Top 5 Ghaziabad News: गाजियाबाद में प्रशासनिक लापरवाही, अदालती हंटर और जनता की बुनियादी समस्याओं को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। एक तरफ जहां राज्य कर विभाग में मास्टर एडमिन आईडी के दुरुपयोग ने 23 कर्मचारियों का भविष्य अधर में लटका दिया है, वहीं दूसरी तरफ मोहन नगर की गुलमोहर ग्रीन्स सोसाइटी में बिल्डर की मनमानी पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कड़ा चाबुक चलाया है।
नागरिक सुविधाओं की बात करें तो ट्रांस हिंडन में बिजली कटौती और दूषित पानी ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है, जिससे जनता नहाने तक के लिए बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर है। इसके बावजूद, प्रदूषण के मुहाने पर खड़े शहर में रोडवेज प्रशासन CAQM के नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए 300 से अधिक खटारा डीजल बसें सड़कों पर दौड़ा रहा है।
वहीं, कॉलोनियों में मौत को दावत देते जर्जर खंभे और लटकते बिजली के तार किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहे हैं। तो चलिए इस लेख के जरिए इन सभी बड़ी खबरों को विस्तार से जानते हैं।
टैक्स डिपार्टमेंट में डिजिटल खेल
गाजियाबाद की पहली खबर पोर्टल की आईडी और पासवर्ड का दुरुपयोग को लेकर है, जहां राज्य कर विभाग में मास्टर एडमिन द्वारा मानव संपदा पोर्टल की आईडी और पासवर्ड के दुरुपयोग के बड़े मामले में इस डिजिटल गड़बड़ी के कारण विभाग के 22 से 23 अधिकारियों और कर्मचारियों की वार्षिक प्रविष्टियों (एसीआर) को शून्य या प्रतिकूल करके खराब कर दिया गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार राज्य कर विभाग में मास्टर एडमिन (उपायुक्त प्रशासन) के स्तर पर मानव संपदा पोर्टल की लॉगिन क्रेडेंशियल्स का दुरुपयोग किया गया। संबंधित अधिकारियों की जानकारी के बिना उनके पासवर्ड रीसेट किए गए और कर्मचारियों के ऑनलाइन सर्विस रिकॉर्ड में प्रतिकूल टिप्पणियां दर्ज कर दी गईं। एसीआर (ACR) खराब होने के कारण विभाग के तीन प्रधान सहायकों (Principal Assistants) की पदोन्नति (Promotion) रुक गई है, जिससे कर्मियों में भारी असंतोष है।
मामला उजागर होने के बाद, राज्य कर विभाग मुख्यालय की ओर से उपायुक्त प्रशासन (Master Admin) को तत्काल प्रभाव से पद से हटाने के आदेश जारी किए गए हैं। इस पूरे डेटा और रिकॉर्ड्स से छेड़छाड़ के मामले की गहराई से जांच करने के लिए तीन सदस्यीय जांच कमेटी का गठन किया गया है। कमेटी सिस्टम लॉग्स, आईपी एड्रेस और पासवर्ड रीसेट की हिस्ट्री खंगाल रही है ताकि अंदरूनी मिलीभगत या डिजिटल हैकिंग के सटीक कारणों का पता लगाया जा सके।
गुलमोहर ग्रीन्स पर हाईकोर्ट सख्त (Top 5 Ghaziabad News)
गाजियाबाद की दूसरी खबर मोहन नगर से जहां इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गाजियाबाद के मोहन नगर स्थित ग्रुप हाउसिंग प्रोजेक्ट ‘गुलमोहर ग्रीन्स’ में बिना निवासियों की सहमति के किए गए अतिरिक्त व अवैध निर्माण को लेकर बेहद सख्त रुख अपनाया है। अदालत ने इस मामले की वास्तविक स्थिति का निष्पक्ष आकलन करने के लिए दो एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किए हैं।
