Sikhism in Dwarka: क्या है द्वारका और पंज प्यारों का संबंध? जानिए कैसे यह हिंदू तीर्थ सिखों के लिए भी बना पावन

Shikha Mishra | Nedrick News Published: 21 फ़रवरी 2026, 01:32 PM Updated: 21 फ़रवरी 2026, 01:32 PM
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Sikhism in Dwarka: जब हिंदू धर्म के चार धामों की बात होती है जो उसमें से एक द्वारा का जिक्र जरूर होता है, द्वारा, जो कि हर हिंदू के बेहद पवित्र नगरी है। ये नगरी हिंदू के भगवान श्रीकृष्ण की बसाई हुई नगरी है, जिसे कृष्ण ने एक रात में ही बसाई थी.. लेकिन क्या आप ये जानते है कि द्वारा का सिख धर्म से भी गहरा नाता है।

सिखों के लिए भी ये नगरी काफी पवित्र और पूजनीय मानी जाती है। सिखों धर्म से जुड़े एक अहम शख्सियत का रिश्ता पवित्र द्वारा नगरी से है औऱ केवल इस एक शख्स की भक्ति के कारण सिख गुरु को द्वारा आना पड़ा था। जी हां, हम बात कर रहे है पंज प्यारों में से एक भाई मोहकम सिंह जी के बारे में जो द्वारा से ही थे, लेकिन गुरु साहिब के सानिध्य में आकर हिंदू से सिख बने औऱ पंज प्यारे भी। अपने इस वीडियो में द्वारा में सिख धर्म के फलने फूलने और विस्तार की कहानी को जानेंगे..साथ ही कैसे यहां का एक गुरूद्वारा सिखों के लिए बेहद अहम है।

द्वारका के बारे में जानकारी

द्वारका भारत के एक संपन्न राज्य गुजरात में द्वारका जिले में मौजूद ओखामंडल प्रायद्वीप के पश्चिमी किनारे पर बहने वाली गोमती नदी के किनारे बने कच्छ की खाड़ी के मुहाने और अरब सागर के सामने स्थित है। ये शहर गुजरात की देवभूमि कहलाती है। द्वाराका भारत के सात सबसे प्राचीन धार्मिक शहरों के साथ साथ 12 हेरिटेज शहरों में से एक है। इस क्षेत्र को सौराष्ट्र कहा जाता है। द्वाराका का क्षेत्रफल मात्र 96 वर्ग किलोमीटर है। वहीं 2011 की जनगणना के अनुसार यहां की आबादी तब 38,873 थी। ये क्षेत्र गर्म और सूखा है।

जहां मुश्किल से 15 दिन ही बारिश होती है। आदि शंकराचार्य ने ही द्वारा को चार धामों में से एक कहा था। श्रीकृष्ण की नगरी होने के कारण, साथ ही धार्मिक और संस्कृतिक धरोहर होने के कारण यहां हर साल काफी सैलानी आते है। यहां मौजूदा द्वाराकाधीश मंदिर विश्व प्रख्यात मंदिर है। 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक नागेश्वर ज्योर्तिलिंग भी मंदिर से करीब 16 किलोमीटर की ही दूरी पर मौजूद है। यानि की हिंदुओं के लिए ये शहर बेहद खास और मायने रखने वाला है।

सिख भाषा में आरती की संरचना

द्वारका में सिख धर्म- जब आप द्वारका में सिख धर्म की बात करते है तो सिख धर्म को मानने वालों के लिए भी द्वारका एक अहम शहर है। सिखों के पहले गुरु गुरु नानक देव जी ने अपनी उदासियों में भगवान कृष्ण के प्रति उनके प्रेम को कई बार दर्शाया था, चाहे वो जगन्नाथ पुरी जाकर सिख भाषा में आरती की संरचना करना हो, या फिर वहां के पंडितो के वाद विवाद,… स्वयं श्री जगन्नाथ गुरु साहिब को सानिध्य देने आये थे। इसलिए द्वाराका जो स्वयं कृष्ण की बसाई नगरी थी, वहां कैसे न जाते। गुजरात में पहले सोमनाथ मंदिर के दर्शन करने के बाद वो द्वाराका भी आये थे।

