दलितों का गढ़ रहा है आगरा, यहाँ चाँदी के कलश में रखी गई है बाबा साहेब की अस्थियाँ

👤 vickynedrick@gmail.com | Nedrick News 🕒 Published: 12 फ़रवरी 2024, 12:00 AM 🔄 Updated: 12 फ़रवरी 2024, 12:00 AM
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बाबा साहेब ने अपने जीवन का लगभग आधा समय मुंबई में गुजारा…मुंबई में ही उनका घर था..जिसमें उन्होंने बहुत बड़ी लाइब्रेरी बना रखी थी. मुंबई के अलावा दिल्ली में भी वह लंबे समय तक रहे. लेकिन उन्होंने भारत के लगभग हर हिस्से का भ्रमण किया था और उन्हें हर जगह की पूरी जानकारी थी. बाबा साहेब का उत्तर प्रदेश के आगरा से भी गहरा कनेक्शन रहा है. आज के लेख में हम आपको आगरा से बाबा साहेब का कनेक्शन समझाने का प्रयास करेंगे.

आगरा रहा है दलितों का सबसे बड़ा गढ़

दरअसल, बौद्ध धर्म अपनाने से पहले बाबा साहेब ने आगरा की यात्रा की थी. 1956 में वह आगरा पहुंचे थे और 18 मार्च 1956 को आगरा के रामलीला मैदान में अनुसूचित जाति फेडरेशन के 15 वें अधिवेशन में शिरकत किया था. इसी दौरान उन्होंने एक ऐसा ऐतिहासिक भाषण दिया था, जिसकी चर्चा आज तक होती है. ध्यान देने वाली बात है कि पंजाब और महाराष्ट्र के बाद आगरा दलितों का सबसे बड़ा गढ़ रहा है. ऐसे में बाबा साहेब ने पहले ही भांप लिया था कि दलित आंदोलन में उत्तर प्रदेश का यह शहर मील का पत्थर साबित हो सकता है.

1935 में हिंदू धर्म त्यागने के बाद लगभग 21 वर्षों तक बाबा साहेब ने सभी धर्मों के बारे में अध्ययन किया और उसके बाद उन्होंने दलितों के लिए बौद्ध धर्म को सबसे उपयुक्त माना. बाबा साहेब ने बौद्ध धर्म अपनाने का संकेत भी सबसे पहले अपने आगरा दौरे के दौरान ही दिया था..रामलीला मैदान का कार्यक्रम खत्म कर बाबा साहेब पैदल ही बिजलीघर स्थित चक्की पाट पहुंचे..जहां उन्होने एक बुद्ध विहार की स्थापना की. उनके द्वारा स्थापित की गई मूर्ति आज भी वहां मौजूद है. साथ ही आगरा का बुद्ध विहार भारत और दुनिया का इकलौता बुद्ध विहार है, जिसकी स्थापना खुद बाबा साहब के हाथों से हुई.

यहाँ चाँदी के कलश में है बाबा साहेब की अस्थियाँ

आपको बता दें कि 1956 में ही बाबा साहेब की मृत्यु हो गई थी. उनकी अस्थियां देश के अलग अलग 6 स्थानों पर रखी हुई है…आगरा उन्हीं जगहों मे से एक है. आगरा चक्की पाट बुद्ध विहार के गर्भ गृह में अस्थियां चांदी के कलश में आज भी मौजूद हैं. 13 जनवरी 1957 में उनके पुत्र यशवंतराव चांदी के कलश में बाबा साहब की अस्थियां लेकर आगरा आए थे. ध्यान देने वाली बात है कि अभी भी 6 दिसंबर को आगरा के बौद्ध विहार में बड़ी संख्या में अनुयायी आते हैं लेकिन अभी तक इस बुद्ध विहार का कायाकल्प नहीं हुआ है. लोग काफी लंबे समय से इसके कायाकल्प की मांग कर रहे हैं.

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