देश के सबसे पुराने रेजिमेंट ‘पंजाब रेजिमेंट’ में भर्ती कैसे होती है ?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 12 अगस्त 2023, 05:30 AM Updated: 12 अगस्त 2023, 05:30 AM
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How to apply for Punjab Regiment in Hindi – जो बोले सो निहाल, सत श्री अकाल इस आदर्श वाक्य का उद्घोष करते हुए दुश्मनों पर टूट पड़ने वाले सिख रणबांकुरों की कई कहानियां हैं. रेजांग्ला का युद्ध हो या फिर कारगिल का या फिर गलवान ही क्यों न हो…सिख रेजीमेंट के सिपाहियों ने हर बार दुश्मनों पर कहर बरपाया है. यह रेजिमेंट भारतीय सेना की सबसे पुरानी रेजिमेंट है, जिसकी स्थापना ब्रिटिश इंडियन आर्मी के तहत हुई थी. यह सन् 1761 से सक्रिय है.

पंजाब रेजिमेंट ने अभी तक कई बार युद्धों में हिस्सा लिया है और हमेशा अजेय रही है, अनेक सम्मान प्राप्त किए है. इस रेजिमेंट में मुख्य रूप से पंजाब, जम्मू और कश्मीर और हिमाच प्रदेश के सिख और डोगरा जाति के लोग भर्ती किए जाते हैं, जबकि इसके अन्य दो बटालियन में अन्य जाति के लोगों की भी भर्ती होती है लेकिन क्या आप जानते हैं कि पंजाब रेजिमेंट में भर्ती कैसे होती है.

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How to apply for Punjab Regiment

पंजाब रेजिमेंट में भर्ती के लिए क्वालिफिकेशन करें तो 8 वीं, 10 वीं और 12 वीं पास कोई भी व्यक्ति, जिसकी आयु 18 साल से 25 साल के बीच है, वह अप्लाई कर सकता है. इसके लिए सबसे पहले आपको ऑफलाइन आवेदन करना होगा. उसके बाद आपको ऑनलाइन या ऑफलाइन परीक्षा में सफल होना होगा. अगर आप परीक्षा में सफल हो जाते हैं तो आपको मेडिकल परीक्षा में भी सफल होना पड़ता है. अगर आप मेडिकल परीक्षा भी पास कर जाते हैं तो उसके बाद एक इंटरव्यू होता है, जिसमें आपको सफल होना पड़ता है. पंजाब रेजिमेंट में सैनिक, हवलदार, नायक, सूबेदार जैसे कई पद होते हैं. इन पदों पर भर्ती के लिए अलग-अलग योग्यता, आयु सीमा, शारीरिक मापदंड और परीक्षा होती है.

ध्यान देने वाली बात है कि स्वतंत्रता और विभाजन से पहले ब्रिटिश भारतीय सेना में कई पंजाब रेजिमेंट थी. इन्हें मिलाकर पहली पंजाब रेजिमेंट, दूसरी पंजाब रेजिमेंट, 8 वीं पंजाब रेजिमेंट, 14वीं पंजाब रेजिमेंट, 15 वीं पंजाब रेजिमेंट और 16 वीं पंजाब रेजिमेंट बनाई गई. 1947 में पहली, 8 वीं, 14 वीं, 15 वीं और 16 वीं पंजाब रेजिमेंट पाकिस्तानी सेना में चली गई, जबकि दूसरी पंजाब रेजिमेंट को भारतीय सेना में बरकरार रखा गया. तब से लेकर अब तक यह भारतीय सेना का मान बढ़ा रहे हैं. यह भारतीय सेना की एकमात्र ऐसी इंफेंट्री है, जिसके पास नौसेना का प्रतीक चिह्न द गैली यानी नाव है.

लोंगेवाला की लड़ाई पर बनी है फिल्म बॉर्डर

वैसे तो भारत के जांबाज तिरंगे को ऊंचा रखने, अपने देश की शान बान को बचाने और भारतवासियों के भय से दूर रखने के लिए अपनी जान की बजी लगा देते हैं पर जब बात सबसे जांबाज़ और शेर-ए-दिल रेजिमेंट की आती है तो पंजाब रेजिमेंट का नाम हमेशा लिया जीता है. पंजाब रेजिमेंट ने कई महत्वूपर्ण युद्धों में भाग लिया…लेकिन लोंगेवाला की लड़ाई उन सब में प्रमुख है.1971 में हुए इस युद्ध मेजर कुलदीप सिंह चांदपुरी के नेतृत्व में 120 जांबाजों ने 3000 से अधिक

पाकिस्तानी सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया था. यह लड़ाई राजस्थान के सीमावर्ती चौकी लोंगेवाला पर लड़ी गई थी. यूनिट ने 5 दिसंबर 1971 की रात के आखिरी पांच घंटों में बिना किसी सहारे के लड़ाई लड़ी थी क्योंकि तब भारतीय वायुसेना के पास रात में अटैक करने की क्षमता नहीं थी. इसी लड़ाई के ऊपर बॉलीवुड में फिल्म बनी है बॉर्डर.

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