Europe Heatwave Record: यूरोप इस समय रिकॉर्ड तोड़ गर्मी की चपेट में है और इसका असर अब लोगों की जान पर भी पड़ने लगा है। फ्रांस की सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी ने बताया है कि पिछले सप्ताह पड़ी भीषण गर्मी के दौरान देश में लगभग 1,000 अतिरिक्त मौतें दर्ज की गईं। वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि यूरोप दुनिया का सबसे तेजी से गर्म होने वाला महाद्वीप बन चुका है और अगर समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले वर्षों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।
बीते कुछ दिनों में यूरोप के कई देशों में तापमान ने पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए। कई जगह जंगलों में आग लग गई, बिजली व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी अतिरिक्त बोझ देखने को मिला।
फ्रांस में गर्मी बनी जानलेवा| Europe Heatwave Record
फ्रांस की पब्लिक हेल्थ एजेंसी के अनुसार, पिछले सप्ताह सबसे ज्यादा गर्मी वाले तीन दिनों में मौतों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक रही। बुधवार को, जब तापमान चरम पर था, उस दिन 1,200 से अधिक लोगों की मौत दर्ज की गई। इसके बाद अगले दो दिनों में यह संख्या बढ़कर प्रतिदिन 1,400 से अधिक हो गई।
इसके विपरीत, अप्रैल और मई के दौरान रोजाना औसतन 900 से 1,000 मौतें दर्ज हो रही थीं। एजेंसी का अनुमान है कि केवल तीन दिनों में कम से कम 1,000 अतिरिक्त मौतें गर्मी के कारण हुईं। अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे और आंकड़े सामने आएंगे, खासकर घरों में हुई मौतों का डेटा जुड़ेगा, यह संख्या और बढ़ सकती है।
जर्मनी और चेक गणराज्य में टूटे रिकॉर्ड
भीषण गर्मी का असर सिर्फ फ्रांस तक सीमित नहीं रहा। जर्मनी के पोलैंड सीमा से सटे नाइसेमुंडे क्षेत्र में तापमान 41.7 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जो देश का नया रिकॉर्ड माना जा रहा है। इससे पहले जर्मनी का अधिकतम तापमान 40.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया था। उधर, चेक गणराज्य में भी तापमान 41.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जिसे वहां का अब तक का सबसे गर्म दिन बताया गया है। ब्रिटेन और स्विट्जरलैंड में भी जून महीने के तापमान ने नए रिकॉर्ड बनाए। पूर्वी इंग्लैंड में पारा 37.3 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया, जबकि स्विट्जरलैंड के बेसल शहर में तापमान 38.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।
WHO ने जताई गंभीर चिंता
विश्व स्वास्थ्य संगठन के महानिदेशक टेड्रोस अदानोम घेब्रेयेसस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कहा कि यूरोप वैश्विक औसत की तुलना में लगभग दोगुनी रफ्तार से गर्म हो रहा है। उन्होंने बताया कि इस समय करीब 15 करोड़ लोग अत्यधिक गर्मी का सामना कर रहे हैं। टेड्रोस के मुताबिक, 21 जून के बाद से पूरे यूरोप में अधिक तापमान की वजह से 1,300 से ज्यादा अतिरिक्त मौतें दर्ज की जा चुकी हैं। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण जो हीटवेव पहले कई दशकों में एक बार आती थी, अब लगभग हर साल देखने को मिल रही है।
उन्होंने हीट स्ट्रेस को “साइलेंट किलर” बताते हुए यूरोपीय देशों से अपील की कि वे व्यापक एक्शन प्लान तैयार करें, स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत करें और लोगों को गर्मी से बचाने के लिए पहले से तैयारी करें।
वैज्ञानिकों ने जलवायु परिवर्तन को बताया वजह
यूरोप के वैज्ञानिकों के समूह वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन की हालिया स्टडी में दावा किया गया है कि पिछले सप्ताह जैसी रिकॉर्ड तोड़ गर्मी जलवायु परिवर्तन के बिना संभव नहीं थी। शोधकर्ताओं के अनुसार, लगभग 50 साल पहले इस स्तर की गर्मी की संभावना बेहद कम थी। वहीं आज यह स्थिति 20 साल पहले की तुलना में करीब 200 गुना अधिक संभावित हो चुकी है।
कई देशों में जंगलों में लगी आग
भीषण गर्मी के साथ यूरोप के कई हिस्सों में जंगलों में आग लगने की घटनाएं भी बढ़ गई हैं। जर्मनी के गोहरिशहाइड इलाके में बड़े पैमाने पर जंगल में आग लग गई। यह इलाका दूसरे विश्व युद्ध के समय के बिना फटे गोला-बारूद से प्रभावित है, जिससे राहत और बचाव कार्य काफी मुश्किल हो गया। दक्षिण-पश्चिम जर्मनी के ट्राइसेन गांव के पास भी जंगल में आग लगने के बाद करीब 650 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजना पड़ा। वहीं डेनमार्क में तापमान ने नए रिकॉर्ड बनाए और एक ही रात में 1,156 बार बिजली गिरने की घटनाएं दर्ज की गईं।
इसके अलावा स्वीडन के एक मनोरंजन पार्क में आकाशीय बिजली गिरने से कई लोग घायल हो गए, जिनमें एक महिला गंभीर रूप से घायल बताई गई है।





