मीडिया द्वारा मिली जानकारी के अनुसार, गुलमोहर ग्रीन्स के निवासियों का आरोप है कि बिल्डर ने अपार्टमेंट ओनर्स की लिखित सहमति लिए बिना ही मूल स्वीकृत नक्शे (Sanctioned Plan) में बदलाव कर अतिरिक्त निर्माण किया और अवैध रूप से फ्लोर बढ़ा दिए।
रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) का यह भी आरोप है कि बिल्डर ने ग्राउंड फ्लोर के कॉमन एरिया (साझा जमीन) को अवैध रूप से बेच दिया। यह पूरा प्रोजेक्ट बिना अनिवार्य कम्पलीशन सर्टिफिकेट (CC) के ही चल रहा है, जिसके बावजूद लोगों को फ्लैटों का पजेशन सौंप दिया गया।
न्यायमूर्ति सरला श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति सुधांशु चौहान की खंडपीठ ने मामले की ग्राउंड रियलिटी जांचने के लिए दो वकीलों को कमिश्नर नियुक्त किया है। ये दोनों एडवोकेट कमिश्नर 19 और 20 सितंबर 2026 को गुलमोहर ग्रीन्स सोसाइटी का मौके पर जाकर मुआयना करेंगे और अपनी एक संयुक्त रिपोर्ट सीधे हाईकोर्ट को सौंपेंगे।
कोर्ट ने इससे पहले गाजियाबाद डेवलपमेंट अथॉरिटी (GDA) द्वारा दाखिल हलफनामे को ‘पूरी तरह अधूरा’ बताते हुए खारिज कर दिया था। कोर्ट ने यूपी अपार्टमेंट एक्ट 2010 के नियमों का पालन न कराने पर नाराजगी जताते हुए आवास विभाग के प्रमुख सचिव और GDA के वीसी को व्यक्तिगत रूप से भी तलब किया था।
ट्रांस हिंडन में हाहाकार (Top 5 Ghaziabad News)
गाजियाबाद की तीसरी खबर ट्रांस हिंडन से है, जहां इन दिनों बुनियादी सुविधाओं—बिजली और पानी—को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। वैशाली, इंदिरापुरम, वसुंधरा और रामप्रस्थ जैसी प्रमुख कॉलोनियों के निवासी दूषित जलापूर्ति और अघोषित बिजली कटौती के दोहरे संकट से बेहद परेशान हैं। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि लोगों को दैनिक कार्यों के साथ-साथ नहाने तक के लिए 20-20 लीटर की पानी की बोतलें खरीदनी पड़ रही हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वैशाली (विशेषकर सेक्टर-3) और रामप्रस्थ कॉलोनी में नलों से दुर्गंधयुक्त और सीवर का गंदा पानी आ रहा है। पानी इतना दूषित है कि लोग इसे रोजमर्रा के कामों में भी इस्तेमाल नहीं कर पा रहे हैं। मजबूरन हर परिवार को दुकानों से बोतलबंद पानी मंगाना पड़ रहा है, जिससे उन पर प्रति माह ₹3,000 तक का अतिरिक्त आर्थिक भार पड़ रहा है।
रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) और स्थानीय लोगों का आरोप है कि पेयजल पाइपलाइनों के समानांतर बिछी सीवर लाइनें क्षतिग्रस्त (लीक) हो गई हैं, जिससे सीवर का पानी पीने के पानी में मिल रहा है। साहिबाबाद, वैशाली, कौशांबी और इंदिरापुरम के कई खंडों में रात-रात भर और दिन में 3 से 4 घंटे तक की अघोषित बिजली कटौती की जा रही है। हल्की बारिश या मौसम खराब होते ही 33 KV और 11 KV लाइनों में फाल्ट और ट्रिपिंग की समस्या आ जाती है। विद्युत निगम के कमजोर इंफ्रास्ट्रक्चर और जर्जर तारों के कारण उपभोक्ता उमस और गर्मी में रहने को मजबूर हैं।
