Father of Fiber Optics: इंटरनेट का ‘असली जनक’ मिलिए उस सिख वैज्ञानिक से, जिसके बिना आज दुनिया में ‘अंधेरा’ होता

Shikha Mishra | Nedrick News Published: 24 फ़रवरी 2026, 04:57 PM Updated: 24 फ़रवरी 2026, 04:57 PM
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Father of Fiber Optics: आज जब आप बड़ी बड़ी विदेशी कंपनियों को उंचे पदो पर कार्यरत लोगो को देखते है तो उनमें से ज्यादातर आपको भारतीय ही मिलेंगे, जो देश का नाम रोशन कर रहे है, वहीं उनमें से कछ तो ऐसे भी रहे, जिनके बिना आज की टेक्नोलोजी की कल्पना करना भी संभव नहीं है.. और उन्ही में से एक थे नरिंदर सिंह कपानी… जिन्हें पूरी दुनिया फादर ऑफ द फाइबर ऑप्टिक्स के नाम से बुलाती है, नरिंदर सिंह कपानी के योगदान के बिना आज हाई स्पीड इंटरनेट का लुफ्त हम नहीं उठा रहे होते… अपने इस लेख में हम नरिंदर सिंह कपानी के बारे में जानेगें, साथ ही कैसे उनके एक योगदान ने पूरी दुनिया को टेक्नोलॉजी के नए आयाम पर पहुंचाया, साथ ही लोगो की लाइफ स्टाईल को एक्चुअल में बहुत फास्ट बना दिया।

कौन है नरिंदर सिंह कपानी

आज के युवा स्टीव जॉब्स और टिम बर्नर्स-ली जैसे बड़े उद्योगपतियों का नामो को जानते होंगे, जिन्होंने इन्फॉर्मेशन एज पर काफी काम किया है, लेकिन क्या आप ये जानते है कि 1950 के दशक में ही एक भारतीय सिख ने इंटरनेट को घर घर पहुंचाने और उसकी हाई स्पीड पर काफी रिसर्च करके उसे आज के रूप में ढाला था, उन्होंने फाइबर ऑप्टिक्स के क्षेत्र में रोशनी का मुड़ना, और इसे मॉडर्न कम्युनिकेशन और मेडिकल इमेजिंग की रीढ़ की हड्डी बनाने की दिशा में नामुमकिन माने जाने वाले काम को भी मुम्किन किया है।

भारतीय आयुध निर्माणी सेवा अधिकारी

31 अक्टूबर 1926 को पंजाब के मोगा जिले में सुंदर सिंह और कुंदन कौर के घर में जन्में नरिंदर सिंह कपानी, सोढ़ी वंश के एक सिख खत्री परिवार से थे, जो कि मूल रूप से जमींदारी करते थे। कहा तो ये भी जाता है वो सिखों के तीसरे गुरु गुरु अमर दास जी के वंशज है। नरिंदर ने देहरादून में स्कूलिंग पूरी की और आगरा विश्वविद्यालय से ग्रेजिएशय़न किया। जिसके बाद भारतीय आयुध निर्माणी सेवा अधिकारी के रूप में काम करने लगे थे इसी दौरान 1952 में लंदन विश्वविद्यालय से Ph.D. degree in optics को पूरा करने के लिए लंदन चले गए और मात्र 4 सालों में ही 1955 में उन्होंने अपनी पीएचडी डिग्री हासिल कर ली थी।

फाइबर-ऑप्टिक्स कम्युनिकेशन

नरिंदर का विजन बिल्कुल क्लियर था, वो इमेज ट्रांसमिशन के लिए ऑप्टिकल फाइबर को और बेहतर तरीके से यूज करने की दिशा में करने लगे, जिसमें नो इंपीरियल कॉलेज में एक्पेरिमेंट करने लगे थे और उनके साथ थे हेरोल्ड हॉपकिंस। दोनो का एक्पेरिमेंट काफी सफल रहा और बेहतर इमेज क्वालिटी मिली, उनकी उपलब्धि को देख कर डच साइंटिस्ट ब्रैम वैन हील ने ऑप्टिकल क्लैडिंग को एक साथ ही डेवलप किया और फाइबर ऑप्टिक्स के नए फील्ड की शुरुआत तीनो ने मिल कर की, और पहली बार 1960 के दशक में दुनिया के सामने एक नया शब्द आया ‘फाइबर ऑप्टिक्स’। नरिंदर ने ‘फाइबर ऑप्टिक्स’ के क्षेत्र में कई तकनीकी पर काम किया, जिसमें फाइबर-ऑप्टिक्स कम्युनिकेशन, लेजर, बायोमेडिकल इंस्ट्रूमेंटेशन, सोलर एनर्जी और पॉल्यूशन मॉनिटरिंग शामिल थे। नरिंदर के पास करीब 120 पेटेंट थे और वो नेशनल इन्वेंटर्स काउंसिल के मेंबर थे।

