दिल्ली में 400 यूनिट तक बिजली खर्च करने वालों को बड़ी राहत: छतों पर मुफ्त लगेंगे सोलर पैनल, सरकार उठाएगी पूरा खर्च| Delhi Free solar policy

Nandani | Nedrick News New Delhi Published: 03 सितम्बर 2026, 10:05 PM Updated: 03 सितम्बर 2026, 10:05 PM
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Delhi Free solar policy: राजधानी दिल्ली के लोगों के लिए बिजली को लेकर एक बड़ी और राहत भरी खबर सामने आई है। दिल्ली सरकार ने सोलर एनर्जी को बढ़ावा देने और आम जनता को बिजली बिल के झंझट से मुक्ति दिलाने के लिए बड़ा फैसला किया है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को कैबिनेट बैठक के बाद जानकारी दी कि सरकार ने ‘दिल्ली सोलर पॉलिसी 2023’ में एक बड़ा बदलाव किया है। इस नई योजना का सबसे बड़ा फायदा उन परिवारों को मिलेगा, जिनकी बिजली की मासिक खपत 400 यूनिट तक है। ऐसे घरों की छतों पर 3 किलोवाट तक का सोलर रूफटॉप सिस्टम लगाने का पूरा खर्च अब सरकार खुद उठाएगी, यानी उपभोक्ताओं को अपनी जेब से शुरुआती तौर पर एक भी रुपया नहीं देना पड़ेगा।

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मार्च 2027 तक 500 मेगावाट का लक्ष्य, मौजूदा सब्सिडी भी रहेगी जारी| Delhi Free solar policy

सरकार ने इस नई पहल के जरिए दिल्ली को क्लीन और ग्रीन बनाने का रोडमैप तैयार किया है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, प्रशासन का लक्ष्य मार्च 2027 तक ढाई लाख (2.5 लाख) से अधिक घरों की छतों पर सोलर पैनल लगाने का है, जिससे शहर में 500 मेगावाट अतिरिक्त सौर ऊर्जा तैयार की जा सकेगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि केंद्र की ‘प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ देशभर में तेजी से चल रही है, लेकिन दिल्ली में इसकी रफ्तार कुछ धीमी थी। इसी को देखते हुए जमीनी स्तर पर आ रही दिक्कतों को समझा गया और पॉलिसी में जरूरी संशोधन किए गए। इसके साथ ही उन्होंने दिल्लीवालों को आश्वस्त किया कि बिजली बिलों पर मिलने वाली मौजूदा सरकारी सब्सिडी पहले की तरह जारी रहेगी, उस पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

नेट मीटरिंग के लिए अब महीनों का इंतजार नहीं, 25 दिन में होगा काम

सोलर पैनल लगाने में सबसे बड़ी अड़चन नेट मीटरिंग और कागजी कार्यवाही में लगने वाले वक्त को लेकर आती थी। सरकार ने इसे गंभीरता से लेते हुए नेट मीटरिंग की पूरी प्रक्रिया की समय-सीमा को 75 दिनों से घटाकर मात्र 25 दिन कर दिया है। अब घर की छत पर पैदा होने वाली अतिरिक्त बिजली को पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनियों (डिस्कॉम) को ग्रिड के जरिए भेजा जा सकेगा, और बदले में उपभोक्ताओं को उसका भुगतान मिलेगा। पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता और तेजी लाने के लिए सरकार ने आईपीजीसीएल (IPGCL) के जरिए बोली प्रक्रिया अपनाने का फैसला किया है।

‘उपभोक्ता नहीं, अब बिजली उत्पादक बनेंगे दिल्लीवाले’

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सरकार की सोच को साफ करते हुए कहा कि उनका इरादा केवल बिलों में रियायत देने तक सीमित नहीं है। उन्होंने कहा, “हमारा मकसद लोगों को सिर्फ 200 यूनिट की सब्सिडी देना या बिल कम करना नहीं है। हम चाहते हैं कि दिल्ली का हर घर खुद बिजली पैदा करे। अब दिल्लीवासी सिर्फ बिजली के उपभोक्ता नहीं रहेंगे, बल्कि खुद बिजली के उत्पादक बनेंगे।”

फिलहाल दिल्ली के आंकड़ों पर नजर डालें तो यहां कुल 10,073 सोलर सिस्टम लगाए जा चुके हैं, जिनमें सबसे बड़ा हिस्सा सरकारी इमारतों का है। जिन घरों में छत की जगह कम है या स्पेस की दिक्कत है, उनके लिए भी सरकार अलग से विकल्प तैयार कर रही है। वहीं ऊर्जा मंत्री आशीष सूद ने कहा कि कैबिनेट का यह फैसला आम लोगों को सस्ती बिजली देने के साथ-साथ दिल्ली को प्रदूषण मुक्त और स्वच्छ ऊर्जा का हब बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।

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Nandani

nandani@nedricknews.com

नंदनी एक अनुभवी कंटेंट राइटर और करंट अफेयर्स जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें पत्रकारिता के क्षेत्र में चार वर्षों का सक्रिय अनुभव है। उन्होंने चितकारा यूनिवर्सिटी से जर्नलिज़्म और मास कम्युनिकेशन में मास्टर डिग्री प्राप्त की है। अपने करियर की शुरुआत उन्होंने न्यूज़ एंकर के रूप में की, जहां स्क्रिप्ट लेखन के दौरान कंटेंट राइटिंग और स्टोरीटेलिंग में उनकी विशेष रुचि विकसित हुई। वर्तमान में वह नेड्रिक न्यूज़ से जुड़ी हैं और राजनीति, क्राइम तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय खबरों पर मज़बूत पकड़ रखती हैं। इसके साथ ही उन्हें बॉलीवुड-हॉलीवुड और लाइफस्टाइल विषयों पर भी व्यापक अनुभव है।

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