Anika Sharma SMA Case: मध्य प्रदेश की साढ़े तीन साल की मासूम अनिका शर्मा इन दिनों जिंदगी की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रही है। एक दुर्लभ और गंभीर आनुवांशिक बीमारी से जूझ रही अनिका के इलाज के लिए करीब 9 करोड़ रुपये के एक विशेष इंजेक्शन की जरूरत है। परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं है कि वह इतनी बड़ी रकम जुटा सके। ऐसे में अब इस मामले ने कानूनी और सामाजिक दोनों स्तरों पर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है।
मंगलवार को इंदौर हाईकोर्ट में इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत ने सरकार से एक अहम सवाल पूछा। कोर्ट ने कहा, “क्या यह बच्ची भी सरकार की लाड़ली नहीं है?” न्यायालय की यह टिप्पणी अब चर्चा का विषय बन गई है।
एसएमए टाइप-2 जैसी गंभीर बीमारी से जूझ रही है अनिका| Anika Sharma SMA Case
सुनवाई के दौरान अनिका की ओर से अधिवक्ता चंचल गुप्ता और लखन शर्मा ने पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि बच्ची स्पाइनल मस्कुलर एट्रोफी (SMA) टाइप-2 नाम की गंभीर आनुवांशिक बीमारी से पीड़ित है। यह बीमारी शरीर की मांसपेशियों को धीरे-धीरे कमजोर करती जाती है और समय रहते इलाज न मिले तो मरीज की स्थिति लगातार बिगड़ सकती है।
वर्तमान में अनिका का इलाज दिल्ली स्थित एम्स में चल रहा है, लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि स्थायी और प्रभावी इलाज के लिए उसे एक विशेष इंजेक्शन दिया जाना जरूरी है। इस इंजेक्शन की कीमत लगभग 9 करोड़ रुपये बताई गई है।
लोगों की मदद से जुटे करोड़ों रुपये
परिवार ने अदालत को बताया कि इतनी बड़ी रकम जुटाना उनके लिए संभव नहीं था। इसके बावजूद पिछले आठ महीनों से माता-पिता लगातार लोगों से मदद की अपील कर रहे हैं।
क्राउड फंडिंग के जरिए इंदौर, दिल्ली, मुंबई समेत कई शहरों के लोगों ने आगे आकर आर्थिक सहयोग दिया। आम नागरिकों की मदद से अब तक लगभग 7 से 8 करोड़ रुपये जुटाए जा चुके हैं। हालांकि इलाज पूरा करने के लिए अभी भी करीब 1 से 1.5 करोड़ रुपये की जरूरत बनी हुई है।
परिवार का कहना है कि उन्होंने हर संभव प्रयास कर लिया है, लेकिन अब शेष राशि जुटाने के लिए उनके पास न पर्याप्त समय बचा है और न ही संसाधन।
समय तेजी से निकल रहा है
डॉक्टरों के मुताबिक इस इंजेक्शन का सबसे अधिक फायदा तब मिलता है जब बच्चे का वजन 13 किलो से कम हो। फिलहाल अनिका का वजन करीब 11.5 किलो है। ऐसे में हर गुजरता दिन बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
बताया गया कि पिछले कई महीनों से बच्ची केवल तरल आहार पर निर्भर है। परिवार को डर है कि यदि इलाज में और देरी हुई तो बीमारी का असर बढ़ सकता है और इंजेक्शन का लाभ भी सीमित हो सकता है।
हाईकोर्ट ने सरकारों को दिए निर्देश
इससे पहले भी हाईकोर्ट केंद्र और राज्य सरकार को बच्ची की मदद के लिए आपसी समन्वय बनाने का निर्देश दे चुका है। अदालत ने एम्स दिल्ली को भी मामले में पक्षकार बनाया था, लेकिन ताजा सुनवाई के दौरान एम्स की ओर से कोई प्रतिनिधि या वकील उपस्थित नहीं हुआ।
सुनवाई के दौरान अधिवक्ताओं ने यह भी तर्क दिया कि मध्य प्रदेश में लाड़ली बहना योजना के तहत करोड़ों महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता दी जाती है। यदि सरकार चाहे तो विशेष प्रावधान के जरिए अनिका के इलाज के लिए आवश्यक बची हुई राशि उपलब्ध कराई जा सकती है।
“क्या यह बच्ची भी सरकार की लाड़ली नहीं है?”
इसी तर्क पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने सरकारी पक्ष से सवाल किया कि क्या यह बच्ची भी सरकार की लाड़ली नहीं है। अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार को निर्देश दिया कि वे आपस में चर्चा कर अनिका के इलाज के लिए अधिकतम संभव सहायता देने का रास्ता तलाशें।
मामले की अगली सुनवाई अगले सप्ताह निर्धारित की गई है। अब परिवार और समाज दोनों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या समय रहते अनिका को वह इलाज मिल पाएगा, जिस पर उसकी जिंदगी निर्भर है।
यह मामला केवल एक बच्ची के इलाज का नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों की चुनौती को भी सामने लाता है जो दुर्लभ बीमारियों और महंगे इलाज के बीच उम्मीद की लड़ाई लड़ रहे हैं।
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