ईश्वर के प्रति जागरूक करने का प्रयत्न

यहां उन्होंने फिर से मूर्ति पूजा का विरोध करते हुए ईश्वर एक है, इक ओंकार का संदेश देते हुए लोगो को ईश्वर के प्रति जागरूक करने का प्रयत्न किया था। जिससे लोग काफी प्रभावित हुए थे, लेकिन इस यात्रा से ज्यादा द्वारका को दसवें गुरु गुरु गोबिंद सिंह के पंज प्यारों में से एक भाई मोहकम सिंह जी के जन्म स्थान के रूप में जाना जाता है। गुरु गोबिंद सिंह जी से प्रभावित होकर उन्होंने 1699 में बैशाखी के पर्व के दिन आनंनदपुर साहिब में गुरु साहिब के कहने पर अपना बलिदान देने के लिए तैयार हो गए थे। जिसे देखते हुए गुरु साहिब ने उन्हें अपने पंज प्यारों में शामिल कर लिया था।

बेट द्वारका को सिख धर्म का केंद्र

जो सिख धर्म की रक्षा और खालसा के नियमों को बनाये रखने के लिए जाने गए। बेट  द्वारका में ही 1663 में भाई मोहकम जी का जन्म हुआ था। बेट मोहकम द्वारा के पास समुद्र के बीच में एक द्वीप पर स्थिति है, जहां मोटर बोट के जरिय जाया जाता है। बेट द्वाराका के बुढ़िया क्षेत्र में गुरूद्वारा भाई मोहकम सिंह जी भी मौजूद है। इसलिए बेट द्वारका को सिख धर्म का केंद्र माना जाता है। जिसका रखरखाव करने की जिम्मेदारी सिख संगठनो की ही है। कहा तो ये भी जाता है कि भी मोहकम के पंज प्यारे बनने के बाद दशम गुरु भी वहां गए थे। बेट द्वाराका में पहले गुरु गुरुनानक देव जी के आगमन की याद में यहां गुरुद्वारा गुरु नानक देव जी भी मौजूद है।

जहां हर साल गुरु पर्व और सिख त्योहारों में काफी धूम होती है। सिख धर्म के अनुयायियों के लिए बेट द्वारका एक अहम सिख तीर्थ स्थल है, जो उनके धर्म की मजबूती और ऐतिहासिक जुड़ाव का वर्णन करता है। ये स्थान सिखो के लिए बेहद पवित्र है, और इस कारण यहां की रक्षा खुद सिख संगठन ही करते है, लेकिन फिर भी यहां सिखों के साथ साथ हिंदुओं का भी तातां लगा रहता है। मौजूदा समय में यहां सिखों की संख्या काफी सिमित है, लेकिन बावजूद इसके द्वाराका नगरी जितनी हिंदू धर्म के मलिए मायने रखती है उतनी ही सिख धर्म के भी अहम है.. और सबसे खूबसूरत है यहां का हिंदुओ और सिखों का धार्मिक सौहार्द..आपको द्वारका में सिख धर्म के फलने फूलने की कहानी कैसी लगी।

Shikha Mishra

shikha@nedricknews.com

शिखा मिश्रा, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत फोटोग्राफी से की थी, अभी नेड्रिक न्यूज़ में कंटेंट राइटर और रिसर्चर हैं, जहाँ वह ब्रेकिंग न्यूज़ और वेब स्टोरीज़ कवर करती हैं। राजनीति, क्राइम और एंटरटेनमेंट की अच्छी समझ रखने वाली शिखा ने दिल्ली यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और पब्लिक रिलेशन्स की पढ़ाई की है, लेकिन डिजिटल मीडिया के प्रति अपने जुनून के कारण वह पिछले तीन सालों से पत्रकारिता में एक्टिव रूप से जुड़ी हुई हैं।

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