Delhi Metro Arpan Kendra: दिल्ली जैसे बड़े शहर में रहने वाले लगभग हर परिवार के सामने एक आम समस्या जरूर आती है अलमारी में जमा पुराने और अनुपयोगी कपड़ों का क्या करें? फेंकने का मन नहीं करता और संभालकर रखना सिरदर्द बन जाता है। दिल्लीवासियों की इसी परेशानी का एक बेहद व्यावहारिक और पर्यावरण के अनुकूल समाधान निकाला है दिल्ली मेट्रो ने। मेट्रो स्टेशनों पर शुरू किए गए ‘अर्पण केंद्र’ लोगों के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं। इन केंद्रों पर लोग अपने पुराने कपड़े जमा कर रहे हैं, जिन्हें फेंकने के बजाय दोबारा उपयोग, अपसाइक्लिंग और रीसाइक्लिंग के जरिए खूबसूरत व उपयोगी सामान में बदला जा रहा है।
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली मेट्रो रेल निगम की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि अर्पण केंद्र सिर्फ पुराने कपड़ों के निपटारे की जगह नहीं हैं, बल्कि यह कचरे को काम की चीज में बदलने का एक बेहतरीन माध्यम बन चुके हैं। इससे शहर को स्वच्छ, सुंदर और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में काफी मदद मिल रही है।
31 अगस्त तक जमा हुआ 41 टन से ज्यादा कपड़ा| Delhi Metro Arpan Kendra
दिल्ली मेट्रो के 10 प्रमुख स्टेशनों पर इन केंद्रों की शुरुआत अगस्त के महीने में की गई थी। इनमें से पांच केंद्र 3 अगस्त को शुरू हुए, जबकि बाकी 12 और 17 अगस्त को खोले गए। आंकड़ों की बात करें तो 31 अगस्त तक कुल 3,940 लोगों ने इन 10 केंद्रों पर 41,181.59 किलोग्राम (41 टन से ज्यादा) पुराने कपड़े जमा कराए हैं।
सबसे ज्यादा उत्साह रोहिणी और आसपास के इलाकों में देखने को मिला:
- डॉ. बाबा साहेब अंबेडकर अस्पताल केंद्र: सबसे आगे रहा, जहां 9,861.40 किलोग्राम कपड़े इकट्ठा हुए।
- शालीमार बाग: दूसरे नंबर पर रहा, जहां 9,761.03 किलोग्राम कपड़े पहुंचे।
- पंजाबी बाग पश्चिम और शाहदरा: यहां क्रमश: 6,534.98 किलोग्राम और 6,386.08 किलोग्राम कपड़े जमा किए गए।
- मयूर विहार फेज-1: 5,189.40 किलोग्राम कपड़े मिले।
इसके अलावा हौज खास, द्वारका-ककरोला, मालवीय नगर, लाजपत नगर और मोहन एस्टेट स्टेशनों पर भी सैकड़ों किलोग्राम कपड़े लोगों ने स्वेच्छा से दान किए।
कचरा बनने के बजाय बन रहे बैग, रग्स और तोरण
अर्पण केंद्रों पर जो कपड़े जमा होते हैं, उन्हें सीधे फेंकने के बजाय सावधानी से अलग-अलग श्रेणियों में बांटा जाता है। इनमें से लगभग 4,266 किलोग्राम कपड़े ऐसे थे जो दोबारा उपयोग या अपसाइक्लिंग के लिए छांटे गए, जबकि 29,424 किलोग्राम सामग्री को रीसाइक्लिंग के लिए भेजा गया।
इन कपड़ों का इस्तेमाल करके स्वयं सहायता समूह (SHG) तरह-तरह के उपयोगी और आकर्षक उत्पाद तैयार कर रहे हैं। इनमें सुंदर रग्स, ऑफिस फोल्डर, की-रिंग, पाउच, कपड़े के बैग और सजावटी तोरण शामिल हैं। खास बात यह है कि इन सामानों को अर्पण केंद्रों पर प्रदर्शित भी किया जा रहा है, ताकि लोगों को पता चले कि उनके दिए हुए कपड़ों का कितना शानदार इस्तेमाल हुआ है।
उत्पादों की बिक्री भी शुरू, जनवरी 2027 तक खुलेंगे 10 नए केंद्र
इस पूरी व्यवस्था की खूबसूरती यह है कि तैयार सामान की बिक्री भी की जा रही है, जिससे स्थानीय समूहों को रोजगार मिल रहा है। अब तक इन केंद्रों से 27,036 रुपये की बिक्री दर्ज की जा चुकी है। लोगों के जबर्दस्त समर्थन को देखते हुए दिल्ली मेट्रो अब इस नेटवर्क को और बड़ा करने जा रही है। अर्पण केंद्रों की सफलता के बाद 10 और नए केंद्र खोलने का प्रस्ताव तैयार किया गया है, जो जनवरी 2027 तक चालू हो सकते हैं। ये नए केंद्र मॉडल टाउन, आईएनए, आईपी एक्सटेंशन, पश्चिम विहार पश्चिम, राजेंद्र प्लेस, जनकपुरी पश्चिम, राजौरी गार्डन, ग्रेटर कैलाश, द्वारका सेक्टर-10 और छतरपुर मेट्रो स्टेशनों पर शुरू किए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने दिल्लीवासियों से अपील की है कि वे इस मुहिम से जुड़कर अपनी पुरानी चीजों को नया जीवन दें और पर्यावरण को बचाने में अपनी भागीदारी निभाएं।












































