकदम नई नहीं है। साल 2025 में भी अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर पहले 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाया था, जिसे बाद में रूसी तेल खरीद के विवाद के चलते 25% और बढ़ाकर 50% तक पहुंचा दिया गया था। उस दौर में असर साफ दिखा था अगस्त 2025 में भारत से कीमती पत्थरों और मोतियों के निर्यात में 54% तथा सी-फूड में करीब 33% की भारी गिरावट दर्ज की गई थी। वहीं सितंबर 2025 में अमेरिका को होने वाला कुल वस्तु निर्यात 11.9% घटकर 5.46 अरब डॉलर रह गया था।
ट्रंप की दबाव की राजनीति और आगे की राह
जानकारों का मानना है कि डोनाल्ड ट्रंप के लिए टैरिफ सिर्फ एक टैक्स नहीं, बल्कि बातचीत की मेज पर अपनी शर्तें मनवाने का सबसे बड़ा ‘हथियार’ रहा है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कई बार बंदूक चलाने से ज्यादा असर बंदूक दिखाने का होता है। हालांकि, यह तलवार दोनों तरफ धारदार है। टैरिफ लगने पर भारतीय माल महंगा होगा, तो अमेरिकी आयातकों और आम उपभोक्ताओं को भी महंगाई की मार झेलनी पड़ेगी।
फिलहाल आने वाले 10 दिन बेहद अहम हैं। देखना होगा कि क्या ट्रंप सचमुच यह कड़ा कदम उठाते हैं, भारत को कोई रणनीतिक छूट मिलती है, या फिर दोनों देश किसी द्विपक्षीय समझौते के जरिए बीच का रास्ता निकाल लेते हैं।











































