अमेरिका का नया ट्रंप कार्ड: S Paul Kapur की नियुक्ति से पाकिस्तान को बड़ा झटका, भारत को मिला नया ‘सुरक्षा साथी’

vickynedrick@gmail.com | Nedrick News Published: 23 अक्टूबर 2025, 05:30 AM Updated: 23 अक्टूबर 2025, 05:30 AM
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S Paul Kapur: अंतरराष्ट्रीय राजनीति के अखाड़े में हाल ही में ऐसा दांव चला है जिसने दक्षिण एशिया के समीकरण बदल दिए हैं। अमेरिका ने दक्षिण एवं मध्य एशिया के लिए भारतीय मूल के अमेरिकी प्रोफेसर एस पॉल कपूर (S. Paul Kapur) को नया दूत नियुक्त किया है और इसी के साथ पाकिस्तान को एक और झटका देते हुए नई AMRAAM मिसाइलें बेचने से साफ इंकार कर दिया है।

दोनों फैसलों ने पाकिस्तान की नींद उड़ा दी है, जबकि भारत के लिए ये कदम एक सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं। यूएस सीनेट ने कपूर की नियुक्ति को मंजूरी दे दी है और वह अब इस महत्वपूर्ण पद पर डोनाल्ड लू की जगह लेंगे। दिलचस्प बात यह है कि कपूर, जो अब ट्रंप प्रशासन के अधिकारी होंगे, भारत में जन्मे हैं और पाकिस्तान के आतंकवाद के मुखर आलोचक के रूप में उनकी पहचान है।

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कपूर की नजर में पाकिस्तान की भूमिका- S Paul Kapur 

एस पॉल कपूर का नाम भारत के लिए किसी नए चेहरे की तरह भले लगे, लेकिन वह अंतरराष्ट्रीय रणनीति और सुरक्षा के क्षेत्र में पहले से एक मजबूत थिंक टैंक के रूप में जाने जाते हैं। कपूर ने कई बार कहा है कि पाकिस्तान आतंकियों को भारत के खिलाफ एक “प्रॉक्सी” हथियार के रूप में इस्तेमाल करता है, और यही उसकी स्थायी नीति रही है।

अपनी चर्चित किताब ‘Jihad as Grand Strategy: Islamist Militancy, National Security and the Pakistani State’ में कपूर लिखते हैं कि 1947 में पाकिस्तान की स्थापना के बाद से ही वह इस्लामी आतंकवादियों के सहारे अपनी सुरक्षा नीति को आगे बढ़ाने की कोशिश करता रहा है। उनका मानना है कि पाकिस्तान की यह रणनीति अस्थिरता नहीं, बल्कि एक सोची-समझी सरकारी नीति है जिसके ज़रिए वह भारत को चुनौती देता है वो भी बहुत कम लागत में।

कौन हैं एस पॉल कपूर?

दिल्ली में जन्मे कपूर भारतीय पिता और अमेरिकी मां के बेटे हैं। अमेरिका में पढ़ाई करने के बाद उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो से राजनीतिक विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय संबंधों में पीएचडी की। आज वह यूएस नेवल पोस्टग्रेजुएट स्कूल (कैलिफोर्निया) में राष्ट्रीय सुरक्षा मामलों के प्रोफेसर हैं और स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के हूवर इंस्टीट्यूशन से विजिटिंग फेलो भी हैं।

कपूर ने अमेरिकी रक्षा विभाग के यूएस-इंडिया स्ट्रेटेजिक डायलॉग में भी योगदान दिया है। वह अपनी नियुक्ति की पुष्टि सुनवाई के दौरान यूएस सीनेट से यह कहते हुए जुड़े कि “मुझे नहीं पता था कि मेरा करियर एक दिन मुझे वहीं ले जाएगा, जहां मेरा जन्म हुआ था।”

एक लेखक और रणनीतिक चिंतक

एस पॉल कपूर सिर्फ एक कूटनीतिज्ञ नहीं, बल्कि एक लेखक और विचारक भी हैं। उनकी किताबें जैसे

  • Dangerous Deterrent: Nuclear Weapons, Proliferation and Conflict in South Asia,
  • India, Pakistan and the Bomb,
  • और The Challenges of Nuclear Security: US and Indian Perspectives
    दक्षिण एशिया की परमाणु राजनीति और भारत-पाकिस्तान संबंधों पर गहरी दृष्टि प्रस्तुत करती हैं।

उनके विचारों में एक खास बात ये है कि वे भारत को क्षेत्रीय स्थिरता का स्तंभ मानते हैं, जबकि पाकिस्तान को आतंकवाद और अस्थिरता का जनक बताते हैं।

‘आंशिक सहयोगी’ पाकिस्तान

कपूर ने Observer Research Foundation (ORF) के लिए 2023 में लिखे एक लेख में भी पाकिस्तान की आलोचना करते हुए कहा कि “आतंक के खिलाफ युद्ध में पाकिस्तान सिर्फ एक ‘आंशिक सहयोगी’ है।”
उन्होंने यह भी लिखा कि भले ही हाफिज सईद जैसे आतंकी नेताओं को गिरफ्तार किया गया हो, लेकिन लश्कर-ए-तैयबा के कई वरिष्ठ सदस्य आज भी पाकिस्तान में खुलेआम घूम रहे हैं।

भारत को लेकर सकारात्मक दृष्टिकोण

जहां पाकिस्तान को लेकर कपूर का रुख सख्त है, वहीं भारत के प्रति उनका दृष्टिकोण हमेशा सकारात्मक और व्यावहारिक रहा है। उन्होंने कई मौकों पर कहा कि अमेरिका और भारत की साझेदारी हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए बेहद ज़रूरी है।
हूवर इंस्टीट्यूशन के एक लेख में उन्होंने लिखा था —
“अमेरिका–भारत की रणनीतिक साझेदारी में एक स्वाभाविक गुण है। हिंद-प्रशांत को मुक्त और खुला रखना, चीन के उभार का संतुलन बनाना, और आर्थिक सहयोग बढ़ाना — यही वो तत्व हैं जो दोनों देशों को करीब लाते हैं।”

भारत के लिए सकारात्मक, पाकिस्तान के लिए चुनौती

कपूर की नियुक्ति के साथ अमेरिका ने यह संकेत दिया है कि आने वाले समय में दक्षिण एशिया में आतंकवाद और क्षेत्रीय स्थिरता के मुद्दे पर सख्त रुख अपनाया जाएगा। यह भारत के हित में है, क्योंकि वह लंबे समय से पाकिस्तान की आतंक नीति के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने में लगा है।

वहीं, पाकिस्तान के लिए यह फैसला एक और झटका है पहले AMRAAM मिसाइल सौदे से इनकार और अब एक ऐसे अधिकारी की नियुक्ति जो खुले तौर पर उसकी नीतियों की आलोचना करता है।

संक्षेप में कहें तो, एस पॉल कपूर की एंट्री सिर्फ एक कूटनीतिक बदलाव नहीं, बल्कि दक्षिण एशिया की राजनीति में एक नया अध्याय है जहां भारत और अमेरिका के रिश्ते और मजबूत होंगे, और पाकिस्तान पर दबाव और बढ़ेगा।

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