Gurdwaras in Malaysia: भारत के बाद अगर कोई हिंदू संस्कृति की धरोहर को संभालने वाला कोई देश है तो वो है दक्षिण पूर्व एशिया में बसा एक खूबसूरत देश मलेशिया। कहने के लिए तो इस्लाम यहां का आधिकारिक धर्म है लेकिन हिंदू संस्कृति के साथ साथ बौद्ध और सिख संस्कृति को भी यहां बखूबी संभाल कर रखा गया। मलेशिया में सिख धर्म की शुरुआत 1870 के आसपास ही हो गई थी.. करीब 150 साल से भी ज्यादा का सिख इतिहास संभालने वाले मलेशिया में आज डेढ़ लाख से भी ज्यादा सिख रहते है, वहीं 100 से भी ज्यादा गुरुद्वारे मौजूद है। अपने इस लेख में हम मलेशिया में मौजूद 5 प्रमुख सिख गुरुद्वारों के बारे में जानेंगे।
बड्डा गुरुद्वारा साहिब – Badda Gurdwara Sahib
मलेशिया के सबसे प्रचीन गुरुद्वारो में से एक बड्डा गुरुद्वारा साहिब साल 1901 में बनवाया गया था और 1903 में संगतो के लिए भी खोल दिया गया था। इस गुरुद्वारे को डायमंड जुबली सिख टेम्पल भी कहा जाता है। कैटगरी वन हेरिटेज बिल्डिंग के रूप में मान्यता प्राप्त करने वाला ये गुरुद्वारा भारत और मलेशिया के सुनहरे रिश्ते की भी निशानी है। ये रोजाना सुबह 6 बजे खुलता है और शाम 7 बजे बंद होता है। 2026 में इस गुरुद्वारे का फिर से जीर्णोद्धार किया गया, जिसमें 60 लाख मलसेशिन रिंगिट की लागत आई थी। न केवल पीनाक शहर का बल्कि पूरे मलेशिया का ये सबसे फेमस गुरुद्वारा है।
गुरुद्वारा साहिब तत खालसा दीवान – Gurdwara Sahib Tat Khalsa Diwan
मलेशिया की राजधानी कुआलालंपुर का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक गुरुद्वारा, गुरुद्वारा साहिब तत खालसा दीवान.. साल 1918 में बनवाया गया था, जब इसे खालसा जीवान मलाया कहा जाता था। लेकिन 1922 में इसका पंजीकरण में नाम बदल दिया गया। 1980 में इसे फिर से बड़े भव्य तरीके से बनवाया गया। इसी के साथ यहां पंजाबी स्कूल और लाईब्रेरी है।ये सुबह 5 बजे सगंतो के लिए खुलता है और 9 बजे रात कर खुला रहता है।
गुरुद्वारा साहिब मेलाका – Gurdwara Sahib Melaka
मलेशिया का मेनाका शहर यूनेस्को के विश्व धरोहर में शामिल एक शहर है जहां स्थिति है गुरुद्वारा साहिब मेलाका.. जो मलेशिया के साथ साथ सिंगापुर के सिखों के लिए भी एक बड़ा आध्यात्मिक केंद्र है। इस गुरुद्वारे की स्थापना साल 1925 में संत बाबा सोहन सिंह जी की कर्मभूमि के रूप में की गई थी। जिसे 1968 में बढ़ा कर 3 मंजिला इमारत का रूप दिया गया। यहां बाबा सोहन सिंह मेमौरियल बिल्डिंग है जिसमें बच्चो को सिक्खी की शिक्षा दी जाती है। ये सुबह 5 बजे खुलता है और रात 8.30 बजे तक खुला रहता है।
गुरुद्वारा बेब के मचाप – Gurdwara Babe Ke Machap
सिम्पांग रेंगगाम- साल 1997 में मोगा के प्रसिद्ध संत बाबा नाहर सिंह जी सुनेहरानवाले ने अतंराष्ट्रीय स्तर पर एक धार्मिक केंद्र और तीर्थयात्रा का एक केंद्र बनाने के लिए 8 एकड़ जमीन पर गुरुद्वारा बेब के मचाप को बनवाया था। ये गुरुद्वारा आधिकारिक रूप से गुरुद्वारा साहिब बेब के गुरु राम दास वर्ल्ड के नाम से जाना जाता है, जो कि मलेशिया को जोरोर राज्य के मचाप कस्बे में बनाया गया है। ये मलेशिया के गुरुद्वारा सच खंड की वास्तुकला पर आधारित है। साथ ही एक 84 सीढ़ीयों वाला बाओली भी है.. यहां पांच भाषाओं में लोगो को सिख धर्म की परंपराओ के बारे मे जानकारी दी जाती है। ये गुरुद्वारा भक्तो के लिए 24 घंटे सातों दिन खुला रहता है।
गुरुद्वारा साहिब कैमरून हाइलैंड्स – Gurdwara Sahib Cameron Highlands
मलेशिया के सबसे फेमस हिल स्टेशन में से एक है कैमरन हाइलैंड्स में स्थित है गुरुद्वारा साहिब ब्रिचांग। जिसे सरदार गुरदित सिंह और भाई साधु सिंह ने मिलकर यहां रहने वाले सिख संगतो के लिए 1935 में बनवाया था। तब इसे लड़की से बनवाया गया था, जिसे खुद वहां रहने वाले सिख मजदूरो ने काट कर जोड़ा था। हालंकि 1960 में इसके जर्जर होने पर इसे गिरा कर नए गुरुद्वारे का निर्माण कराया गया था। ये गुरुद्वारा 24 घंटे खुला रहता है। आपको बता दें, ये है मलेशिया के प्रसिद्ध गुरुद्वारे… जो सिक्खी की शान को मलेशिया में भी बढ़ा रहे है।












































