जानिए कौन है करीम लाला, जिसका इंदिरा गांधी से मिलने का किया जा रहा है दावा!

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 16 जनवरी 2020, 05:30 AM Updated: 16 जनवरी 2020, 05:30 AM
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शिवसेना के वरिष्ठ नेता और सांसद संजय राउत(Sanjay Rawat) ने 15 जनवरी, बुधवार को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी(Former Prime Minister Indira Gandhi) को लेकर एक बड़ा बयान दिया था. संजय राउत द्वारा एक इंटरव्यू में दावा किया गया कि अंडरवर्ल्ड डॉन करीम लाला से पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी मिलने के लिए मुंबई आया करती थीं, तो  आइए आपको करीम लाला के बारे में बताते हैं, जिसका नाम चर्चाओ में बना हुआ है…

अफगानिस्तान से आया था भारत

अंडरवर्ल्ड डॉन करीम लाला का असली नाम अब्दुल करीम शेर खान था. अफगानिस्तान के कुनार प्रांत में उसका जन्म साल 1911 में हुआ था. पश्तून समुदाय का आखिरी राजा कहलाए जाने वाले अब्दुल करीम शेर खान का परिवार बहुत संपन्न था और ये कारोबारी खानदान से ताल्लुक रखता था. जिंदगी में अधिक सफलता प्राप्त करने की चाह ने उसे हिंदुस्तान की ओर जाने के लिए प्रेरित किया था.

अंडरवर्ल्ड का पहला माफिया डॉन

भले ही मुंबई अंडरवर्ल्ड का पहला डॉन हाजी मस्तान मिर्जा को कहा जाता है, लेकिन अंडरवर्ल्ड के जानकारों की मानें तो अंडरवर्ल्ड का पहला माफिया डॉन करीम लाला था, इसे हाजी मस्तान भी असली डॉन कहता था. मुंबई में करीम लाला का आतंक काफी ज्यादा था. जिसके चलते यहां तस्करी के साथ ही कई गैर कानूनी धंधों में उसका नाम शामिल था. इसे लेकर ऐसा भी कहा जाता है कि लाला जरूरतमंदों और गरीबों की सहायता भी किया करता था.

इससे शुरू किया धंधा

केवल 21 साल की उम्र में अब्दुल करीम शेर खान उर्फ करीम लाला हिंदुस्तान में आ गए थे, इस दौरान ये पाकिस्तान के पेशावर शहर के रास्ते से मुंबई में आया था. जिसके बाद दिखावे के लिए करीम लाला ने मुंबई में कारोबार शुरू किया, लेकिन असलीयत में वो मुंबई डॉक से हीरे और जवाहरात की तस्करी का धंधा करने लगा था. इस काम में उसने साल 1940 तक एक तरफा पकड़ बना ली. तस्करी के इस धंधे में उसे बहत फायदा हो रहा था. जिसके चलते उसके पास पैसों की भी कमी नहीं थी. वहीं, उसने मुंबई में बहुत सी जगहों पर दारू और जुए के अड्डे भी खोले, जिसके चलते उसके काम के साथ ही उसका नाम भी बढ़ता ही जा रहा था.

रोजाना लगाता था जनता दरबार

करीम लाला रोजाना अपने घर में जनता का दरबार लगाया करते था और लोगों के मामलों में मध्यस्थ के तौर पर शामिल होकर उन्हें निपटाते था. जिसके चलते ये इतना ज्यादा लोकप्रिय हो गए था कि सभी समाज और संप्रदाय के लोग उसके पास सहायता मांगने के लिए आया करते थे. उसकी नजर में कोई अमीर या कोई गरीब का फर्क नहीं था, कहा जाता है कि मुंबई में उसके घर में रोजाना शाम के समय जनता दरबार लगया जाता था. इस दरबार में वो लोगों से मिलते था. यहां वो जरूरतमंदों और गरीबों की मदद करता था. इसके अलावा जो लोग तलाक चाहते थे उन्हें करीम लाला अक्सर समझाता था कि हर समस्या का हल तलाक नहीं होता.

जब हेलन की कमाई लेकर भाग गया था दोस्त

करीम लाला को फिल्म दुनिया के काफी नजदीक माना जाता है. एक बार की बात है जब अभिनेत्री हेलन करीम लाला के पास सहायता के लिए पहुंची थी क्योंकि उनका एक दोस्त पीएन अरोड़ा उनकी सभी कमाई को लेकर फरार हो गया था. इसके साथ ही वो पैसे वापस देने से भी मना कर रहा था. ऐसे में हताश होकर हेलन उस समय के सुपरस्टार दिलीप कुमार के जरिए से करीम लाला के पास पहुंचीं और फिर करीम लाला के मध्यस्थता की और हेलन को अपना पैसा वापस मिल गया था.

करीम लाला ने की थी दाऊद की पिटाई, आज भी होती है चर्चा

स्करी के धंधे में दाऊद इब्राहिम के कदम रखने से करीम लाला काफी हैरान और परेशान था. ऐसे में दाऊद इब्राहिम और करीम लाला के बीच की दुश्मनी खुलकर सामने आ चुकी थी. बताते हैं कि दाऊद एक बार मुंबई में ही करीम लाला के हत्थे चढ़ गया था. इस दौरान करीम लाला ने दाऊद की जमकर पिटाई की थी. जिसके चलते दाऊद को काफी गंभीर चोटें भी आई थीं. वहीं, आज भी ये बात मुंबई के अंडरवर्ल्ड में प्रचलित है.

दाऊद ने लिया था भाई की मौत का बदला

अंडरवर्ल्ड में दाऊद के आने से पहले कभी भी खून खराबा नहीं होता था, लेकिन करीम लाला से दुश्मनी होने पर दाऊद को बड़ा खामियाजा का भुगतन करना पड़ा. इन दोनों के बीच की दुश्मनी और नफरत इतनी ज्यादा बढ़ गई कि साल 1981 में करीम के पठान गैंग ने दाऊद के भाई शब्बीर को दिन दहाड़े मौत के घाट उतार दिया था. जिसके बाद दाऊद तिलमिला उठा था और फिर उसने मुंबई की सड़कों पर गैंगवॉर की शुरुआत की. जिसके बाद दाऊद गैंग और पठान गैंग में खूनी जंग शुरू हो चुकी थी. वहीं, अपने भाई की हत्या का बदला लेने की चाह में साल 1986 में दाऊद इब्राहिम ने अपने गुर्गों द्वारा करीम लाला के भाई रहीम खान की हत्या कर दी थी.

2002 में मुंबई में हुई थी मौत

मुंबई अंडरवर्ल्ड में साल 1981 से 1985 के दौरान दाऊद इब्राहिम और करीम लाला गैंग में काफी गैंगवॉर होती रहा. जिसके चलते दाऊद की डी कंपनी द्वारा धीरे धीरे करीम लाला के पठान गैंग का मुंबई से सफाया ही हो गया. इन दोनों के बीच के गैंगवॉर में दोनों की तरफ से करीब दर्जनों लोग मारे गए. हालांकि अंडरवर्ल्ड जानकार की मानें तो करीम लाला को ही मुंबई अंडरवर्ल्ड का पहला डॉन मान जाता है. बता दें कि करीम लाला और हाजी मस्तान की दोस्ती भी लोगों में काफी प्रसिद्ध रही. 19 फरवरी, 2002 में जब करीम लाला 90 साल के थे तब मुंबई में ही उसकी मौत हो गई थी.

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