Delhi-NCR Old Vehicles Ban: दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। राजधानी और आसपास के इलाकों में प्रदूषण का एक बड़ा कारण मानी जाने वाली पुरानी बसों और ट्रकों को चरणबद्ध तरीके से सड़कों से हटाने की तैयारी शुरू हो गई है। सरकार की नई योजना के तहत अगले दो वर्षों में दिल्ली-एनसीआर में पंजीकृत करीब दो लाख पुरानी बसों और ट्रकों को हटाया जाएगा।
सरकार का मानना है कि पुरानी कमर्शियल गाड़ियां प्रदूषण फैलाने में बड़ी भूमिका निभा रही हैं। आंकड़ों के अनुसार, भारी वाहनों से होने वाला प्रदूषण कुल वाहन प्रदूषण का लगभग 60 प्रतिशत तक माना जाता है। इसी वजह से इन वाहनों को बदलने या स्क्रैप करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
क्या है सरकार की नई योजना? Delhi-NCR Old Vehicles Ban
इस अभियान को केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय आगे बढ़ा रहा है। योजना का मकसद परिवहन क्षेत्र को अधिक स्वच्छ और आधुनिक बनाना है। इसके तहत पुरानी बसों और ट्रकों को हटाकर नई तकनीक वाले कम प्रदूषण फैलाने वाले वाहन खरीदने के लिए प्रोत्साहन दिया जाएगा। योजना में कई प्रमुख वाहन निर्माता कंपनियां शामिल हो चुकी हैं। अशोक लीलैंड और स्विच मोबिलिटी पहले से इसका हिस्सा हैं। अब टाटा मोटर्स ने भी मंत्रालय के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। सरकार को उम्मीद है कि जल्द ही महिंद्रा, वोल्वो, आयशर और अन्य प्रमुख हैवी व्हीकल निर्माता भी इस पहल से जुड़ जाएंगे।
नई बस और ट्रक खरीदने पर मिलेगा 8% तक डिस्काउंट
सरकार की इस योजना के तहत पुरानी बस या ट्रक के बदले नया वाहन खरीदने पर वाहन निर्माता कंपनियां 8 प्रतिशत तक की छूट देंगी। हालांकि इसके लिए कुछ शर्तें भी रखी गई हैं। यदि वाहन बीएस-4 से नीचे की श्रेणी का है, तो उसे अनिवार्य रूप से स्क्रैप कराना होगा। वहीं बीएस-4 या उससे ऊपर की श्रेणी वाले वाहनों को दिल्ली-एनसीआर से बाहर बेचा जा सकेगा। ऐसे वाहनों का पूरा रिकॉर्ड परिवहन विभाग के सिस्टम में दर्ज किया जाएगा।
इसके बाद परिवहन कंपनियां और वाहन मालिक नई बसें या ट्रक रियायती दरों पर खरीद सकेंगे। फिलहाल यह योजना दो वर्षों के लिए शुरू की गई है।
लोन पर भी मिलेगी राहत
सरकार केवल वाहन खरीद पर छूट ही नहीं दे रही, बल्कि वित्तीय सहायता का भी प्रावधान किया गया है। केंद्र और राज्य सरकारें नए वाहन खरीदने के लिए लिए गए ऋण पर ब्याज सहायता भी उपलब्ध कराएंगी। जानकारी के अनुसार, ब्याज दरों पर 5 प्रतिशत तक की मदद दी जा सकती है, जिससे वाहन मालिकों पर आर्थिक बोझ कम होगा।
पांच साल तक मिलेगा फ्यूल वाउचर
इस योजना की एक और खास बात फ्यूल वाउचर है। सरकार नई गाड़ियां खरीदने वालों को पांच साल तक हर महीने निश्चित राशि का ईंधन वाउचर भी देगी। वाहन की श्रेणी के आधार पर यह राशि 1200 रुपये, 2500 रुपये और 4800 रुपये प्रति माह तक हो सकती है। यह सुविधा लाइट, मीडियम और हैवी गुड्स व्हीकल खरीदने वालों को दी जाएगी। दिल्ली के लिए एक विशेष प्रावधान भी रखा गया है। यहां नया लाइट गुड्स व्हीकल खरीदने वालों को केवल इलेक्ट्रिक वाहन (EV) खरीदने की अनुमति होगी। इसका उद्देश्य राजधानी में प्रदूषण को और तेजी से कम करना है।
रोड टैक्स और रजिस्ट्रेशन फीस में भी छूट
राज्य सरकारें भी इस योजना में सहयोग करेंगी। योजना के तहत वाहन खरीदारों को 10 साल तक रोड टैक्स में 100 प्रतिशत तक की छूट मिल सकती है। इसके अलावा रजिस्ट्रेशन फीस भी माफ की जाएगी। इलेक्ट्रिक वाहनों के मामले में यह छूट उसी ग्रॉस व्हीकल वेट (GVW) श्रेणी के इंटरनल कम्बशन इंजन (ICE) वाहनों के बराबर होगी।
प्रदूषण कम करने की दिशा में बड़ा कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह योजना प्रभावी ढंग से लागू होती है, तो दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण के स्तर को कम करने में काफी मदद मिल सकती है। पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की जगह नई तकनीक और इलेक्ट्रिक वाहनों के आने से न केवल हवा की गुणवत्ता बेहतर होगी, बल्कि परिवहन क्षेत्र भी अधिक आधुनिक और पर्यावरण अनुकूल बन सकेगा।
































