श्रीराम जन्मभूमि मसले पर सुप्रीम कोर्ट ने क्यों किया था गुरु नानक देव जी का जिक्र

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अयोध्या के राम जन्मभूमि से सिखों का काफी गहरा कनेक्शन रहा है..सबसे पहले खालसा सिखों ने ही विवादित ढांचे के भीतर पूजा पाठ शुरु कराया था और दीवारों पर भगवान राम से जुड़े नारे लिखे थे. आज का हमारा यह लेख गुरु नानक देव जी के अयोध्या कनेक्शन पर है..गुरुजी का अयोध्या से गहरा नाता रहा है..अयोध्या के कई स्थानों पर उन्होंने अपना समय व्यतीत किया था..जहां भी उन्होंने समय बिताया..उस स्थान पर आज के समय में भव्य गुरुद्वारे बने हुए हैं..गुरुनानक देव जी के अलावा सिखों के नौंवे गुरु, गुरु तेगबहादुर जी और दशमेश गुरु, गुरु गोविंद सिंह के चरणों से भी अयोध्या की भूमि पवित्र हुई है.

और पढ़ें: जानिए सिखों के अंतिम गुरु, गुरु गोबिंद सिंह ने क्यों कहा था – मैं मूर्तिभंजक हूँ

3 गुरु अयोध्या में बीता चुके हैं समय

नजरबाग गुरुद्वारा के जत्थेदार बाबा महेंद्र सिंह बताते हैं कि गुरुनानक देव जी 1501 संवत् में अयोध्या आए थे.वो अयोध्या में जिस स्थान पर रुके थे, वहां एक बगीचा था, जिसे अब नजरबाग के नाम से जाना जाता है. साथ ही राम जन्मभूमि से कुछ ही दूरी पर स्थित ब्रह्मकुंड स्थान पर भी गुरुजी रुके थे..आज के समय में वहां ब्रह्मकुंड गुरुद्वारा स्थित है. इस स्थान पर एक बेल का पेड़ भी मौजूद है.

ऐसा माना जाता है कि यह पेड़ कई शताब्दियों से हैं और जब गुरुनानक देव जी यहां आए थे, यह पेड़ तब भी था. सिख धर्म में इस पेड़ का भी काफी महत्व है. ध्यान देने वाली बात है कि हरिद्वार से जगन्नाथपुरी की यात्रा के दौरान गुरुजी ने अयोध्या में विश्राम किया था.

वहीं, नौवें गुरु गुरु तेगबहादुर जी की अयोध्या यात्रा को लेकर भी कई तरह की बातें कही जाती हैं. कहा जाता है कि गुरु तेगबहादुर जी ने भी ब्रह्मकुंड नामक स्थान पर साधना की थी. नजरबाग गुरुद्वारा के सेवादार नवनीत सिंह बताते हैं कि गुरु गोविंद सिंह जी भी 6 वर्ष की आयु में गुरु पुत्र के रुप में रामनगरी अयोध्या पहुंचे थे. सिख पुस्तक तवारिख खालसा में गुरु जी की इस यात्रा का वर्णन मिलता है.

सुप्रीम कोर्ट ने भी किया था गुरु नानक देव जी का जिक्र

आपको बता दें कि विवादित ढांचे को लेकर अपना निर्णायक फैसला सुनाने के मध्य सुप्रीम कोर्ट ने भी गुरु नानक देव जी की अयोध्या यात्रा का जिक्र किया था. न्यायाधीश ने कहा था कि गुरु नानक देव जी रामजन्मभूमि के दर्शन करने के लिए सन् 1510 में अयोध्या आए थे. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि ठोस प्रमाण तो नही है कि भगवान राम का जन्म कहां हुआ था लेकिन गुरुनानक देव का अयोध्या में रामजन्मभूमि के दर्शन करने के लिए आना, इस बात को स्पष्ट है कि 1528 से पहले वहां रामजन्म भूमि का अस्तित्व मौजूद था.

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