जितनी बार ब्रेक लगती है, उतना रेलवे को पैसे का होता है फायदा, आप भी जानें वंदे भारत कि ये खासियत

👤 vickynedrick@gmail.com | Nedrick News 🕒 Published: 30 अप्रैल 2024, 12:00 AM 🔄 Updated: 30 अप्रैल 2024, 12:00 AM
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पिछले कई वर्षों में भारत ने हर क्षेत्र में प्रगति की है। चाहे इलेक्ट्रिक बसें हों या आधुनिक ट्रेनें, भारत अपनी तकनीक के दम पर विदेशों में भी अपना नाम कमा रही है। भारत में एक और नई तकनीक विकसित हुई है जिसमें एक ऐसी ट्रेन है जिसमें जितना अधिक ब्रेक का उपयोग किया जाएगा, रेलवे को उतना अधिक धन का लाभ होगा। दरअसल हम बात कर रहे हैं भारत की आधुनिक ट्रेन वंदे भारत की। ये ट्रेन आपको किसी एयरलाइन में यात्रा करने जैसा महसूस कराता है। वंदे भारत एक्सप्रेस में हवाई यात्रा जैसी सुविधाएं हैं और इसकी गति भी अन्य ट्रेनों की तुलना में काफी तेज है। रेलवे ने वंदे भारत ट्रेन पर ब्रेक लगाकर 22 लाख 55600 रुपये की बिजली बचाई है। वंदे भारत में ट्रेन के इंजन में रीजनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम के साथ लगे हेड ऑन जेनरेशन सिस्टम से करीब 3 लाख 47017 किलोवाट बिजली पैदा की गई है।

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इस तरह से हो रहा फायदा

गाड़ियों में जितनी ज्यादा ब्रेक लगाई जाती है, माइलेज उतना ही कम हो जाता है। इसका मतलब है कि ड्राइवर को पैसे का नुकसान होगा। लेकिन भारतीय रेलवे की वंदे भारत में ये व्यवस्था उल्टी है। इस ट्रेन में ब्रेक लगाकर रेलवे मालामाल हो रहा है। रेल मंत्रालय के सूचना एवं प्रचार निदेशक शिवाजी मारुति सुतार का कहना है कि ट्रेनों में रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके कारण ब्रेक लगाने पर स्वचालित रूप से बिजली उत्पन्न होती है। ट्रेन के ब्रेक लगाने के दौरान जितनी बिजली की खपत होती है, इंजन के गति पकड़ने पर उससे दोगुनी बिजली वापस मिल जाती है। उनका कहना है कि कार्बन फुटप्रिंट को कम करने के लिए वंदे भारत ट्रेन में रीजनरेटिव ब्रेक सिस्टम लगाया गया है, जो 30 प्रतिशत विद्युत ऊर्जा बचाता है। यानी इसमें जितने ब्रेक लगेंगे उतनी ही बिजली पैदा होगी।

सिर्फ वंदे भारत ट्रेन की बात करें तो पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्यालय गोरखपुर से लखनऊ होते हुए प्रयागराज तक ट्रेन चलाकर रेलवे ने पिछले वित्तीय वर्ष में अब तक करीब 22 लाख 55600 रुपये की बिजली बचाई है। यह उसके कुल ऊर्जा व्यय का लगभग 16 प्रतिशत है।

जितना अधिक ब्रेक, उतना अधिक पैसा

पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी पंकज कुमार सिंह ने बताया कि वंदे भारत में ट्रेन के इंजन में लगे रीजनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम के साथ हेड ऑन जेनरेशन सिस्टम के जरिए करीब 3 लाख 47017 किलोवाट बिजली पैदा की गई है। उन्होंने बताया है कि रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम के जरिए ट्रेन के ब्रेक लगने पर अपने आप बिजली पैदा हो जाती है। जैसे ही इंजन गति पकड़ता है, ट्रेन में ब्रेक लगाने के दौरान जितनी बिजली खर्च होती है, उससे दोगुनी बिजली दोबारा पैदा होने लगती है। उन्होंने बताया कि आने वाले दिनों में सभी ट्रेनों में रीजेनरेटिव ब्रेकिंग सिस्टम काम करेगा।

अत्याधुनिक तकनीक और सुविधाओं से लैस वंदे भारत पहली बार दिल्ली से वाराणसी के बीच शुरू हुई थी और आज ये 24 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों तक पहुंच चुकी है।

अत्याधुनिक तकनीक और सुविधाओं से लैस वंदे भारत, जो पहली बार दिल्ली से वाराणसी के बीच शुरू हुई थी, आज 24 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक पहुंच चुकी है। 31 मार्च 2024 तक दो करोड़ से ज्यादा लोग इससे सफर कर चुके हैं।

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