Punjab youth migration: अप्रैल 2026 में 15 भारतीयों को ऑस्ट्रेलिया से इंडिया डिपोर्ट करके वापिस भेजा गया था, इन 15 इंडियंस में 11 तो केवल पंजाब के ही थे.. जब ये 11 लोग पंजाब पहुंचे तो सबसे पहले इनका स्वागत किया पंजाब की पुलिस ने.. और शुरु हुई खोजबीन डंकी रूट के सच की। साल 2023 में शाहरूख खान और तापसी पन्नू की एक फिल्म आई थी डंकी.. फिल्म भले ही न चली हो लेकिन बहुत से दर्शकों को पहली बार पता चला की ये डंकी केवल हिंदी के गधे के लिए ही इस्तेमाल नहीं होता बल्कि फिल्म में डंकी का मतलब भी उस रास्ते से था, जिससे चोरी छिपे पंजाब समेत भारत के अलग अलग राज्यों से लोग फर्जी तरीके से विदेश भेजे जा रहे है। हैरानी की बात ये है कि इन लोगो में सबसे ज्यादा संख्या जो है वो पंजाब की ही है। वैसे डंकी फिल्म में शाहरूख भी पंजाब के ही बने है.. इस कारण भी पंजाब का डंकी रूट से कनेक्शन थोड़ा ज्यादा सवालो के घेरे में आ गया.. अपने इस वीडियो में हम पंजाब के युवाओं का विदेश पलायन करने और उसके लिए डंकी रूट का इस्तेमाल का सच जानेंगे।
विदेश जाने की चाह में पंजाब का युवा
पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (PAU) की एक रिसर्च के मुताबिक पंजाब में एग्रीकल्चर सेक्टर में कम आय, रोजगार में सही ऑपर्च्युनिटी के न मिलने और योग्यता के हिसाब से नौकरी न मिलने के कारण पंजाब से युवाओ का पलायन तेजी से बढ़ा है। जिसमें 72% युवा भारत के दूसरे हिस्से में जाने के बजाय विदेश जाना पसंद करते है। वहीं दूसरी तरफ विदेश जाना अब पंजाब के युवाओ के लिए एक स्टेटस सिंबल भी बन चुका है, यानी कि जो विदेश में है, वो ज्यादा इज्जतदार और प्रतिष्ठित माना जाता है। साल 2023 की एक रिपोर्ट बताती है कि केवल पंजाब में ही 11.94 लाख नए पासपोर्ट जारी किए गए थे। उस साल पंजाब में रोज़ाना 3,200 से ज्यादा पासपोर्ट जारी हो रहे थे।
पंजाब में अभी भी 15 से 18% लोगों के पास पासपोर्ट है हालांकि 2025-26 में इनमें कमी आई है। जिसका कारण है Immigration नियमों और स्टूडेंट वीजा में ऑस्ट्रेलिया ब्रिटेन और कनाडा जैसे देशों के की जाने वाले सख्ती। इनके नियमों में बदलाव किए गए है, जिससे पासपोर्ट वीजा के जारी होने में अब काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। बावजूद इसके आज भी पंजाब से हर दिन करीब 390 से 400 युवा लीगल वीजा पर विदेश जा रहे है। लेकिन जिन्हें वैध वीजा नहीं मिलता वो रास्ता अपना रहे है डंकी रोड का। जिसके कारण अवैध रूप से भी पंजाब के युवाओ का पलायन तेजी से बढ़ रहा है। अब जानते है कि क्या है डंकी रोड।
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डंकी रूट से लेकर Immigration तक का पूरा सच
डंकी रूट को अगर आसान भाषा में समझे तो इसका मतलब है एक जगह से दूसरे जगह पर छलांग लगाना। यानी कि वो रास्ता जिसपर अवैध रूप से प्रवासी चोरी छिपे और अपनी जान को जोखिम में डाल कर छलांग लगा कर जाते है। जिन युवाओं को कानूनी रूप से किसी न किसी तरह से वीजा नहीं मिलता, वो विदेश जाने के लिए ऐसे एजेंटो और मानव तस्करों के चक्कर में फंस जाते है, और वो एजेंट अवैध रूप से ऐसे रास्तों के जरिए उन्हें विदेश भेजते है जो भारत सरकार से लेकर उक्त देश में भी गैरकानूनी माना जाता है। अमेरिका, यूरोप और ऑस्ट्रेलिया जैसे विकसित देशों में भेजने के लिए तो एजेंट 20 लाख से 75 लाख रुपए तक वसूलते है। इसके लिए एजेंट ऐसे देशों को चुनते है जहां वीजा ऑन अराइवल का इस्तेमाल करके पहले उन देशों में भेजा जाता है। उदाहरण के लिए इक्वाडोर, बोलीविया, ब्राजील या वेनेजुएला जैसे लैटिन अमेरिकी देशों ने तस्कर किया जाता है, इसके अलावा डेरियन गैप’ जो कि पनामा और कोलंबिया के बीच का 96 किलोमीटर का घना दलदली जंगल है, उसे पार करने का रास्ता निकालते है, इसके अलावा अलग अलग देशों में लोकल एजेंट होते है जो प्रवासियों को चोरी छिपे बॉर्डर पार करा देते है।
जिसके बाद जब वो अपने लक्षित देश तक पहुंच जाते है तो वहां वो आत्मसमर्पण कर के दावा करते है कि उनकी जान को खतरा है, इसलिए उन्हें डिटेंशन सेंटर में रखा जाए। इस तरह वो कई कई महीनों तक वहीं रहते है। वहीं ऐसे भी है जो इससे बच निकलते है। लेकिन अगर किसी का दावा गलत साबित हुआ तो उन्हें वापिस उनके देश डिपोर्ट कर दिया जाता है। हालांकि पहले विदेश जाने की होड़ केवल बेहद पढ़े लिखे और अमीर घरानों में देखी जाती थी लेकिन पिछले कुछ सालों में ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं में भी विदेश जाने की होड़ लगी हुई है। 12वी करने के बाद ही युवा इंटरनेशनल इंग्लिश लैंग्वेज टेस्टिंग सिस्टम पास करके विदेश जाने के लिए खुद को काबिल बनाने की कोशिश करते है। आईईएलटीएस एक इंग्लिश प्रोफिशिएंसी टेस्ट है जिसे कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, यूके, यूएसए, न्यूजीलैंड में जाने से पहले दिया जाता है, ताकि ये जान सके कि आप वहां रहने के काबिल है या नहीं।
इससे साबित होता है कि आवेदन करने वाले क्लॉज को अंग्रेजी बोलना, लिखना, पढ़ना और समझना आता है। अगर वो पास नहीं होते तो वो इसे एजेंटो को पकड़ते है जो डंकी रूट के जरिए उन्हें विदेश भेज तो देते है। लेकिन रास्ते में उनके साथ जो भी होता है उसके लिए एजेंट जिम्मेदार नहीं होते। वहीं पकड़े जाने पर उन्हें वापिस भेज दिया जाता है जो उन्हें बड़े कानूनी पचड़े में फंसा देता है। विडंबना ये है कि अच्छे जीवन के नाम पर पंजाब के युवाओ को बरगलाया जा रहा है,जिसे सरकार रोकने में नाकाम साबित हो रही है। जब तक जागरूकता नहीं होगी तब तक न तो अवैध पलायन रुकेगा और न ही युवाओं का भविष्य अंधकार में जाने से। आपकी नजर में ऐसे भटके हुए युवाओं के लिए क्या किया जाना चाहिए।












































