Punjab gangsters: 29 मई 2022.. पंजाब के एक फेमस सिंगर सिद्धू मुसेवाला की मानसा के जवाहरके गांव में गोली मारकर हत्या कर दी गई… पंजाब के एक उभरते सितारे की ऐसी निर्मम हत्या की जिम्मेदारी कनाडा के एक गैंगस्टर गोल्डी बरार ने ली.. उसने इस हत्या के पीछे आपसी दुश्मनी को कारण बताया था.. लेकिन सच्चाई उससे काफी अलग थी.. गोल्डी बरार के सिर पर हाथ है पंजाब के ही एक ऐसे खूंखार गैंगस्टर का, जिसने जेल में रह कर ही इस वक्त कई राज्यों की पुलिस की नाक मे दम कर रखा है.. जी हां हम बात कर रहे है लॉरेंस बिश्नोई के बारे.. जो इस वक्त गुजरात के एक जेल में बंद है.. लेकिन खौफ और खून का खेल वहां से भी जारी है.. गोल्डी बरार हो या लॉरेंस बिश्नोई, पंजाब पहली बार गैंगस्टर की चपेट में नहीं है.. बल्कि पंजाब में ऐसे कई गैंगस्टर हुए जिनका नाम लेने मात्र से पंजाब की जनता सहम जाती है।
डिंपी चांदभन – Dimpy Chandbhan
1, आपको जानकर हैरानी होगी कि 90 के दशक से पहले पंजाब भले ही खालिस्तान आंदोलन के कारण अराजकता से जूझ रहा था, लेकिन पंजाब में गैंगस्टर का बोलबाला पहली बार 90 के दशक के बाद शुरु हुआ। पंजाब में पहले गैंगस्टर के रूप में फेमस है डिंपी चांदभन… गैंगस्टर गोल्डी बरार के हाथों मारे गए सिद्धू मुसेवाला के 2021 में मुसेटेप के नाम से रीलिज एलबम में सिद्धू मूसेवाला ने एक गाना मालवा ब्लॉक गाया था, इस गाने में 90 के दशक के पंजाब के पहले डॉन डिंपी चंदभान का जिक्र था। डिंपी चंदभान के बारे में जब चर्चा बढ़ी थी.. डिंपी चंदभान असल में पहली बार 1985 में तब सुर्खियों में आया था जब एक छात्र नेता मक्खन सिंह की हत्या हुई थी। लेकिन डिंपी इस केस से बरी हो गया.. डिंपी के पिता नहीं थे और मां के इकलौती संतान था। वो पंजाब के फरीदकोट जिले के चांदभर गांव का रहने वाला था। जिसका बचपन का नाम प्रभजिंदर सिंह था।
क्राइम की दुनिया में राज करता था डिंपी
डिंपी एक किसान परिवार से था, औऱ परिवार खेतीबाड़ी ही करता था.. डिंपी खुद क्रिमीनल नहीं बनना चाहता था, वो पढ़ने के लिए चंडीगढ़ गया था, मगर 1985 में हत्या के मामले मे नाम सामने आने के बाद उसका मकसद ही बदल गया। डिंपी ने न केवल क्राइम की दुनिया पर राज करना शुरु कर दिया था बल्कि वो राजनीति में भी सक्रिय होने लगा.. अकाली दल के नेता सिमरनजीत सिंह मान से नजदिकियों के कारण राजनीति की राह आसान हो गई। लेकिन 1990 में अकाली दल में पड़ी फूट के कारण होने वाली हिंसा को लेकर पुलिस काफी सख्त हो गई थी, जिसका नतीजा ये हुआ कि डिंपी को राजनीति में आने का सपना छोड़ना पड़ा और वो यूपी के मुख्तार अंसारी के पास जा पहुंचा। वो पंजाब में आतंकियों को हथियार सप्लाई करने लगा था। जल्दी पैसा कमाने की जिद के कारण 1996 में पहली बार अपहरण किया और उससे मिले 50 लाख रूपयों में से 22 लाख रूपय शराब व्य़ापार में लगा दिये।
इसी बीच उसने 3 और लोगो के साथ मिलकर एक गैंग बना लिया। वो लक्जरी लाइफ का शौकिन था.. इसलिए उसे जल्द से जल्द बहुत सारा पैसा चाहिए था, उसके लिए उसने किडनैपिंग करके फिरौती से अमीर बनने का रास्ता चुना। वो अपना बड़ा शिकार ढूंढ ही रहा था कि उसे बैंगलौर के बिजनस मैन निर्मल जयपुरिया के बारें पता चला.. जो बिना किसी सुरक्षा के रहता था, बस फिर क्या था, वो निर्मल जयपुरिया को उठाने बैंगलौर पहुंच गया, उसने सक्सेसफुली किडनैपिंग की, लेकिन जब फिरौती के 5 करोड़ रूपय की मांग की, तो पुलिसवालों ने उसे बातों में फंसाये रखा और 40 मिनट तक बात करता रहा.. बस फिर क्या था पुलिस की चाल काम कर गई और वो धरा गया। वो दिल्ली लाया गया,लेकिन 2004 में जब वो रिहा हुआ तो वो एक बड़ा नाम बन गया था, कहते है कि करीब 500 गाड़ी जेल के बाहर उसे लेने पहुंची थी, लेकिन ऐसे क्रिमिनल का अंत भी ऐसे ही होता है जैसा वो दूसरो को देने की कोशिश करते है। 7 जुलाई 2006 में दो बाइक सवार बदमाशों ने चंडीगढ़ के सुखना लेक के पास ताबड़तोड़ गोलियां चलाई, जिससे उसकी मौत हो गई।
