पंजाब के एक खेत में दफन था बौद्ध धर्म का स्वर्णिम इतिहास, संघोल का हैरान करने वाला सच – Uchha pind

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Uchha pind: साल 1968 की बात है.. पंजाब राज्य का फतेहगढ़ साहिब जिले की खमानो तहसील में एक छोटा सा शहर पड़ता है संघोल.. चंडीगढ़ से करीब 40 किलोमीटर दूर.. ये इलाका उस वक्त खेतीबाड़ी करने वाले किसानो की भूमि हुई करती थी। लेकिन इसी संघोल मे रहने वाले एक किसान की बार बार शिकायत आ रही थी कि वो अपने खेतों में फसले नहीं उगा पा रहा है क्योंकि उसके खेत में बहुत सारी पत्थर और ईंटे है। उसने कुछ और खुदाई की तो उसे शक हुआ कि ये केवल ईंट पत्थर नहीं बल्कि ईंट पत्थरो का महल है। जो उस जमीन में दबा हुआ है.. तुरंत उसकी जानकारी पुरातत्व विभाग को दी गई।

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पंजाब में बौद्ध धर्म से जुड़े अतीत की महिमा

पुरातत्व विभाग के एस. एस. तलवार (S.S. Talwar) और रविंद्र सिंह बिष्ट (R.S. Bisht) के नेतृत्व में संघोल की इस भूमि की खुदाई शुरु हुई.. और पहली बार यहां धर्म चक्र के आकार में बने बौद्ध स्तूप के कुछ हिस्से और बौद्ध मठ के भी कुछ अवशेष मिले। ये पहाड़ी हिस्सों पर मिले अवशेष पंजाब में बौद्ध धर्म से जुड़े अतीत की महिमा को फिर से जीवित करने वाले थे.. इस स्थान को लोगों ने ऊंचा पिंड कहा.. स्थानीय भाषा में संघोल का मतलब उंचा पिंड होता है। जिसका मतलब है ऐसा स्थान जो  एक ऊंचा या उत्कृष्ट हो.. लेकिन अभी तो इतिहास के पन्ने खुलने शुरु हुए थे।

हड़प्पा सभ्यता संस्कृति के अवशेष

1985 में फिर से तय किया गया कि वो संघोल में खुदाई शुरु करेंगे और खुदाई शुरु हुई.. ये भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) और पंजाब पुरातत्व विभाग का एक बड़ा और संयुक्त अभियान था.. ये खुदाई 1990 तक चली थी, औऱ इस दौरान यहां पर कुषाण काल की 117 नक्काशीदार मूर्तियां और खंभे मिले.. दो स्तूप के अवशेष मिले और स्तूप के केंद्र से एक विशेष ढक्कन वाला बक्सा भी मिला, जिसमें 15000 हजार से ज्यादा प्रचीन हीरे जवाहरात मिले थे।  जब इस खुदाई को और नीचे तक किया गया तो यहां 2000 ईसा पूर्व उत्तर हड़प्पा सभ्यता संस्कृति के अवशेष भी मिले। मतलब संघोल केवल बौद्ध संस्कृति का ही इतिहास खुद में समेटे नहीं था बल्कि भारत की सबसे पुरानी और उन्नत सभ्यता हड़प्पा सभ्यता की भी निशानियों को खुद में समेटे हुए था।

शुआनज़ैंग ने अपने लेखों में संघोल का जिक्र

यहां बौद्ध संस्कृति के अलावा कुषाण काल की 1900 साल पुराने अवशेष, गुप्त वंश औऱ मध्यकाल तक के अवशेष मिले जिसमें मुहरें, मिट्टी के बर्तन और सिक्के शामिल थे। संघोल शहर ऐतिहासिक और पुरातत्विक दृष्टि से काफी अहम हो गया.. लेकिन क्या आप उसके बीते हुए कल को जानते है.. दरअसल  सातवीं शताब्दी में भारतीय उपमहाद्वीप की यात्रा करने वाले चीनी बौद्ध भिक्षु शुआनज़ैंग ने अपने लेखों में संघोल का जिक्र किया था। संघोल तब चीन के प्रमुख सिल्क रोड का अहम हिस्सा था, जिसे चीन में शे-तो-तु-लू नाम से पहचाना जाता था। यानि की संघोल का इतिहास सातवी सदी से भी काफी पुराना है। साल 2019 में पुरातत्व विभाग से सेवानिवृत्त हुए तेजा सिंह ने इस मामले में बंद हुई खुदाई को लेकर थोड़ी चिंता जताते हुए कहा कि अब तक जितनी भी खुदाई हुई है उसमें दो बड़े आकार के बौद्ध स्तूप मिले है। जबकि अशोक ने यहां पांच स्तूप तैयार करवाये थे, एक आलीशान हाथीवारा टीला, एक संग्रहालय, कई सारे मठ परिसर, बौद्ध भिक्षुओं का आवासीय स्थल और कई ऐसे अवशेष दबे हुए हैं,  जिनकी सही से अभी तक खुदाई ही नहीं की गई।

संघोल में एसजीएल 5 नाम का बड़ा स्तूप

अगर इस क्षेत्र को और बेहतर तरीके से खोजा जाता है तो यहां हमारे इतिहास के कई पन्ने खुल सकते है। तेजा सिंह का कहना है कि संघोल में एसजीएल 5 नाम का बड़ा स्तूप गोलाकार संरचना वाला है इसकी की दीवारों में 32, 24 और 12 तीलियां हैं, और स्तूप की परिक्रमा के लिए चूने से मजबूत एक रास्ता बनाया हुआ है। वहीं इस स्तूप में एक अस्थि-कलश मिला है, जिसे बुद्ध या किसी अन्य महत्वपूर्ण भिक्षु के अस्थि अवशेष माने जाते है वहीं उस पर खरोष्ठी लिपि खुदी हुई है। इतिहासकतार बताते है कि पंजाब के रास्ते भारत में आये हूणों ने ही यहां तबाही मचाई होगी.. हूनो के कारण ही तक्षशिला विश्वविद्यालय तबाह हो गया था।

भौगोलिक दृष्टि से संघोल न केवल भारत के लिए बल्कि चीन के लिए भी काफी अहम था।   ये बेहद दुख की बात है जो उंचा पिंड जो अपने में भारत का इतना अहम इतिहास समेटे है उसे भारत सरकार के साथ साथ पंजाब सरकार भी एक्प्लोर करने में इंट्रस्टेड नहीं है। हालांकि यहां पर एक संघोल म्यूजियम है.. जो संघोल के इतिहास और खुदाई में मिले वस्तुओं का संग्रहण करते है। संघोल का ये उंचा पिंड अब एक संरक्षित स्थल है। लेकिन उससे संरक्षण से ज्यादा जरूरत है उसके बारे में और गहीनता के खोजबीन की जायेँ। संघोल का इतिहास गवाह है कि कभी बौद्ध धर्म यहां सबसे प्रमुख हुआ करता था.. पंजाब की धरती असल में हड़प्पा सभ्यता से लेकर बौद्ध धर्म के प्रमुख केंद्रों के लिए जानी गई। जिसने पंजाब के इतिहास और भूगोल दोनो को सबसे अलग और खास बनाया है।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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