Popcorn GST: पॉपकॉर्न पर तीन तरह का जीएसटी लागू, सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 22 दिसम्बर 2024, 05:30 AM Updated: 22 दिसम्बर 2024, 05:30 AM
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GST Council Meeting: शनिवार को जीएसटी काउंसिल की बैठक में कई अहम फैसले लिए गए, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा पॉपकॉर्न पर लगाए गए जीएसटी की हो रही है। काउंसिल ने पॉपकॉर्न (Popcorn GST) पर तीन श्रेणियों में जीएसटी लागू करने का फैसला किया, जिससे सोशल मीडिया पर मीम्स की बाढ़ आ गई और सरकार के इस फैसले पर सवाल उठने लगे।

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पॉपकॉर्न पर जीएसटी: क्या है फैसला? (GST Council Meeting)

जीएसटी काउंसिल के मुताबिक, पॉपकॉर्न पर तीन तरह का टैक्स लगाया जाएगा:

  1. रेडी-टू-ईट पॉपकॉर्न (नमक या मसाले के साथ): यदि इसे पहले से पैक नहीं किया गया है, तो इस पर 5% जीएसटी लगेगा।
  2. पहले से पैक और लेबल वाले पॉपकॉर्न: इस श्रेणी पर 12% जीएसटी लागू किया गया है।
  3. कैरेमलाइज्ड पॉपकॉर्न (चीनी वाले): इस पर सबसे ज्यादा, यानी 18% जीएसटी लगाया गया है।

सोशल मीडिया पर उड़ी खिल्ली

इस फैसले के बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स ने मजेदार मीम्स और टिप्पणियों के जरिए सरकार पर तंज कसे। खासतौर पर एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर ‘पॉपकॉर्न जीएसटी’ ट्रेंड करने लगा।

एक यूजर ने लिखा,
“क्या अब पीने के पानी पर भी जीएसटी लगेगा? अगर आप घूंट-घूंट पीते हैं तो 5%, गट-गट पीते हैं तो 12%, और अगर गिरा देते हैं तो 18%!”

यह टिप्पणी भले ही मजाकिया थी, लेकिन इसने गंभीर बहस छेड़ दी कि रोजमर्रा की चीजों पर बढ़ते टैक्स आम जनता पर कैसे असर डाल रहे हैं।

पानी पर जीएसटी का सच- Water GST

पॉपकॉर्न पर जीएसटी के संदर्भ में पानी पर टैक्स का मुद्दा भी चर्चा में आ गया।

  • सामान्य पानी: 10 से 50 रुपये में मिलने वाले बोतलबंद पानी पर कोई जीएसटी नहीं है।
  • प्रीमियम पानी: जैसे ‘ब्लैक वाटर’ और ‘स्पार्कलिंग वाटर’ पर 5% से 18% तक जीएसटी लगता है। इनकी कीमत 200 से 5000 रुपये प्रति लीटर तक होती है।

ब्लैक वाटर, जिसे ‘अल्कलाइन वाटर’ भी कहते हैं, और स्पार्कलिंग वाटर जैसे उत्पाद सेलिब्रिटीज के बीच लोकप्रिय हैं।

प्रीमियम पानी: विलासिता की परिभाषा

ब्लैक वाटर और स्पार्कलिंग वाटर की ऊंची कीमत और उस पर लगे जीएसटी को देखकर यह सवाल उठता है कि क्या यह सिर्फ अमीरों की विलासिता तक सीमित है। सामान्य पानी और प्रीमियम पानी पर अलग-अलग कर दरें यह दिखाती हैं कि सरकार रोजमर्रा की जरूरतों और विलासिता के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।

सार्वजनिक प्रतिक्रिया

जहां कुछ लोग पॉपकॉर्न पर जीएसटी को सरकार का जरूरी कदम मानते हैं, वहीं कई इसे आम आदमी पर बोझ के रूप में देख रहे हैं। सोशल मीडिया पर आलोचनाओं के बीच यह स्पष्ट है कि सरकार को जीएसटी सुधारों के लिए जनता को बेहतर ढंग से जागरूक करना होगा।

यह बहस केवल पॉपकॉर्न तक सीमित नहीं है, बल्कि यह रोजमर्रा की वस्तुओं पर टैक्स लगाने की व्यापक नीति पर सवाल उठाती है। ऐसे में आने वाले दिनों में इस फैसले पर सार्वजनिक और राजनीतिक प्रतिक्रिया जारी रहने की संभावना है।

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