जानिए कैसे की जाती है SGPC के प्रमुख और अकाल तख्त के जत्थेदार की नियुक्ति ?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 05 सितम्बर 2023, 05:30 AM Updated: 05 सितम्बर 2023, 05:30 AM
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Selection Process of Jathedar –  अकाल तख्त के साथ दुनिया भर के सिखों का प्रमुख है. जत्थेदार सिखों के मुख्य होने के नाते, अकाल तख्त से किसी भी सिख के रूप में पहचान करने वाले किसी भी व्यक्ति को बुलाने, मुकदमा चलने और सजा दीं की वास्तविक शक्ति है. यह पद किसी संवैधानिक दस्तावेज़ द्वारा स्थापित नहीं किया गया है बल्कि यह सिख समूह शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति द्वारा नियुक्त किया जात है. जिसका आदेश विश्व के सभी सिखों को मानना पड़ता है.

हम आपको बात दे कि पूरे भारत में पांच तख्तों के लिए पांच जत्थेदार नियुक्त किए जाते है इनका मुखिया अकाल तख्त का जत्थेदार होता है. अकाल तख्त का औधा सिखों में सबसे माना जाता है. तख्त फारसी भाषा का शब्द है, जिसका मतलब अथॉरिटी के बैठने की जगह या सिंहासन है इसकी शुरुआत सिखों के छठे गुरु हरगोबिंद सिंह ने 1609 में की थी. सिख धर्म की इस सबसे बड़ी संस्था के प्रमुख पद पर बैठे जत्थेदार को सिखों का मुख्य प्रवक्ता माना जाता है. दोस्तों आज हम इस लेख से अकाल तख्त के जत्थेदार के बारे में कुछ बताएं जानेंगे, कि कैसे जत्थेदार की नियुक्ति की जाती है. सिखों में इनकी आज्ञा का क्या महत्व है.

और पढ़ें : जानिए क्या है तख्त श्री दमदमा साहिब का इतिहास

SGPC और अकाल तख्त के जत्थेदार की शुरुवात

अकाल तख्त का पद संवैधानिक तौर पर दस्तावेजों में दर्ज नहीं है. जत्थेदार की नियुक्ति 1920 में उभरी अकाली नेतृत्व ने 15 नवम्बर 1920 को अमृतसर में अकाल तख्त के आस पास सभी तरह के मत रखने वाले सिखों की एक आम सभा बुलाई थी. इस सभा का उदेश्य श्री हरमंदिर साहिब और सभी गुरुद्वारों के लिए निर्णय लेने वाली समिति का निर्माण करना था. इस सभा के दो दिन पहले ब्रिटिश सरकार ने श्री हरमंदिर साहिब की देखभाल के लिए 36 सिखों की समिति बनाई थी. जिसके बाद 1920 में राजनीति तौर पर सिखों ने 175 सदस्यों वाली एक समिति बनाई, जिसका नाम “शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति” रखा गया.

जिसका 1925 में संवैधानिक तौर पर गठन किया गया. इस समिति में सरकार द्वारा नियुक्त सदस्य भी शामिल किए गए. उसी समय से सिखों और गुरुद्वारों के सारे फैसले यही समिति करती है. यह समिति सिखों के पांच पवित तख्तों के लिए भी एक मुखिया नियुक्त करती है. जिससे हम ‘जत्थेदार’ के तौर पर जानते है. जत्थेदार के पास सभी सिखों और गुरूद्वारे के लिए फैला लेने का हक होता है. इन पांच मुखियाओं में से सबसे शक्तिशाली अकाल तख्त का जत्थेदार होता है जो सभी सिखों का मुखिया कहलाता है.

SGPC के मुखिया और अकाल तख्त के जत्थेदार की नियुक्ति

SGPC यानि कि शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक समिति के नियम के अनुसार इसके सदस्यों का चुनाव हर 5 साल में होने जरूरी है, SGPC के कुल सदस्य 191 है जिसमे 170 सदस्य चुने जाते है और 15 सदस्य मनोनीत किए जाते है, 5 सदस्य तख्तों के मुखिया और एक ग्रंथी श्री दरबार साहिब के मुखिया होते है.  हमारे यहा SGPC के कुल मतदाताओं की संख्या 56.50 लाख से ज्यादा ही है. 2011 चुनाव के अनुसार सबसे ज्यादा 53 लाख वोटर पंजाब से हैं, इसके अलावा SGPC में हरियाणा के 3.37 लाख, 23,011 हिमाचल प्रदेश और 11,932 वोटर चंडीगढ़ से हैं . SGPC में रजिस्टर्ड वोटर ही इस संस्था के प्रमुख का चुनाव करते हैं .

दूसरी तरफ, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी यानि SGPC के 160 सदस्य और 15 लोगों की प्रबंधक समिति मिलकर श्री अकाल तख्त साहेब के जत्थेदार (Selection Process of Jathedar) का चुनाव करती है. वर्तमान में अकाल तख्त के जत्थेदार ज्ञानी रघुबीर सिंह को नियुक्त किया गया है. इनकी नियुक्ति शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी 16 जून 2023 को की गयी थी. ज्ञानी रघुबीर सिंह  अब विश्व के सभी सिखों के मुखिया हैं.

और पढ़ें : पांचों तख्त में क्यों सबसे अहम है श्री केशगढ़ साहिब ?

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