स्थानीय आरडब्ल्यूए (RWA) पदाधिकारियों ने नगर निगम के जलकल विभाग के महाप्रबंधक और विद्युत निगम के आला अधिकारियों से इसकी लिखित शिकायत की है। लोगों का कहना है कि सीवर और पानी के नाम पर भारी टैक्स वसूलने के बावजूद जलकल विभाग समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं निकाल रहा है। अधिकारियों द्वारा बार-बार सिर्फ ‘जल्द सुधार’ का आश्वासन दिया जाता है।
CAQM के नियमों की धज्जियां (Top 5 Ghaziabad News)
गाजियाबाद की यह चौथी खबर खटारा बसों को लेकर है। अक्टूबर में ठंड की शुरुआत के साथ ही दिल्ली-एनसीआर में बढ़ने वाले प्रदूषण को देखते हुए, वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) के नियमों की जमीनी हकीकत को उजागर करती यह एक बहुत ही महत्वपूर्ण रिपोर्ट है।
सीएक्यूएम (CAQM) द्वारा तीन साल पहले जारी गाइडलाइंस के बावजूद, गाजियाबाद में उत्तर प्रदेश राज्य सड़क परिवहन निगम (UPSRTC) की 300 से अधिक पुरानी BS-3 और BS-4 डीजल बसें आज भी धड़ल्ले से सड़कों पर दौड़ रही हैं। अक्टूबर में एनसीआर (NCR) के भीतर ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान (GRAP) लागू होने वाला है।
ऐसे में इन ‘खटारा’ बसों का संचालन बंद न होना क्षेत्र की वायु गुणवत्ता (Air Quality) के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। रोडवेज प्रशासन द्वारा तीन साल की लंबी समय-सीमा मिलने के बाद भी इन प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों को सीएनजी (CNG) या ई-बसों (E-Buses) से रिप्लेस न किया जाना व्यवस्था की सुस्ती को दिखाता है।
सड़कों पर झूलते हाई-वोल्टेज तार (Top 5 Ghaziabad News)
गाजियाबाद की पांचवी ट्रांस हिंडन से है। जहां शहरी और ग्रामीण इलाकों में जर्जर बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर के कारण बड़े हादसों का खतरा बना हुआ है। ट्रांस हिंडन और मुख्य शहर के कई रिहायशी इलाकों में तिरछे हो चुके खंभे और नीचे तक लटके हाई-वोल्टेज बिजली के तार राहगीरों और स्थानीय निवासियों के लिए जानलेवा साबित हो रहे हैं। वैशाली, इंदिरापुरम, खोड़ा और विजयनगर जैसे घने बसे इलाकों में बिजली के मुख्य तार (कंडक्टर) ढीले होकर सड़कों या घरों की बालकनी के बेहद करीब तक लटक रहे हैं।
कई अंदरूनी रास्तों पर बिजली के खंभे (Poles) आधार कमजोर होने या वाहनों की टक्कर के कारण एक तरफ झुक गए हैं। हवा चलने या बारिश होने पर इनके गिरने का डर हमेशा बना रहता है. मुख्य बाजारों और व्यावसायिक क्षेत्रों में तार इतने नीचे हैं कि मालवाहक या बड़े वाहनों के उनसे टकराने से कभी भी बड़ा शॉर्ट सर्किट या आगजनी हो सकती है।
मॉनसून या हल्की बारिश के बाद जब सड़कों पर पानी भरता है, तो इन लटकते तारों से पानी में करंट उतरने का सबसे बड़ा डर रहता है, जिससे पूर्व में भी हादसे हो चुके हैं। स्थानीय रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) और व्यापार मंडलों का आरोप है कि ‘डिस्कॉम’ (विद्युत वितरण निगम) के कंट्रोल रूम और जेई (JE) को बार-बार ट्वीट और लिखित शिकायत करने के बाद भी तारों को कसने या खंभों को सीधा करने का काम नहीं किया जाता।












































