बेंगलुरु के इंजीनियर अतुल सुभाष की आत्महत्या के बाद देश में सुसाइड से जुड़े आंकड़ों पर बहस

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 13 दिसम्बर 2024, 05:30 AM Updated: 13 दिसम्बर 2024, 05:30 AM
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NCRB Suicide Data: बेंगलुरु में एक इंजीनियर अतुल सुभाष की आत्महत्या (Atul Subhash Suicide Case) ने सुसाइड और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अतुल सुभाष ने अपनी पत्नी और ससुराल वालों द्वारा की जा रही प्रताड़ना से तंग आकर 9 दिसंबर को आत्महत्या कर ली। सुसाइड से पहले उन्होंने एक डेढ़ घंटे का वीडियो और 24 पन्नों का सुसाइड नोट छोड़ा, जिसमें उन्होंने अपनी जान देने के कारणों का खुलासा किया।

और पढ़ें: सॉफ़्टवेयर इंजीनियर अतुल सुभाष की आत्महत्या के बाद दहेज उत्पीड़न और घरेलू हिंसा कानून में सुधार की मांग

इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर आत्महत्या और मानसिक तनाव से जुड़े मुद्दों पर बहस तेज हो गई है। लोग जानना चाहते हैं कि आखिर क्यों इतने लोग आत्महत्या जैसे जघन्य कदम उठाते हैं और क्या हमें इस समस्या का समाधान तलाशने की जरूरत नहीं है?

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शादीशुदा पुरुषों के सुसाइड के मामले में बढ़ोतरी- NCRB Suicide Data

अतुल सुभाष की आत्महत्या ने उस सवाल को फिर से ताजा कर दिया है, जिसका जवाब अक्सर छिपा रहता है — क्या शादीशुदा पुरुषों की तुलना में शादीशुदा महिलाओं के सुसाइड मामलों की संख्या (NCRB Married Women Suicide Data) ज्यादा है? साल 2022 के आंकड़ों के मुताबिक, पुरुषों ने महिलाओं की तुलना में 2.44 गुना ज्यादा आत्महत्याएं की। इसका मतलब यह है कि हर महिला की तुलना में लगभग 2.44 पुरुषों ने अपनी जान ली।

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) के आंकड़ों के अनुसार, पिछले कुछ सालों में शादीशुदा पुरुषों के आत्महत्या के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई है। साल 2021 की NCRB रिपोर्ट के मुताबिक, 81,063 शादीशुदा पुरुषों ने आत्महत्या की, जबकि 28,680 शादीशुदा महिलाओं ने आत्महत्या की।

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इससे स्पष्ट होता है कि आत्महत्या के मामलों में शादीशुदा पुरुषों की संख्या (Indian Married men Suicide Data) शादीशुदा महिलाओं की तुलना में काफी अधिक है। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि इन सुसाइड मामलों के पीछे मुख्य कारण परिवारिक विवाद, आर्थिक संकट और सोशल प्रेशर जैसे मुद्दे हो सकते हैं।

पिछले 5 सालों के आंकड़े

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड्स ब्यूरो (NCRB) द्वारा जारी किए गए पिछले 5 सालों के आंकड़ों पर नजर डालें तो आत्महत्या करने वाले पुरुषों की संख्या महिलाओं से कहीं ज्यादा रही है। आंकड़े बताते हैं कि पुरुषों के लिए आत्महत्या का कारण न केवल मानसिक दबाव और तनाव हो सकता है, बल्कि सामाजिक दबाव और पारिवारिक समस्याएं भी इसमें प्रमुख भूमिका निभाती हैं।

2018 से 2022 तक के आंकड़े

साल 2018 से लेकर 2022 तक की अवधि में आत्महत्या के कुल मामलों में एक चिंताजनक बढ़ोतरी देखी गई। इस दौरान सुसाइड के कुल मामलों में महिलाओं की संख्या भले ही बढ़ी हो, लेकिन पुरुषों की संख्या में लगातार बढ़ोतरी हुई है।

2018: सुसाइड के कुल 1,34,516 मामले दर्ज किए गए थे, जिनमें 42,391 महिलाएं और 92,114 पुरुष थे।

2019: इस साल सुसाइड के कुल 1,39,123 मामले दर्ज हुए, जिनमें 41,493 महिलाएं और 97,613 पुरुष थे।

2020: महामारी के इस साल सुसाइड के कुल 1,53,052 मामले थे, जिनमें 44,498 महिलाएं और 1,08,532 पुरुष थे।

2021: इस साल कुल मामलों की संख्या बढ़कर 1,64,033 हो गई, जिनमें 45,026 महिलाएं और 1,18,979 पुरुष थे।

2022: 1,70,924 सुसाइड के मामले दर्ज किए गए, जिनमें 48,172 महिलाएं और 1,22,724 पुरुष थे।

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