Sikhism in Latin America: जब तक भारत अंग्रेजों का गुलाम था तब तक सिखों ने केवल दो कारणों से भारत को छोड़कर दूसरे देश में पलायन किया था। पहला ब्रिटिश सेना के सैनिक बनकर या फिर बेहतर भविष्य के लिए रोजगार और व्यापार के अवसरों को देखकर। हालांकि सिखो की शारीरिक ताकतों से दुनिया पहले ही रूबरू हो चुकी थी। इसलिए उनकी मांग बाकियों से ज्यादा थी। लेकिन कई देशों में प्रवासियों के प्रवेश को लेकर बेहद सख्त नियम रहे है इसलिए सिखो ने प्रवेश के लिए, रोजगार के लिए Latin अमेरिका के कई देशों को चुना। जहां 100 सालों से भी ज्यादा का समय बीतने के बाद भी सिखो ने अपने कौशल से एक अहम जगह बनाई है। खासकर लैटिन अमेरिकी देशों में। वैसे तो लैटिन अमेरिकी देशों में करीब 23 देश के आसपास है, और हर देश की अपन कहानी है, अपने किस्से है। लेकिन इस लेख में हम लैटिन अमेरिका ने सिखो के आने ,उनके बसने और उनके स्थापित होने की कहानी जानेंगे।
लैटिन अमेरिका के बारे में – Sikhism in Latin America
जब तक भारत अंग्रेजों का गुलाम था तब तक सिखों ने केवल दो कारणों से भारत को छोड़कर दूसरे देश में पलायन किया था। पहला ब्रिटिश सेना के सैनिक बनकर या फिर बेहतर भविष्य के लिए रोजगार और व्यापार के अवसरों को देखकर। हालांकि सिखो की शारीरिक ताकतों से दुनिया पहले ही रूबरू हो चुकी थी। इसलिए उनकी मांग बाकियों से ज्यादा थी। लेकिन कई देशों में प्रवासियों के प्रवेश को लेकर बेहद सख्त नियम रहे है इसलिए सिखो ने प्रवेश के लिए, रोजगार के लिए latin अमेरिका के कई देशों को चुना। जहां 100 सालों से भी ज्यादा का समय बीतने के बाद भी सिखो ने अपने कौशल से एक अहम जगह बनाई है। खासकर लैटिन अमेरिकी देशों में। वैसे तो लैटिन अमेरिकी देशों में करीब 21 देश के आसपास है, और हर देश की अपन कहानी है, अपने किस्से है। लेकिन इस वीडियो में हम लैटिन अमेरिका ने सिखो के आने ,उनके बसने और उनके स्थापित होने की कहानी जानेंगे।
लैटिन अमेरिका के बारे में जानकारी
लैटिन अमेरिकी में 20 से ज्यादा देश है, जिसमें मुख्य रूप से स्पैनिश और पुर्तगाली भाषाएं बोली जाती हैं। इसमें दक्षिण अमेरिका के 10 देश, मध्य अमेरिका के 8 देश और कैरेबियाई के 3 देश शामिल हैं। लैटिन अमेरिकी देशों पर स्पेन और पुर्तगाल का शासन था इसलिए यूरोपियन रोमन संस्कृति से ज्यादा प्रभावित है। इन देशों में रोमन कैथोलिक ईसाई की आबादी बहुत ज्यादा है। वहीं ज्यादातर देश प्रगतिशील है। इन देशों के लोग अपनी पुरानी परंपरा को मानते है, जो कि लैटिन से मिलती है। एक विकासशील देश होने के कारण यहां रोजगार के साधनों में भी बढ़ोतरी हुई। सभी लैटिन देशों की मिला कर भी इसकी आबादी करीब 67.3 करोड़ ही है। इन देशों की आर्थिक व्यवस्था कृषि, पशुपालन खनन और खनिज तेल पर निर्भर रही है लेकिन हाल के कुछ सालों के सर्विस और मैन्युफैक्चर सेक्टर को बढ़ावा मिला है।
लैटिन अमेरिका देशों में सिख धर्म
20 वी सदी की शुरुआत में अमेरिका द्वारा एशियाई-विरोधी आप्रवासन कानूनों पर लगाए गए प्रतिबंध के कारण पंजाब के अप्रवासी समूहों ने लैटिन अमेरिकी देशों की तरफ रुख करना शुरू कर दिया। जिसमें सिखो ने मुख्य रूप से अर्जेंटीना, मैक्सिको , पनामा और चिली जैसे देशों को अपना घर चुना। इसमें अर्जेंटीना में सिखो ने ब्रिटिश हुकूमत द्वारा बनाए जा रहे रेलमार्गों और चीनी मिलों मजदूरों की कमी को पूरा करने के लिए सिखो को अर्जेंटीना भेजा था। जिसमें कुछ भेजे गए थे और कुछ अपनी इच्छा से आए थे। अर्जेंटीना ऐसा देश है जिन्होंने 1918 में आधिकारिक धर्म की मान्य दी है थी। रोसारियो डे ला फ्रोंटेरा का गुरुद्वारा नानकसर पहला अधिकारी गुरुद्वारा है, वहीं चिली भी एक ऐसा देश है जहां 2016 में सिख धर्म को आधिकारिक मान्यता दी गई थी। यहां करीब 500 सिख रहते है। यहां सिखो को अपनी धार्मिक मान्यता को मानने की पूरी आजादी है। वो पगड़ी पहन सकते है, दाढ़ी रख सकते है।
सिख धर्म की संस्कृति और परम्परा
सिख और चिली के मूल लोगों के रिश्ते आपस में बहुत अच्छे है। वहीं मैक्सिको और पनामा में तो सिखो का नाता 19 वी सदी से जुड़ा है। मशहूर पनामा नहर को बनाने के लिए भी सिख मजदूरों ने अपना बड़ा योगदान दिया था। इस दौरान बहुत से सिख मैक्सिमो में बस गए थे। मेक्सिको की संस्कृति को सिख संस्कृति से जोड़कर यहां के लोगों ने नई पंजाबी-मेक्सिकन” को बढ़ावा दिया है। यहां भी कई गुरुद्वारे है जो सक्रिय रूप से कार्यरत है। सिख धर्म को बढ़ावा देने के लिए लैटिन अमेरिका के कई देशों में 20वीं शताब्दी की शुरुआत में 3HO यानी कि स्वस्थ, खुशहाल, पवित्र संगठन आंदोलन की शुरुआत की गई थी। जिसमें चिली, ब्राजील और वेनेजुएला क स्थानीय लोगों ने सिख धर्म की संस्कृति और परम्परा से प्रभावित होकर सिख धर्म अपनाया जिसे वो अब भी पूरी दिल से मानते आ रहे है। लैटिन अमेरिकी देशों में सिखों की आबादी भले ही कम है लेकिन वहां रहने वालों सिख स्थानीय लोगो के साथ बेहद सौहार्दपूर्ण रिश्ते से रहते है।












































