Mehul Choksi Belgium extradition: पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के हजारों करोड़ रुपये के घोटाले में वांछित भगोड़े हीरा कारोबारी मेहुल चोकसी को भारत लाने की कोशिशें एक बार फिर तेज हो गई हैं। हाल ही में भारत और बेल्जियम के बीच हुई उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय बातचीत में नई दिल्ली ने इस मुद्दे को पूरी गंभीरता के साथ उठाया। एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों ने पुष्टि की है कि बातचीत के दौरान बेल्जियम ने मेहुल चोकसी को भारत भेजने के मामले पर सकारात्मक रुख दिखाया है। भारतीय अधिकारियों ने दो टूक साफ कर दिया है कि चोकसी को वापस लाकर अदालत के कटघरे में खड़ा करना सरकार की शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल है।
कूटनीतिक बातचीत में आगे बढ़ा मामला, पर तुरंत वापसी नहीं| Mehul Choksi Belgium extradition
भारत सरकार इस मामले में कानूनी दांव-पेचों के साथ-साथ राजनयिक चैनलों का भी पूरा इस्तेमाल कर रही है। हालांकि, जानकारों का कहना है कि बेल्जियम सरकार की ओर से मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया का यह कतई मतलब नहीं है कि चोकसी को कल ही विमान में बैठाकर भारत ले आया जाएगा। किसी भी भगोड़े के प्रत्यर्पण (Extradition) के लिए संबंधित देश की स्थानीय अदालतों और न्यायिक प्रक्रियाओं से होकर गुजरना पड़ता है। बेल्जियम की अदालतों में भी चोकसी के प्रत्यर्पण की कानूनी वैधता, मानवाधिकारों और अंतरराष्ट्रीय संधियों की बारीकी से जांच होगी, जिसके बाद ही कोई अंतिम फैसला लिया जा सकेगा।
नागरिकता और मुल्कों के फेर में उलझा केस
मेहुल चोकसी का मामला शुरुआत से ही बेहद पेचीदा रहा है क्योंकि इसमें कई देश, अंतरराष्ट्रीय कानून और नागरिकता के विवाद जुड़े हुए हैं:
- देश छोड़ना और नई नागरिकता: जनवरी 2018 में पीएनबी महाघोटाला सार्वजनिक होने से ठीक पहले चोकसी भारत से फरार हो गया था। इसके बाद उसने कैरेबियाई देश एंटीगुआ और बारबुडा की नागरिकता हासिल कर ली।
- डोमिनिका का रहस्यमयी ड्रामा: साल 2021 में वह एंटीगुआ से अचानक रहस्यमय तरीके से लापता हो गया और फिर डोमिनिका में पकड़ा गया। उस वक्त उसके संभावित निर्वासन को लेकर बड़ा अंतरराष्ट्रीय और राजनयिक विवाद खड़ा हुआ था।
- एंटवर्प में गिरफ्तारी: कानूनी दांवपेच के बीच बेल्जियम के अधिकारियों ने अप्रैल 2025 में मेहुल चोकसी को एंटवर्प शहर से गिरफ्तार किया था, जहां वह अपनी पत्नी प्रीति के साथ रह रहा था।
- एंटीगुआ वापसी: बाद में वह फिर एंटीगुआ लौटा, जहां उसकी नागरिकता रद्द करने और भारत प्रत्यर्पण को लेकर कानूनी लड़ाई लगातार चल रही है।
भारतीय जांच एजेंसियां (सीबीआई और ईडी) विभिन्न सख्त कानूनों के तहत उसकी संपत्तियों को कुर्क करने और दुनिया भर में फैले उसके आर्थिक नेटवर्क का पता लगाने के लिए अंतरराष्ट्रीय सहयोग ले रही हैं।
नीरव मोदी की वापसी पर भी नजर
पीएनबी घोटाले में केवल मेहुल चोकसी ही नहीं, बल्कि उसका भांजा नीरव मोदी भी मुख्य साजिशकर्ता है। नीरव मोदी लंदन की जेल में बंद है और भारत सरकार उसे भी प्रत्यर्पित कराकर देश वापस लाने की कानूनी लड़ाई लड़ रही है। बेल्जियम के साथ हुई इस ताजा बातचीत से जांच एजेंसियों को उम्मीद बंधी है कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ता दबाव दोनों भगोड़ों को भारतीय कानून के शिकंजे में लाने का रास्ता साफ करेगा।












































