Uttarakhand Gurudwara Dispute: बदरीनाथ हाईवे से सटे नगरासू स्थित गुरुद्वारा दमदमा साहिब में निहंगों के प्रवेश और कथित कब्जे को लेकर शुरू हुआ विवाद दूसरे दिन भी जारी रहा। शनिवार को शुरू हुआ तनाव रविवार तक बना रहा और प्रशासन तथा निहंगों के बीच कई दौर की बातचीत के बावजूद कोई ठोस समाधान सामने नहीं आ सका। हालात की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए और एहतियात के तौर पर जिले में इंटरनेट सेवाएं भी अस्थायी रूप से बंद रखीं।
क्षेत्र में तनावपूर्ण माहौल को देखते हुए पुलिस, आईटीबीपी और अन्य सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती की गई है। पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में रखा गया है और वरिष्ठ अधिकारी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
गुरुद्वारे में मौजूद हैं कई निहंग| Uttarakhand Gurudwara Dispute
जानकारी के अनुसार, गुरुद्वारा परिसर के भीतर करीब सात से आठ निहंग मौजूद हैं। रविवार को कुछ निहंग गुरुद्वारे की छत पर चढ़ गए और वहां से विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान उनके द्वारा हथियार लहराने की खबरें भी सामने आईं, जिससे स्थानीय लोगों में चिंता और नाराजगी बढ़ गई। घटना के वीडियो और तस्वीरें सामने आने के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और सख्त कर दी। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह तैयार हैं।
बंधक बनाए गए सेवादार को छोड़ा गया
विवाद के बीच एक राहत की खबर भी सामने आई। बताया गया कि निहंगों ने उस सिख श्रद्धालु या सेवादार को रिहा कर दिया है, जिसे एक दिन पहले कथित रूप से बंधक बनाए जाने की बात सामने आई थी। हालांकि प्रशासन ने अभी तक इस मामले की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। अधिकारियों का कहना है कि पूरे घटनाक्रम की जांच की जा रही है और सभी तथ्यों को सत्यापित किया जा रहा है।
क्या हैं निहंगों की मांगें?
निहंगों का कहना है कि कर्णप्रयाग में हुई एक घटना के बाद जिन निहंगों को गिरफ्तार किया गया था, उन्हें रिहा किया जाए। उनका आरोप है कि उनके साथियों के खिलाफ अनुचित कार्रवाई की गई है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो देश के अलग-अलग हिस्सों से बड़ी संख्या में निहंग उत्तराखंड पहुंच सकते हैं और व्यापक आंदोलन शुरू किया जा सकता है। इस बयान के बाद प्रशासन और अधिक सतर्क हो गया है।
गुरुद्वारा प्रबंधन समिति ने जताई चिंता
गुरुद्वारा प्रबंधन समिति के प्रबंधक बेअंत सिंह ने पूरे घटनाक्रम पर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड हमेशा से शांति और सौहार्द का प्रदेश रहा है और इस तरह की घटनाएं राज्य के माहौल को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि गुरुद्वारे में मौजूद निहंगों से उनका कोई पूर्व परिचय नहीं है। उनका उद्देश्य केवल क्षेत्र में शांति बनाए रखना है और विवाद का समाधान बातचीत के जरिए निकालना है।
स्थानीय लोगों में बढ़ी चिंता
घटना को लेकर स्थानीय लोगों में भी चिंता का माहौल है। स्थानीय निवासी गौरव चौधरी ने कहा कि खुलेआम हथियारों के साथ लोगों का आना स्थानीय नागरिकों के लिए चिंता का विषय है। उनके मुताबिक सरकार को ऐसे मामलों पर सख्त रुख अपनाना चाहिए ताकि देवभूमि का शांतिपूर्ण वातावरण प्रभावित न हो। वहीं गढ़वाल विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष लक्ष्मण सिंह रावत ने भी कहा कि इस तरह की घटनाओं पर रोक लगनी चाहिए। उनका मानना है कि हथियारों के साथ आने वाले लोगों की गतिविधियों से क्षेत्र का सामाजिक माहौल खराब हो सकता है।
इंटरनेट सेवा बंद, सुरक्षा व्यवस्था कड़ी
स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने रुद्रप्रयाग जिले में सभी कंपनियों की इंटरनेट सेवाएं रविवार सुबह से शाम पांच बजे तक अस्थायी रूप से बंद रखीं। अधिकारियों का कहना है कि यह कदम अफवाहों और भ्रामक सूचनाओं को फैलने से रोकने के लिए उठाया गया। जिलाधिकारी विशाल मिश्रा और पुलिस अधीक्षक नीहारिका तोमर स्वयं मौके पर मौजूद रहे और पूरे घटनाक्रम की निगरानी करते रहे। प्रशासन की मौजूदगी में गुरुद्वारा प्रबंधन समिति और निहंगों के बीच बातचीत का दौर भी जारी रहा।
यात्रा पर नहीं पड़ा असर
तनावपूर्ण हालात के बावजूद हेमकुंड साहिब और बदरीनाथ धाम की यात्रा सामान्य रूप से जारी रही। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि स्थिति नियंत्रण में है और यात्रियों को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जा रही है।































