Sikhism in Ladakh: गुरु नानक देव जी की लद्दाख यात्रा, जब पत्थर भी बन गया मोम

Shikha Mishra | Nedrick News Published: 28 जनवरी 2026, 10:49 AM Updated: 28 जनवरी 2026, 10:49 AM
Google News
Follow Us on Google News
Prefer Nedrick News
on Google

Sikhism in Ladakh: ये बात 1517 की है, सिखो के पहले गुरु गुरु नानक देव जी सिख धर्म के प्रचार प्रसार के लिए भारत के हर कोने में यात्रा कर रहे थे। 1517 में वो अपनी उदासी कर रहे थे। अपनी यात्रा करते करते वो लद्दाख पहुंचे थे, लेकिन वहां उन्हें पहली बार स्थानीय लोगों से पता चला एक ऐसे राक्षस के बारे में, जो हर किसी को पत्थर का बना देता था, लेकिन कोई उसका कारण नहीं जानता था.. बस फिर क्या था.. मानवता और संसार के भले के लिए गुरु नानक देव जी उस स्थान पर पहुंचे, जहां वो राक्षस था…वहां पहुंच कर गुरु साहिब ने परमेश्वर को याद करते हुए भजन शुरु कर दिया…

जैसे ही राक्षस ने गुरु साहिब को देखा उसने पहाड़ की चोटी से एक बड़े पत्थर से उन पर हमला कर दिय़ा… सब डर गए थे कि अब क्या होगा.. लेकिन जैसे ही उस पत्थर ने गुरु साहिब को छूआ वो मोम में बदल गया, और उस स्थान पर ही पहली बार सिख धर्म की लौ जगमगाई और स्थापित हुआ ऐतिहासिक गुरुद्वारा पत्थर साहिब। आज उत्तर भारत के छोर पर बसा एक छोटा सा राज्य लेह लद्दाख, जहां सिख वैसे तो अल्पसंख्यक है लेकिन सिख धर्म की खुशबू वहां भी मौजूद है। इस वीडियो में हम जानेंगे कि कैसे लेह लद्दाख में सिख धर्म पहुंचा और आज यहां सिखों ने अपनी छाप छोड़ी हुई है। क्या है लद्दाख में सिखों का कहानी-

लद्दाख के बारे में जानकारी 

लेह लद्दाख का नाम एक साथ लिया जाता है, लेकिन लेह असल में लद्दाख की राजधानी है, लद्दाख भारत का एक केंद्र शासित प्रदेश है। लेह पर 19वीं व 20वीं शताब्दी में यहाँ डोगरा राजवंश का  शासन था। लेह के बाद कारगिल लद्दाख का दूसरा सबसे बड़ा क्षेत्र है, कारगिल का नाम सुनकर आपको 1999 में कारगिल वॉर तो याद आ ही गया होगा… दरअसल लद्दाख जम्मू और कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम पारित होने के बाद, 31 अक्टूबर 2019 को लद्दाख को भारत का केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। इससे पहले, यह जम्मू और कश्मीर राज्य का ही हिस्सा था। लद्दाख का क्षेत्रफल 59,146 वर्ग किलोमीटर है, तो वहीं 2011 के अनुसार लद्दाख की आबादी 274,289 के आसपास है। लद्दाख में मुस्लिम 46%, बौद्ध (40%), और हिंदू (12%) हैं, बाकी 2% अन्य धर्मों के लोग रहते हैं। लद्दाख का संस्कृति तिब्बत से प्रेरित है, लेकिन बावजूद इसके लद्दाख में सिख धर्म की झलक भी देखी जा सकती है।

लद्दाख में सिख धर्म

लद्दाख में जब आप सिख धर्म की बात करत है तो इसका इतिहास सिखों के पहले गुरु गुरु नानक देव जी से जुड़ा है। जिन्होंने अपनी उदासियों के दौरान यात्रा की थी। सिख इतिहासकारों की माने तो लद्दाख की राजधानी लेह से करीब 25 किलोमीटर दूर गुरुद्वारा पत्थर साहिब इस बात का सबूत है कि वहां गुरु साहिब गए थे, और उन्होंने उस राक्षस से भी लड़ाई की थी जो लोगो को पत्थर का बना देता था। लेकिन जब पत्थर गुरु साहिब के पास आया तो वो मोम का हो गया, जिससे राक्षस को अपनी मुक्ति का रास्ता मिल गया और उसने गुरु साहिब के शरण में आने का फैसला किया था। लेकिन जब 18वी सदी में शेर ए पंजाब महाराजा रणजीत सिंह ने अपने क्षेत्र का विस्तार शुरु किया तो उनके जनरल जोरावर सिंह ने 1834 में लद्दाख के इस क्षेत्र को जीता और महाराजा रणजीत सिंह जी का शासन शुरु हो गया था, इस दौरान सिखों का प्रभाव इस इलाके में बढ़ा था।

 लामा नानक या फिर गुरु गोप्पा महाराज

खास कर सिख व्यावारी रेशम मार्ग के जरिये चीन में व्यापार बढ़ाने के इरादे से .यहां से आते जाते रहते थे। जिससे सिखों का आगमन बढ़ा और उनकी आबादी भी बढ़ी। सिख संस्कृति का प्रभाव आप इसी बात से समझ सकते है कि यहां रहने वाले तिब्बती और बौद्ध लोग प्रथम गुरु को लामा नानक या फिर गुरु गोप्पा महाराज के नाम से बुलाते है। गुरु साहिब के आगमन और राक्षस से इस क्षेत्र को मुक्त करने के लिए उनके सम्मान में गुरुद्वारा पत्थर साहिब का निर्माण कराया गया था, जिसे भारतीय सेना ने ही कराया था। इस गुरुद्वारे में वो पत्थर आज भी है जिसे राक्षस ने गुरु साहिब को मारा था, लेकिन वो उन्हें छूते ही मोम में बदल गया था।

जंग के कारण गुरूद्वारा दातन साहिब ध्वस्त

मौजूदा समय में ये गुरुद्वारा भारतीय जवानो की देखरेख में है, और वो ही इसकी सुरक्षा करते है। पत्थर साहिब के अलावा लेह में गुरुद्वारा दातन साहिब का भी काफी नाम है..हालांकि वॉर के कारण गुरुद्वारा दातन साहिब का केवल नाम ही है। जंग के कारण गुरूद्वारा दातन साहिब ध्वस्त हो गया है। हालांकि लद्दाख में सिखों की आबादी काफी सिमित है, 2011 के आकड़ो के मुताबिक इस वक्त लद्दाख में करीब 2200 सिख रहा करते थे। हालांकि समय के साथ भारी तनाव के बीच भी सिख वहां रह रहे है। जो उनकी निष्ठा और आस्था का प्रतीक है। लद्दाख एक ऐसा क्षेत्र है जिस पर सिखों का प्रभाव जबरदस्त रहा है… लेकिन समय के साथ इनकी संख्या कम तो हुई है लेकिन उनका प्रभाव आज भी जारी है।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

प्रातिक्रिया दे

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा. आवश्यक फ़ील्ड चिह्नित हैं *

Recent News

Trending News

Editor's Picks

Latest News

©2026- All Right Reserved. Manage By Marketing Sheds