Pakistan-Afghanistan Tension: भारत के दो पड़ोसी देशों पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले कुछ महीनों से दोनों देशों के बीच सीमा पर झड़पें, हवाई हमलों के दावे और एक-दूसरे पर आतंकवाद को बढ़ावा देने के आरोप तेज हो गए हैं। हालिया घटनाओं के बाद यह आशंका जताई जा रही है कि यदि हालात नहीं संभले तो दोनों देशों के बीच बड़ा सैन्य टकराव हो सकता है। हालांकि, अब तक किसी भी पक्ष ने औपचारिक रूप से युद्ध की घोषणा नहीं की है।
सीमा पर लगातार बढ़ रहा तनाव| Pakistan-Afghanistan Tension
मंगलवार को पाकिस्तान ने दावा किया कि उसने अफगानिस्तान की सीमा से बलूचिस्तान में प्रवेश करने वाले चार साधारण ड्रोन को इंटरसेप्ट किया। दूसरी ओर, तालिबान प्रशासन ने दावा किया कि उसने ड्रोन के जरिए पाकिस्तान के भीतर सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। तालिबान की ओर से हमलों में कई लोगों के मारे जाने का दावा किया गया, जबकि पाकिस्तान ने केवल कुछ लोगों के घायल होने की बात स्वीकार की। पाकिस्तान के अनुसार, बलूचिस्तान के सरनान इलाके में हुए ड्रोन हमले में दो लोग घायल हुए।
तालिबान ने पाकिस्तान के भीतर हमले का किया दावा
तालिबान के रक्षा मंत्रालय ने कहा कि उसकी सेना ने बलूचिस्तान के सरनान क्षेत्र में इस्लामिक स्टेट खोरासान (ISIS-K) से जुड़े एक ठिकाने और खैबर पख्तूनख्वा के कुछ अन्य स्थानों पर कार्रवाई की। हालांकि पाकिस्तान ने इन दावों को खारिज कर दिया। इससे पहले पाकिस्तान ने भी अफगानिस्तान में हवाई हमले किए थे। तालिबान प्रशासन का दावा है कि उन हमलों में 36 लोगों की मौत हुई, जिनमें महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे। पाकिस्तान का कहना है कि उसने केवल आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया था, जबकि तालिबान का आरोप है कि हमले में आम नागरिक मारे गए।
कराची हमले के बाद पाकिस्तान की जवाबी कार्रवाई
तनाव की ताजा कड़ी 27 जून को कराची में सिंध रेंजर्स मुख्यालय पर हुए आतंकी हमले के बाद शुरू हुई। इस हमले में तीन पाकिस्तानी जवानों की मौत हुई और चार अन्य घायल हो गए। पाकिस्तान ने इस हमले के लिए तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) से जुड़े संगठन जमात-उल-अहरार को जिम्मेदार ठहराया। इसके जवाब में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के पक्तिया, पक्तिका और कुनार प्रांतों में हवाई अभियान चलाने का दावा किया। पाकिस्तानी सेना के अनुसार, इन अभियानों में कम से कम 25 चरमपंथी मारे गए और हथियारों का बड़ा जखीरा नष्ट किया गया।
जमीनी कार्रवाई और बदले की चेतावनी
पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने खैबर पख्तूनख्वा के बाजौर जिले में भी अभियान चलाया। पाकिस्तान का दावा है कि इस कार्रवाई में जमात-उल-अहरार के चार सदस्य मारे गए। वहीं, टीटीपी ने स्वीकार किया कि उसका एक कमांडर खान फ़रोश उर्फ जबुल इस अभियान में मारा गया। इन घटनाओं के बाद तालिबान ने पाकिस्तान के हवाई हमलों का जवाब देने की बात कही है। सीमा पर लगातार बढ़ती सैन्य गतिविधियों ने दोनों देशों के रिश्तों को और तनावपूर्ण बना दिया है।
कैसे बिगड़े पाकिस्तान और तालिबान के रिश्ते?
एक समय पाकिस्तान को तालिबान का सबसे बड़ा समर्थक माना जाता था। अगस्त 2022 में जब तालिबान ने काबुल पर कब्जा किया, तब पाकिस्तान ने इसे अपनी बड़ी रणनीतिक सफलता के रूप में पेश किया था। लेकिन समय के साथ दोनों पक्षों के संबंध खराब होते गए। पाकिस्तान का आरोप है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल उसके खिलाफ आतंकी हमलों के लिए किया जा रहा है। वहीं तालिबान इन आरोपों को खारिज करते हुए कहता है कि यह पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा से जुड़ा मामला है।
दोनों देशों के बीच डूरंड लाइन को लेकर भी लंबे समय से विवाद बना हुआ है। पाकिस्तान इसे अंतरराष्ट्रीय सीमा मानता है, जबकि तालिबान प्रशासन इसे स्वीकार नहीं करता।
बढ़ी अंतरराष्ट्रीय चिंता
लगातार हो रहे हमलों, जवाबी कार्रवाइयों और तीखे बयानों ने पूरे क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। फिलहाल दोनों देशों की ओर से सैन्य गतिविधियां जारी हैं और स्थिति पर करीबी नजर रखी जा रही है।
































