आजादी के बाद से 250 गुना बढ़ी सांसदों की सैलरी, राजा-महाराजाओं वाली सुविधाएं भी मिलती हैं अलग से!

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 23 मार्च 2024, 05:30 AM Updated: 23 मार्च 2024, 05:30 AM
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भारत दुनिया के उन देशों में से एक है जहां सरकारी नौकरियों को प्राइवेट से ज्यादा महत्व दिया जाता है। क्योंकि सरकारी नौकरी में जो सुख-सुविधाएं मिलती हैं वह शायद ही किसी अन्य प्राइवेट कंपनी में मिलती होंगी। वहीं अगर राजनीति की बात करें तो एक बार आप राजनीति में आ जाएं तो कुबेर का धन आपके हाथ लग जाता है। हम ये सब इसलिए कह रहे हैं क्योंकि संसद के पद पर बैठे व्यक्ति को इतनी सुख-सुविधाएं मिलती हैं और इतनी तरक्की मिलती है जो किसी अन्य नौकरी में संभव नहीं होती। आजादी के बाद से अगर किसी की सैलरी सबसे ज्यादा बढ़ी है तो वह है सांसदों की। पहली लोकसभा के बाद से सांसदों का वेतन 250 गुना से ज्यादा बढ़ चुका है। वहीं, सांसदों को वेतन के अलावा अलग से भत्ते भी मिलते हैं।

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सांसदों की पहली सैलरी

1947 में जब देश आजाद हुआ तो वह आर्थिक संकट से जूझ रहा था, जिसके कारण सांसदों का वेतन 400 रुपये तय किया गया था और आजादी के बाद अगले डेढ़ दशक तक यह वेतन इतना ही रहा। साल 1964 में सांसदों के वेतन में बढ़ोतरी तो हुई लेकिन यह सिर्फ 100 रुपये थी। फिर वेतन बढ़कर 500 रुपये हो गया। 2016 में यह वेतन बढ़कर 16,000 रुपये हो गया। सबसे बड़ी सैलरी बढ़ोतरी 2009 में हुई थी, जब इसे बढ़ाकर 50 हजार रुपये प्रति माह कर दिया गया था। इसके बाद 2018 में इसे बढ़ाकर 1 लाख रुपये प्रति माह कर दिया गया।

आजादी के बाद से 77 वर्षों में सांसदों का वेतन 250 गुना से अधिक बढ़ गया है। यह वेतन वृद्धि किसी भी भारतीय क्षेत्र में सबसे बड़ी है। वेतन पाने के अलावा, संसद सदस्यों को कई लाभ भी प्रदान किए जाते हैं, जैसे मुफ्त आवास, बिजली, फोन, यात्रा और चिकित्सा देखभाल। वर्तमान में देश में लगभग 800 सांसद हैं, जो संसद के दोनों सदनों (लोकसभा और राज्यसभा) का प्रतिनिधित्व करते हैं।

संविधान के अनुच्छेद 106 के अनुसार, संसद सदस्यों को अपने वेतन और लाभों को नियंत्रित करने वाले कानून बनाने का अधिकार है। आयकर अधिनियम, 1961 के तहत प्रदान किए गए लागत मुद्रास्फीति सूचकांक के आधार पर, सांसदों के वेतन, दैनिक भत्ते और पेंशन में हर पांच साल में वृद्धि की जाएगी।

सांसदों को मिलने वाले भत्ते

सांसदों को संसद सत्र के दौरान प्रतिदिन 2,000 रुपये का दैनिक भत्ता और हर महीने 70,000 रुपये का निर्वाचन क्षेत्र भत्ता मिलता है। इसके अलावा उन्हें हर महीने 60,000 रुपये कार्यालय व्यय भत्ता, यात्रा भत्ता और मुफ्त बिजली, पानी और फोन की सुविधा भी दी जाती है। रिटायरमेंट के बाद भी हर महीने 25,000 रुपये की अलग पेंशन मिलती है जो सेवा के प्रत्येक अतिरिक्त वर्ष के लिए 1,500 रुपये बढ़ जाती है।

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