CJI Surya Kant: देश में तेजी से बढ़ रहे साइबर अपराधों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर कड़ा रुख दिखाया है। बुधवार को एक साइबर ठगी के आरोपी की जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत की टिप्पणी चर्चा का विषय बन गई। अदालत ने न सिर्फ आरोपी को राहत देने से इनकार किया, बल्कि साइबर अपराधियों के खिलाफ सख्त शब्दों का इस्तेमाल करते हुए उन्हें “परजीवी” तक कह दिया।
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की अवकाशकालीन बेंच एक ऐसे मामले की सुनवाई कर रही थी, जिसमें आरोपी पर साइबर फ्रॉड के जरिए लोगों से करोड़ों रुपये की ठगी करने का आरोप है। सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि साइबर अपराध आज देश के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन चुका है और ऐसे मामलों में नरमी बरतना समाज के हित में नहीं होगा।
जमानत याचिका खारिज करते हुए क्या बोले चीफ जस्टिस? CJI Surya Kant
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जमानत याचिका खारिज करते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने आरोपी से कहा, “तुम लोग परजीवी हो, जो निवेशकों से करोड़ों रुपये ठग लेते हो। साइबर अपराधियों के प्रति हमें बेहद सख्त होना होगा। तुम्हारे शिकार पूरे देश में फैले होते हैं। तमिलनाडु में किसी को ठगते हो और फिर जम्मू में किसी और को निशाना बनाते हो। समाज के हित में यही है कि तुम जेल में रहो।”
चीफ जस्टिस की यह टिप्पणी कोर्ट रूम से बाहर भी चर्चा का विषय बन गई। सोशल मीडिया पर कई लोगों ने अदालत के इस सख्त रुख का समर्थन किया और कहा कि साइबर ठगी के मामलों में कड़ी कार्रवाई जरूरी है।
क्यों गंभीर है साइबर अपराध का खतरा?
अदालत ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि साइबर अपराधियों का नेटवर्क अक्सर कई राज्यों में फैला होता है। ऐसे अपराधी अलग-अलग जगहों पर बैठकर देशभर के लोगों को अपना निशाना बनाते हैं। यही वजह है कि इन मामलों की जांच और अपराधियों तक पहुंचना कई बार चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
कोर्ट का मानना है कि जब एक अपराधी एक राज्य में बैठकर दूसरे राज्य के लोगों को ठग सकता है, तो ऐसे मामलों में कानून को और अधिक सतर्क और सख्त रहने की जरूरत है। अदालत ने संकेत दिया कि साइबर अपराधों को रोकने के लिए सिर्फ तकनीकी उपाय ही नहीं, बल्कि सख्त न्यायिक दृष्टिकोण भी जरूरी है।
‘कॉकरोच’ टिप्पणी के बाद फिर चर्चा में आए चीफ जस्टिस
दिलचस्प बात यह है कि पिछले एक महीने में यह दूसरा मौका है जब चीफ जस्टिस सूर्यकांत की किसी टिप्पणी ने सुर्खियां बटोरी हैं। इससे पहले भी एक मामले की सुनवाई के दौरान उन्होंने कुछ आरोपियों की तुलना “कॉकरोच” यानी तिलचट्टों से की थी। उस टिप्पणी पर काफी बहस हुई थी और कानूनी हलकों में भी चर्चा देखने को मिली थी।
अब “परजीवी” शब्द के इस्तेमाल ने फिर से लोगों का ध्यान आकर्षित किया है। हालांकि इस बार बड़ी संख्या में लोग अदालत की टिप्पणी का समर्थन करते नजर आ रहे हैं। उनका कहना है कि साइबर ठगी के कारण लाखों लोग अपनी मेहनत की कमाई गंवा रहे हैं और ऐसे अपराधियों के खिलाफ सख्त संदेश जाना जरूरी है।
अदालत का साफ संदेश
सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को केवल एक मौखिक टिप्पणी के तौर पर नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे साइबर अपराधों के खिलाफ न्यायपालिका के सख्त रुख के संकेत के रूप में भी माना जा रहा है। अदालत ने साफ कर दिया है कि ऑनलाइन ठगी, निवेश घोटाले और डिजिटल फ्रॉड जैसे मामलों में आरोपी आसानी से राहत की उम्मीद न करें।
विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे डिजिटल लेनदेन बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे साइबर अपराध भी तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी कानून प्रवर्तन एजेंसियों और आम लोगों दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण संदेश मानी जा रही है कि साइबर ठगी को हल्के में नहीं लिया जाएगा।
फिलहाल, कोर्ट के इस फैसले और चीफ जस्टिस सूर्यकांत की टिप्पणी की देशभर में चर्चा हो रही है और इसे साइबर अपराधियों के खिलाफ एक सख्त चेतावनी के तौर पर देखा जा रहा है।
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