UP Election: कौन हैं वो मुस्लिम नेता, जिनके सहारे चुनावी मैदान में उतर सकती हैं समाजवादी पार्टी?

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 29 सितम्बर 2021, 05:30 AM Updated: 29 सितम्बर 2021, 05:30 AM
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मायावती की बहुजन समाज पार्टी (BSP) और कांग्रेस के जो प्रमुख मुस्लिम नेता थे, उनका पिछले एक साल में समाजवादी पार्टी में शामिल होने से मुस्लिम नेतृत्व में मजबूती आई है। पार्टी के दिग्गज नेता आजम खान वैसे तो मौजूदा वक्त में जेल में हैं और खराब स्वास्थ्य जूझ भी रहे हैं। तो वहीं दूसरी तरफ उत्तर प्रदेश के इलेक्शन के ग्राउंड पर असदुद्दीन ओवैसी के कदम पड़ने से समाजवादी पार्टी की चुनौतियों में इजाफा हुआ है। तो सवाल ये है कि सपा के पास आजम खां की भरपाई का कोई ऑप्शन है क्या? सवाल ये है कि ऐसे हालातों में अखिलेश यादव किन मुस्लिम नेताओं को यूपी चुनाव के मैदान पर उतारेंगे?

हाल के महीनों पर गौर करें तो सपा में शामिल होने वाले जो मुस्लिम नेता हैं उनमें एक नाम कांग्रेस के सलीम इकबाल शेरवानी का भी नाम हैं, जो कि 5 दफा सांसद रहे और पूर्व पीएम राजीव गांधी के दोस्त भी। उम्र उनकी 68 साल है और वो बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद सपा के हो गए थे, लेकिन फिर उन्होंने 2009 में कांग्रेस में घर वापसी की।

दरअसल शेरवानी ने मुलायम सिंह यादव के भतीजे धर्मेंद्र यादव को टिकट दिए जाने के बाद सपा को छोड़ दिया था। हालांकि कहानी का अंत यहीं नहीं होता। फिर से सपा के इर्द गिर्द ही शेरवानी चक्कर काटते दिखने लगे हैं। उन्होंने मुस्लिम समुदाय को एक बड़ा संदेश देते हुए बीते मार्च महीने में अलीगढ़ में किसान महापंचायत हुई और सपा के कई अहम आयोजन और कार्यक्रम हुए, उसमें शेरवानी को सपा के मंच पर पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के साथ देखा गया। तो आने वाले वक्त के लिए उम्मीद तो लगाई ही जा सकती है कि सपा के लिए एक मुस्लिम चेहरा शेरवानी भी हो सकते हैं।

आगे और संभावित चेहरों का जिक्र कर लेते हैं। अंसारी भाइयों में सबसे बड़े सिबगतुल्लाह अंसारी और उनके बेटे का का हाल ही में सपा ने पार्टी में जोरों-शोरों से स्वागत किया। दूसरी तरफ बसपा सांसद अफजल अंसारी और पूर्व बसपा विधायक मुख्तार अंसारी भी सपा के हैं। इनका गाजीपुर और मऊ समेत पूर्वांचल के डिस्ट्रिक्ट और आसपास के एरिया में, जो क्षेत्रों में मुसलमान आबादी है उन पर काफी प्रभाव हैं।

सपा में शामिल होने वालों में अन्य मुस्लिम नेताओं की बात करें तो इनमें सीतापुर के पूर्व बीएसपी सांसद कैसर जहान भी हैं, जिनका मुस्लिम आबादी पर अच्छा खासा प्रभाव हैं। अब जब आजम खान जैसा बड़ा नाम सपा के पास होते हुए भी नहीं है तो इस सिचुएशन में जो ये सपा के साथ जुड़े हुए और बड़े मुस्लिम नाम हैं उनसे सपा को आने वाले इलेक्शन में काफी उम्मीद होगी कि वो आजम खान की कमी की बरपाई कर सकें। 

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