सुखा काहलवां – Sukha Kahalwan
साल 2010 में पंजाब की क्राइम की दुनिया में एक और शख्स ने कदम रखा, सुखा काहलवां.. गन कल्चर को इंटरनेट और सोशल मीडिया के जरिए ‘ग्लैमराइज़ करने वाला पहला शख्स सुखा काहलवां ही था। पंजाब के कपूरथला जिले के काहलवां गांव का रहना वाला सुखा का असली नाम सुखबीर सिंह था। सुखा एक पंजाब के सबसे बेहतरीन शार्प शूटर में से एक था, जिसपर हत्या लूट, फिरौती के 60 से भी ज्यादा मामले थे, उसका पूरा परिवार अमेरिका चला गया लेकिन मात्र 17 साल की उम्र में हत्या करने के कारण वो नहीं जा सका। सुखा इतना क्रूर था कि उसने अपने दांतो से चबा कर ही एक व्यक्ति की हत्या कर दी थी। लेकिन उसका आंतक ज्यादा समय तक नहीं चल सका, पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया.. इस दौरान 2015 में गैंगस्टर विक्की गौंडर ने जांलधर से नाभा जेल लौटते समय फगवाड़ा में सुखा पर गोलियों से हमला कर दिया, उसे करीब 100 से भी ज्यादा गोलियां मारी गई थी। सुखा पर एक फिल्म शूटर भी बनी थी जिसे पंजाब सरकार ने बैन कर दिया।
विक्की गौंडर – Vicky Gounder
कभी डिस्कस थ्रो में राष्ट्रीय स्तर का खिलाड़ी रहने वाला विक्की गौंडर का नाम तब उछला जब उसने 2015 में कुख्यात गैंगस्टर सुखा की गोलियों से छलनी करके हत्या कर दी थी। यहां तक कि वो उसके शव के सामने नाचने लगा था.. पुलिस ने इसी दौरान उसे गिरफ्तार कर लिया था। सुखा के साथ साथ 2010 से 2015 के बीच गौंडर भी मर्डर, किडनैपिंग और लूट करने के मामले में काफी प्रचलित था। गौंडर को अपराध की दुनिया में नवप्रीत सिंह उर्फ लवली बाबा ही लाया था, जिसकी सुखा ने हत्या कर दी थी, औऱ उसका बदला लेने के लिए गौंडर ने सुखा की हत्या की थी। पकड़े जाने के बाद 27 नवंबर 2016 को नाभा जेल से भाग गया। उसपर 10 लाख रूपय का ईनाम रखा गया। शोसल मीडिया पर पुलिस को खुला चैलेंड देने वाले गौंडर को पंजाब राजस्थान बॉर्डर पर अबोहर हिंदू मलकोट में 27 जनवरी 2018 को मुठभेड़ में पंजाब पुलिस ने मार गिराया। उसी के साथ गैंगस्टर प्रेमा लाहौरिया और सुखप्रीत भी मारे गए थे।
लॉरेंस बिश्नोई – Lawrence Bishnoi
पंजाब के फाजिल्का में जन्मा लॉरेंस बिश्नोई इस वक्त पंजाब में सबसे फेमस गैंगस्टर है, एक कॉंस्टेबल पिता की संतान लॉरेंस ने बचपन में अपने पिता की सादगी देखी थी औऱ वो राजनीति में आकर पंजाब के लिए कुछ करना चाहता था। लेकिन पंजाब विश्वविद्यालय में दाखिला लेने के बाद वो राजनीति में सक्रिय भी हुआ, मगर गोल्डी बरार से दोस्ती होने के बाद वो राजनीति के चक्कर में कई अपराधिक गतिविधियों में शामिल हो गया। लेकिन फिर भी 2013 में बिश्नोई मुक्तसर में सरकारी कॉलेज छात्र चुनावों में शामिल हुआ, और प्रतिद्वंदी की हत्या कर दी, शराब की तस्करी करने लगा.. जिसके कारण 2014 में उसका राजस्थान पुलिस से टकराव हुआ और वो पकड़ा गया। 2021 में उसे तिहाड़ जेल भेजा गया, औऱ फिर 2023 में गुजरात आतंकवाद विरोधी दस्ते ने ड्रग्स की तस्करी मामले में गिरफ्तार कर लिया और अब साबरमती सेंट्रल जेल में है। बिश्नोई जेल में रह कर भी कई हाई प्रोफाइल हत्याओं में शामिल रहा.. और आज भी उसका खौफ कायम है। इन गैंगस्टरो की लिस्ट काफी लंबी है, और उनके अपराधों की सूचि उससे भी लंबी है.. लेकिन सबका अंत एक ही होता है, या तो मौत या फिर जेल की सलाखें।






























