Gold Silver Price: सोने और चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव का दौर जारी है और आने वाला सप्ताह निवेशकों के लिए काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली संभावित वार्ता बहुमूल्य धातुओं की कीमतों की दिशा तय करने में अहम भूमिका निभा सकती है। वैश्विक स्तर पर चल रहे भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर निवेशकों की नजर टिकी हुई है और इन्हीं के आधार पर सोना-चांदी के बाजार में नई चाल देखने को मिल सकती है।
स्विट्जरलैंड में प्रस्तावित इस बातचीत में अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के ईरानी अधिकारियों के साथ चर्चा करने की संभावना जताई जा रही है। दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी तनाव को कम करने के प्रयासों के बीच यह बैठक काफी अहम मानी जा रही है।
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अमेरिका-ईरान वार्ता पर टिकी बाजार की नजर| Gold Silver Price
विशेषज्ञों के अनुसार यदि बातचीत सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ती है और दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के संकेत मिलते हैं, तो निवेशकों का भरोसा बढ़ सकता है। ऐसी स्थिति में लोग जोखिम वाले निवेश विकल्पों की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे सुरक्षित निवेश माने जाने वाले सोने की मांग में कमी आ सकती है। वहीं यदि बातचीत में कोई ठोस नतीजा नहीं निकलता या तनाव बढ़ने के संकेत मिलते हैं, तो निवेशक फिर से सोने को सुरक्षित निवेश के तौर पर चुन सकते हैं। इससे कीमतों को सहारा मिल सकता है।
होर्मुज स्ट्रेट और कच्चे तेल पर भी नजर
बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि केवल अमेरिका और ईरान की बातचीत ही नहीं, बल्कि पश्चिम एशिया में ऊर्जा आपूर्ति की स्थिति भी कीमतों को प्रभावित कर सकती है। जेएम फाइनेंशियल सर्विसेज के उपाध्यक्ष प्रणव मेर के मुताबिक निवेशकों की नजर होर्मुज स्ट्रेट पर भी बनी रहेगी। यह मार्ग वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और एलएनजी की आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। दुनिया के बड़े हिस्से तक ऊर्जा आपूर्ति इसी रास्ते से होती है।
अगर क्षेत्र में तनाव बढ़ता है और तेल आपूर्ति प्रभावित होती है, तो कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है। इससे वैश्विक महंगाई बढ़ने की आशंका भी पैदा हो सकती है, जिसका असर सोने और चांदी की कीमतों पर देखने को मिल सकता है।
पिछले सप्ताह क्यों फिसले दाम?
पिछले सप्ताह सोने और चांदी दोनों की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई थी। इसकी प्रमुख वजह मजबूत रुपया और घरेलू बाजार में कमजोर मांग को माना जा रहा है। मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर सोने का वायदा भाव करीब 3,325 रुपये यानी 2.2 प्रतिशत गिरकर 1.47 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। वहीं चांदी का वायदा भाव 13,001 रुपये यानी 5.3 प्रतिशत की गिरावट के साथ 2.33 लाख रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गया।
कीमतों में इस गिरावट ने उन निवेशकों को राहत दी जो लंबे समय से ऊंचे भाव के कारण खरीदारी का इंतजार कर रहे थे।
डॉलर और फेडरल रिजर्व का असर भी रहेगा
एलकेपी सिक्योरिटीज के शोध विश्लेषक जतिन त्रिवेदी का कहना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व का सख्त रुख और मजबूत डॉलर भी सोने की कीमतों पर दबाव बना रहा है। जब रुपया मजबूत होता है, तो आयातित सोना सस्ता पड़ता है। इसका सीधा असर घरेलू कीमतों पर दिखाई देता है। वहीं अंतरराष्ट्रीय बाजार में डॉलर की मजबूती आमतौर पर सोने और अन्य बहुमूल्य धातुओं के लिए नकारात्मक मानी जाती है।
हालांकि रूस-यूक्रेन युद्ध से जुड़ी अनिश्चितताएं अब भी सोने को कुछ हद तक समर्थन दे रही हैं। वैश्विक तनाव के चलते निवेशकों का एक वर्ग अभी भी सुरक्षित निवेश विकल्पों को प्राथमिकता दे रहा है।
आगे क्या रह सकता है रुझान?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले सप्ताह में सोने और चांदी की कीमतें कई अंतरराष्ट्रीय कारकों पर निर्भर रहेंगी। अमेरिका-ईरान वार्ता, पश्चिम एशिया की स्थिति, कच्चे तेल की कीमतें, डॉलर की मजबूती और रुपये की चाल जैसे कारक बाजार की दिशा तय करेंगे। यदि भू-राजनीतिक तनाव बढ़ता है, तो सोने में निवेशकों की रुचि बढ़ सकती है और कीमतों को मजबूती मिल सकती है। दूसरी ओर यदि वैश्विक हालात सामान्य होते हैं और डॉलर मजबूत बना रहता है, तो सोना और चांदी दबाव में रह सकते हैं।