कॉर्पोरेट एक्विजिशन और जॉइंट-वेंचर

उन्होंने एक बिजनसमैन के तौर पर खुद को स्थापित करने के साथ साथ इनोवेशन, टेक्नोलॉजी और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के मैनेजमेंट के प्रोसेस में स्पेशलाइजेशन हासिल किया था। 1960 में कपानी ने ऑप्टिक्स टेक्नोलॉजी इंक की शुरुआत की थी, जो कि आने वाले 12 सालों में कंपनी ने यूनाइटेड स्टेट्स और विदेशों में कई कॉर्पोरेट एक्विजिशन और जॉइंट-वेंचर के साथ पब्लिक हुई। जिसके बाद 973 में, कपानी ने कैपट्रॉन इंक. शुरू की। व्यापार के साथ साथ कपानी यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया, बर्कले और यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफ़ोर्निया, सांता क्रूज़ में प्रोफ़ेसर भी थे, जो फ़िज़िक्स डिपार्टमेंट में विज़िटिंग स्कॉलर और इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट में कंसल्टिंग प्रोफ़ेसर के तौर पर रिसर्च करने के लिए मदद करते थे।

कपानी एक बेहतर लेखक भी थे जिन्होंने ऑप्टो-इलेक्ट्रॉनिक्स और एंटरप्रेन्योरशिप पर 100 से ज्यादा आर्टिकल और 4 किताबे भी लिखी थी। ये तो केवल उनकी व्यापार में दिया गया योगदान था उसके अलावा वो सामाजिक कार्य से भी जुड़े हुए थे, वह सिख फाउंडेशन के संस्थापक अध्यक्ष थे, जो करीब 50 सालो तक शिक्ष छात्रों के शिक्षा और कला के क्षेत्र में बढ़ावा देने के लिए आर्थिक सहायता करते थे। कपानी एक ट्रेंड सिख आर्टिस्ट थे। उनकी आर्ट को “आर्ट्स ऑफ़ द सिख किंगडम्स” में एग्ज़िबिशन के लिए लगाई गई थी।

नोबेल पुरस्कार-योग्य आविष्कार

समाज के साथ साथ पूरी दुनिया को आगे बढ़ाने की दिशा में दिए गए उनके योगदान के लिए नोबेल पुरस्कार-योग्य आविष्कार के लिए उन्हें 20वीं सदी के सात “अनसंग हीरोज़” में नामित किया गया था। 4 दिसंबर 2020 को केर्लिफोर्नियां के रेडवुड सीटी में 94 साल की उम्र में कपानी का निधन हो गया था। उनके मरनोपरांत एक भारतीय होकर जिस तरह से उन्होंने पूरी दुनिया में नाम कमाया था, उसे देखते हुए 2021 में मरणोपरांत भारत के दूसरे सबसे बड़े नागरिक पुरस्कार, पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। उन्होंने तकनीक के क्षेत्र में जो योगदान दिया, उसे लेकर उन्हें जितना भी सम्मान दिया जाये वो कम ही होगा।

वो एक ऐसे सिख है, जिन्होंने बताया कि आखिर क्योंकि सिख कम्युनिटी धीरे धीरे अमेरिका समेत लगभग सभी देशों में इतनी पावरफुल होती जा रही है। नरिंदर सिंह कपानी अलग में केवल सिख समुदायों के लिए ही नहीं बल्कि पूरे भारत के लिए गर्व महसूस कराने वाला नाम है। वो भले ही आज हमारे बीच नहीं है, लेकिन उनके योगदान के कारण आज दुनिया तेजी से आगे बढ़ रही है, उन्होंने वो कारनामा कर दिखाया, जिसे बड़े बड़े वैज्ञानिक, शोधकर्ता भी असंभम मानते थे। अगर आप भी एक भारतीय है तो नरिंदर सिंह कपानी के योगदान पर आपको भी गर्व हो

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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