राम मंदिर का फैसला लिखने वाले जज कभी नहीं आ पायेगा सामने, जानिए क्यों

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 02 जनवरी 2024, 05:30 AM Updated: 02 जनवरी 2024, 05:30 AM
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22 जनवरी को अयोध्या में बन रहे राम मंदिर का उद्घाटन होगा और फिर राम भगवन इस मंदिर में विराजमान होंगे. ये राम मंदिर बड़े विवाद के बाद बन रहा है. कई सालों से इस मामले को लेकर कोर्ट में केस चला और आखिर में मुस्लिम पक्ष के खिलाफ और हिन्दू पक्ष में फैसला आया जिसके बाद अब  राम मंदिर बन रहा है. वहीं राम मंदिर के बनने के फैसला सुप्रीम कोर्ट ने दिया लेकिन इस बीच सोमवार (1 जनवरी) को मीडिया से बात करते हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश डी वाई चंद्रचू्ड़ ने बड़ी टिप्पणी की है.

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सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश डी वाई चंद्रचू्ड़ ने दी जानकारी 

दरअसल, सोमवार (1 जनवरी) को मीडिया से बात करते हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीश डी वाई चंद्रचू्ड़ ने बताया कि आखिर क्यों उस जज का नाम सामने नहीं आएगा, जिन्होंने राम मंदिर का फैसला लिखा था. सीजेआई ने सोमवार को राम मंदिर के फैसले को लेकर अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि अयोध्या मामले में न्यायाधीशों ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया था कि फैसला किसने लिखा है, उसका उल्लेख नहीं होगा. संघर्ष के लंबे इतिहास और विविध दृष्टिकोणों को ध्यान में रखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले में एक स्वर में फैसला सुनाने का निर्णय लिया था और इस वजह से उस जज का नाम  कभी समाने नहीं आयेगा जिसने अयोध्या मामले का फैसला लिखा था.

9 नवंबर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने दिया था ऐतिहासिक फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या के रामजन्मभूमि मामले को लेकर 9 नवंबर 2019 को फैसला सुनाया था. तत्कालीन सीजेआई रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली बेंच में (जिसमें जस्टिस शरद अरविंद बोबड़े, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ (वर्तमान सीजेआई), जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस अब्दुल नजीर) ने सर्वसम्मति से फैसला सुनाया था. इसके बाद 5 अगस्त 2020 को राम मंदिर का भूमि पूजन कार्यक्रम किया गया था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, आरएसएस सरसंघचालक मोहन भागवत, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और साधु-संतों समेत कई गणमान्य लोग शामिल हुए थे. और अब 22 जनवरी को अयोध्या में बने राम मंदिर का उद्घाटन होगा.

जानिए क्या था अयोध्या विवाद?

अयोध्या विवाद श्री राम की जन्मभूमि को लेकर था. अयोध्या जहाँ पर भगवान राम का जन्म हुआ था और भगवान राम के जन्मस्थान की याद में यहां पर मंदिर बनाया गया लेकिन उत्तर प्रदेश के अयोध्या में इस राम मंदिर को तोड़कर मुगल सम्राट बाबर के सेनापति मीर बाकी ने बाबरी मस्जिद का निर्माण कराया. भगवान राम की मूर्तियां हुई प्रकट दिसंबर 1949 में, बाबरी मस्जिद के अंदर भगवान राम की मूर्तियां ‘प्रकट’ हुई. जिसके बाद इस मस्जिद का विरोध शुरू हुआ. मुसलमानों और हिन्दुओं दोनों पक्षों द्वारा इस विरोध के मामले दर्ज कराए गए. बाद के वर्षों में हाशिम अंसारी ने मुसलमानों के लिए और निर्मोही अखाड़े ने हिंदुओं के लिए एक मुकदमा दायर किया और सरकार ने स्थल को विवादित घोषित कर ताला लगा दिया.

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