अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी के मामले की जांच लगातार आगे बढ़ रही है। पुलिस और विशेष जांच टीम (SIT) की कार्रवाई के बीच अब कई नए दावे सामने आए हैं। जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि गिरफ्तार किए गए आठ आरोपियों से अदालत की अनुमति के बाद हुई पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिली हैं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
पूछताछ में क्या सामने आया?
पुलिस सूत्रों के अनुसार, आरोपियों ने पूछताछ में बताया कि कथित तौर पर दान राशि में हेराफेरी करने से पहले पूरी योजना बनाई जाती थी। सूत्रों का दावा है कि आरोपियों को गणना कक्ष में लगे सीसीटीवी कैमरों की लोकेशन, कर्मचारियों की ड्यूटी, सुरक्षा व्यवस्था और नकदी बाहर निकालने के संभावित तरीकों की पूरी जानकारी थी। बताया जा रहा है कि कैमरों की दिशा को ध्यान में रखते हुए कथित तौर पर एक व्यक्ति नकदी अपने पास रखता था, जबकि अन्य कर्मचारी उसके चारों ओर खड़े हो जाते थे, ताकि कैमरों में स्पष्ट दृश्य रिकॉर्ड न हो सके। पुलिस इन दावों का सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों से मिलान कर रही है।
बाथरूम में छिपाने का दावा
पूछताछ के दौरान सामने आया एक और दावा जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बना हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, कथित रूप से गणना कक्ष से निकाली गई नकदी को तुरंत बाहर नहीं ले जाया जाता था। पहले उसे मंदिर परिसर के एक बाथरूम में अस्थायी रूप से छिपाया जाता था। बाद में स्थिति सामान्य होने पर उसे बाहर ले जाने का प्रयास किया जाता था। पुलिस इस पूरे घटनाक्रम की पुष्टि के लिए उपलब्ध साक्ष्यों की जांच कर रही है।
चाबी व्यवस्था भी जांच के दायरे में
जांच एजेंसियां गणना कक्ष की चाबी व्यवस्था की भी पड़ताल कर रही हैं। सूत्रों के अनुसार, एक चाबी कथित रूप से टिन्नू यादव के पास रहती थी, जबकि दूसरी बैंक कर्मचारियों के पास होती थी। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या इसी व्यवस्था का किसी स्तर पर दुरुपयोग हुआ या नहीं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि कंट्रोल रूम में कैमरों की निगरानी कितनी प्रभावी थी और कहीं निगरानी में लापरवाही तो नहीं बरती गई।
योग केंद्र तक पहुंची जांच
मामले के मुख्य आरोपियों में शामिल अविनाश शुक्ल का नाम सामने आने के बाद पुलिस की जांच एक योग केंद्र तक भी पहुंची। बताया गया कि अविनाश अपने भाई अभिषेक के साथ कौशलपुरी स्थित एक योग केंद्र में रहता था। पुलिस ने वहां छापेमारी भी की।
स्थानीय लोगों के अनुसार, कार्रवाई के दौरान वहां से नकदी मिलने की बात सामने आई, जिसकी जांच जारी है। वहीं मीडिया के पहुंचने पर परिसर में एक दान पेटी जैसी संरचना और डिजिटल भुगतान के लिए क्यूआर कोड भी देखा गया। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि उसका उद्देश्य क्या था और उसका उपयोग किस तरह किया जाता था।
कर्मचारियों की संपत्ति और लेन-देन की जांच
जांच अब केवल गिरफ्तार आरोपियों तक सीमित नहीं है। पुलिस और एसआईटी ने गणना कक्ष से जुड़े कर्मचारियों से उनकी आय, खर्च, बैंक खातों और संपत्तियों का पूरा ब्योरा मांगा है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि पिछले कुछ वर्षों में किसी कर्मचारी की आर्थिक स्थिति में असामान्य बदलाव तो नहीं आया। राजस्व रिकॉर्ड, बैंक लेन-देन, निवेश और संपत्ति संबंधी दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है।
जानकारी के अनुसार, श्रद्धालुओं के चढ़ावे की गिनती और बैंक तक राशि पहुंचाने की प्रक्रिया में करीब 44 कर्मचारी अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाते थे। एसआईटी अब पूरी प्रक्रिया की कड़ी-दर-कड़ी जांच कर रही है, जिसमें बैंक कर्मचारी, निजी सुरक्षा गार्ड और परिवहन व्यवस्था भी शामिल हैं।
सुरक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव
मामला सामने आने के बाद श्रीराम जन्मभूमि परिसर में चढ़ावे की गणना व्यवस्था में कई बदलाव किए गए हैं। अब गणना कक्ष में सीसीटीवी निगरानी को और मजबूत किया गया है। कैमरों की मॉनिटरिंग के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की तैनाती की गई है। साथ ही कक्ष में आने-जाने वाले प्रत्येक कर्मचारी की कई स्तरों पर जांच की जा रही है और ड्रेस कोड भी लागू किया गया है।
अब तक पुलिस 26 लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है। अधिकारियों का कहना है कि तकनीकी रिपोर्ट, वित्तीय रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की जांच अभी जारी है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस मामले में और भी नए तथ्य सामने आ सकते हैं।
























