कभी अजहरुद्दीन, तो कभी अरुण जेटली…खेल के मैदान से लेकर राजनीति की पिच तक, जानिए कब-कब बगावती हुए सिद्धू?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 29 सितम्बर 2021, 05:30 AM Updated: 29 सितम्बर 2021, 05:30 AM
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पंजाब चुनाव से कुछ महीनों पहले कांग्रेस पार्टी में जिस तरह की आपस कलह जारी है, उसने राज्य की राजनीति में अच्छा खासा बवाल खड़ा कर दिया। पंजाब कांग्रेस में उथल-पुथल जारी है। कैप्टन अमरिंदर सिंह के इस्तीफे और चरणजीत सिंह चन्नी को सीएम बनाए जाने के बाद ऐसा लग रहा था कि अब सबकुछ ठीक हो जाएगा और कांग्रेस अब चुनावों की रणनीति पर फोकस करेगीं।

लेकिन इस बीच बीते दिन नवजोत सिंह सिद्धू ने पंजाब कांग्रेस के अध्यक्ष पद से इस्तीफा देकर एक बार फिर हर किसी को चौंकाकर रख दिया। बड़ी जद्दोजहद के बाद सिद्धू को कांग्रेस ने ये जिम्मेदारी सौंपी थीं, लेकिन चंद ही दिनों में उन्होंने यहां भी बागी तेवर दिखा दिए। 

सिद्धू का बगावत से रहा है पुराना नाता

वैसे सिद्धू की बगावत की ये आदत नई नहीं। खेल का मैदान हो या फिर राजनीति की पिच सिद्धू हर जगह ही इस तरह के तेवर दिखाते नजर आए हैं। क्रिकेट में वो कप्तान अजहरुदीन के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं, तो वहीं राजनीति में भी कई दलों ने साथ उन्होंने ऐसा ही किया। 

जब क्रिकेट में दिखाए थे तेवर

बात पहले क्रिकेट की करते हैं। राजनीति से पहले सिद्धू का क्रिकेट में भी करियर विवादित ही रहा। बात साल 1996 की है, जब सिद्धू टीम के कप्तान अजहरुदीन ने खिलाफ बगावत दिखाई थीं। तब वो इंग्लैंड दौरे को बीच में ही छोड़ देश लौट आए थे। जिस पर भी काफी हंगामा खड़ा हुआ था। 

अरुण जेटली के खिलाफ भी हो गए थे सिद्धू

इसके बाद सिद्धू राजनीति में आए तो उनका विवादों से नाता कम नहीं हुआ। बीजेपी की टिकट पर सिद्धू ने अमृतसर से लोकसभा चुनाव लड़ा और जीता भी। तब सिद्धू पर एक मारपीट का पुराना केस चल रहा था। तब अरुण जेटली की पैरवी से सिद्धू को जमानत मिली। फिर सिद्धू ने अरुण जेटली को अपना गुरू बना लिया। लेकिन जब 2014 में बीजेपी ने अरुण जेटली को अपना उम्मीदवार बना दिया, तो सिद्धू ने चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा कर दी। जिसके बाद सिद्धू के यहां भी सुर बगावती हो गए थे। 

अमरिंदर सिंह के साथ चलती रही तकरार

बीजेपी छोड़ साल 2017 में सिद्धू कांग्रेस में आए। उनको पार्टी में लाने के लिए अमरिंदर सिंह ने एक बड़ी भूमिका निभाई और उन्हें पंजाब सरकार में मंत्री भी बनाया। लेकिन कुछ समय के बाद सिद्धू ने उनके खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया। कई मुद्दों पर दोनों के बीच धीरे-धीरे तक तकरार बढ़ने लगी। इसका नतीजा यही रहा कि अब कैप्टन अमरिंदर सिंह को अपनी मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़नी पड़ी। 

अब नाराजगी की वजह से छोड़ा पद

अब कांग्रेस पार्टी ने उनको कुछ दिन पहले ही प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी थीं। लेकिन अब उन्होंने कुछ नाराजगी की वजह से एक बार फिर अपनी ही पार्टी में बगावत कर दी। हालांकि कांग्रेस आलाकमान सिद्धू को मनाने की कोशिशों में जुटा है। इस वजह से अभी उनकी इस्तीफा भी नामंजूर किया गया। आगे इस पूरे सियासी घटनाक्रम में क्या होता, ये देखने वाली बात होगी?

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