US Iran Ceasefire Extension: अमेरिका और ईरान के बीच पिछले कई महीनों से जारी तनाव के बीच अब एक राहत भरी खबर सामने आ रही है। अप्रैल से लागू संघर्षविराम यानी सीजफायर को दो महीने और बढ़ाए जाने की संभावना जताई जा रही है। अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स के मुताबिक दोनों देशों के बीच बैकचैनल बातचीत तेज हो गई है और इस पूरी प्रक्रिया में पाकिस्तान अहम भूमिका निभाता नजर आ रहा है।
सूत्रों के अनुसार, पाकिस्तान खुद को अमेरिका और ईरान के बीच एक भरोसेमंद मध्यस्थ के तौर पर पेश कर रहा है। इसी कड़ी में पाकिस्तान सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने हाल ही में तेहरान का दौरा किया, जहां उन्होंने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और विदेश मंत्री अब्बास अराघची समेत कई वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात की।
पाकिस्तान की भूमिका बनी चर्चा का केंद्र| US Iran Ceasefire Extension
मिडिल ईस्ट की राजनीति में पाकिस्तान की सक्रियता ने नई चर्चाओं को जन्म दिया है। माना जा रहा है कि इस्लामाबाद दोनों देशों के बीच तनाव कम कराने की कोशिश कर रहा है। असीम मुनीर की तेहरान यात्रा को इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। दूसरी ओर अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी हाल ही में संकेत दिए कि शांति समझौते को लेकर कुछ सकारात्मक प्रगति हुई है। हालांकि उन्होंने यह भी माना कि अभी कई मुद्दों पर मतभेद कायम हैं और अंतिम समझौते तक पहुंचना आसान नहीं होगा।
ईरान का सख्त रुख, दी खुली चेतावनी
सीजफायर बढ़ाने की संभावनाओं के बीच ईरान ने अपना आक्रामक रुख भी साफ कर दिया है। ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर अमेरिका ने दोबारा हमला किया तो उसे “करारा जवाब” मिलेगा। गालिबाफ ने दावा किया कि संघर्षविराम के दौरान ईरान ने अपनी सैन्य ताकत को फिर से मजबूत कर लिया है। ईरान लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि वह अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुकने वाला नहीं है।
तेहरान का कहना है कि अमेरिका के साथ कई अहम मुद्दों पर अब भी गंभीर मतभेद बने हुए हैं। खासतौर पर अमेरिकी प्रतिबंधों और क्षेत्रीय नियंत्रण को लेकर दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन पाई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य बना सबसे बड़ा विवाद
अमेरिका और ईरान के बीच सबसे बड़ा तनाव होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है। यह दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक माना जाता है। दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल और गैस सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है। ईरान चाहता है कि इस रणनीतिक समुद्री इलाके पर उसका प्रभाव और नियंत्रण बना रहे। ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया है कि पिछले 24 घंटों में 25 जहाजों ने ईरान की अनुमति के बाद इस रास्ते से गुजरना किया।
इस बीच संयुक्त राष्ट्र की एजेंसी FAO ने भी चेतावनी दी है कि अगर होर्मुज क्षेत्र में तनाव बढ़ता है तो इसका असर वैश्विक बाजारों पर पड़ सकता है। तेल और खाद्य पदार्थों की कीमतों में तेज उछाल आने की आशंका जताई गई है।
इजरायल-लेबनान तनाव ने बढ़ाई चिंता
मिडिल ईस्ट में हालात सिर्फ अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं हैं। इजरायल और हिज्बुल्लाह के बीच जारी तनाव भी क्षेत्र की शांति के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है। अप्रैल में संघर्षविराम लागू होने के बावजूद दक्षिण लेबनान में इजरायली एयरस्ट्राइक लगातार जारी हैं। लेबनान की सरकारी एजेंसी के मुताबिक शुक्रवार रात सीरिया सीमा के पास कई हवाई हमले किए गए।
इजरायल का कहना है कि वह हिज्बुल्लाह के ठिकानों को निशाना बना रहा है। वहीं दूसरी तरफ हिज्बुल्लाह समर्थक गुट इसे उकसावे वाली कार्रवाई बता रहे हैं।
शांति की कोशिशें अभी भी नाजुक
विशेषज्ञों का मानना है कि भले ही अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत आगे बढ़ रही हो, लेकिन मिडिल ईस्ट की स्थिति अभी भी बेहद संवेदनशील बनी हुई है। होर्मुज जलडमरूमध्य, अमेरिकी प्रतिबंध, इजरायल-हिज्बुल्लाह तनाव और क्षेत्रीय शक्ति संतुलन जैसे मुद्दे किसी भी समय हालात को फिर से बिगाड़ सकते हैं।
फिलहाल पूरी दुनिया की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या यह संघर्षविराम लंबे समय तक कायम रह पाएगा या फिर मिडिल ईस्ट एक बार फिर बड़े संकट की ओर बढ़ेगा।





























