Strait of Hormuz Reopening News: पश्चिम एशिया में कई महीनों से जारी तनाव अब खत्म होने की ओर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच संभावित समझौते की खबरों ने पूरी दुनिया का ध्यान खींच लिया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों देश एक अहम डील के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। अगर यह समझौता हो जाता है तो दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही अगले 30 दिनों में फिर से सामान्य हो सकती है।
दरअसल, 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल की ओर से ईरान पर हमले के बाद हालात तेजी से बिगड़ गए थे। इसके जवाब में ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आवाजाही लगभग रोक दी थी। यही वह समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया की करीब 20 प्रतिशत ऊर्जा सप्लाई गुजरती है। ऐसे में इस मार्ग पर संकट आने से वैश्विक तेल बाजार में भारी उथल-पुथल देखने को मिली थी।
अमेरिका के ब्लॉकेड से बढ़ा दबाव| Strait of Hormuz Reopening News
तनाव बढ़ने के बाद अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों के आसपास नौसैनिक ब्लॉकेड भी लगा दिया था। इससे ईरान की अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ा। तेल निर्यात प्रभावित हुआ और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी दबाव बढ़ गया। अब पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया घोषणा के बाद यह उम्मीद बढ़ी है कि दोनों देशों के बीच बातचीत अंतिम दौर में पहुंच चुकी है। बताया जा रहा है कि अमेरिका और ईरान एक MoU यानी समझौता ज्ञापन पर काम कर रहे हैं। इसमें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने, ब्लॉकेड हटाने और क्षेत्रीय तनाव कम करने जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं।
समझौते के मसौदे में क्या-क्या शामिल?
सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान और कतर की मध्यस्थता में तैयार हो रहे इस ड्राफ्ट में कई बड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं। सबसे अहम बात यह है कि दोनों देशों के बीच 60 दिनों के युद्धविराम को आगे बढ़ाने पर सहमति बन सकती है। समझौते के तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बिना किसी टोल के पूरी तरह खोलने की बात कही गई है। ईरान ने समुद्री रास्तों में लगाए गए माइन्स हटाने का भरोसा दिया है ताकि जहाज सुरक्षित तरीके से गुजर सकें। बदले में अमेरिका ईरान पर लगाया गया नौसैनिक ब्लॉकेड हटाएगा और तेल बेचने में कुछ राहत देगा।
इसके अलावा ईरान ने अपनी कुछ फंसी हुई विदेशी संपत्तियों को वापस पाने की मांग भी रखी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने यह आश्वासन भी दिया है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। हालांकि यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को लेकर आगे अलग से बातचीत जारी रहेगी।
5 जून को हो सकती है अहम बैठक
जानकारी के मुताबिक इस समझौते के मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए 5 जून को इस्लामाबाद में दोनों देशों के प्रतिनिधियों की बैठक हो सकती है। हालांकि अब तक किसी भी पक्ष की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। ईरान की मांग है कि अमेरिका 30 दिनों के भीतर पूरा ब्लॉकेड हटाए और शुरुआती चरण में कुछ फंड भी जारी करे। वहीं दोनों देशों ने एक-दूसरे पर हमला न करने का भरोसा भी जताया है। समझौते में लेबनान में इजरायल और हिजबुल्लाह के बीच जारी संघर्ष को खत्म करने की कोशिशों को भी शामिल किया गया है।
दुनिया की नजर इस समझौते पर क्यों?
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने दिल्ली में कहा कि अगले कुछ घंटों में अच्छी खबर सामने आ सकती है। दूसरी तरफ ईरान की ओर से भी सकारात्मक संकेत मिल रहे हैं, हालांकि परमाणु कार्यक्रम जैसे कुछ मुद्दों पर अभी मतभेद बाकी हैं। ईरानी सूत्रों का कहना है कि अगर सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल इस समझौते को मंजूरी देती है तो इसे अंतिम मंजूरी के लिए सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह मोजतबा खामेनेई के पास भेजा जाएगा।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता दोनों देशों के लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। ईरान लंबे समय से आर्थिक दबाव झेल रहा है, जबकि अमेरिका और उसके सहयोगी देश तेल की कीमतों को स्थिर रखना चाहते हैं। अगर यह डील सफल होती है तो न सिर्फ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दोबारा पूरी तरह खुल जाएगा, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया में तनाव कम होने की उम्मीद भी बढ़ जाएगी।





























