Neem Karoli Baba wife: अक्सर माना जाता है कि अध्यात्म की राह पर चलने के लिए संसार और परिवार को छोड़ना पड़ता है। हम सब नीम करोली बाबा के चमत्कारों और उनके कैंची धाम आश्रम के बारे में जानते हैं। ले
किन क्या आप जानते हैं कि एक महान संत होने के साथ-साथ बाबा एक पति और तीन बच्चों के पिता भी थे? उनके जीवन का यह अनदेखा पहलू आपको हैरान कर देगा। तो चलिए इस लेख के जरिए जानते हैं कौन थीं बाबा की पत्नी और उनके संत बनने के बाद उनका क्या हुआ।
11 वर्ष की उम्र में विवाह
नीम करोली बाबा का वास्तविक नाम लक्ष्मीनारायण शर्मा था। उनका जन्म उत्तर प्रदेश के एक समृद्ध ब्राह्मण परिवार में हुआ था। जब वे मात्र 11 वर्ष के थे, तभी उनका विवाह कर दिया गया। लेकिन बचपन से ही बाबा का मन हनुमान जी की भक्ति और अध्यात्म में लीन रहता था। यही कारण था कि शादी के कुछ समय बाद ही वे सांसारिक बंधनों को छोड़कर अचानक गृहत्याग कर गए और गुजरात की ओर चले गए। वहां वे साधु-संतों की भांति कठिन तपस्या करने लगे।
कौन थीं बाबा की पत्नी? (Neem Karoli Baba wife)
जिस समय बाबा ने गृहत्याग किया, उस वक्त उनकी पत्नी बहुत छोटी थीं। बाबा की पत्नी का नाम राम बेटी देवी (Neem Karoli Baba wife) था। वे उत्तर प्रदेश के एक संस्कारी और सीधे-साधे ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखती थीं। बाबा नीम करोली की ख्याति और चमत्कारों की चर्चा जहां आगे चलकर पूरी दुनिया में फैली, वहीं राम बेटी देवी हमेशा इस लाइमलाइट से दूर रहीं।
उन्होंने बेहद सादगी भरा और सात्विक जीवन जिया। “बाबा के आध्यात्मिक जीवन की चर्चा जितनी होती है, राम बेटी देवी हमेशा उससे दूर रहीं। उन्होंने कभी सार्वजनिक जीवन नहीं अपनाया। वे एक ऐसी समर्पित जीवनसंगिनी थीं जिन्होंने बाबा के आध्यात्मिक मार्ग का कभी विरोध नहीं किया, बल्कि हमेशा उनके निर्णयों का सम्मान किया।
संत बनने के बाद पत्नी का क्या हुआ?
साल 1958 में, जब उनके बच्चे बड़े हो चुके थे, बाबा ने हमेशा के लिए अपने घर और सांसारिक बंधनों को त्याग दिया। वे दिव्य यात्राओं पर निकल पड़े और लोक कल्याण में लग गए। इस दौरान उनकी पत्नी राम बेटी देवी (Neem Karoli Baba wife) का जीवन पूरी तरह बदल गया। बाबा के जाने के बाद राम बेटी देवी ने कभी कोई शिकायत नहीं की।
उन्होंने अकेले ही अपने दोनों बेटों और बेटी की परवरिश की, उन्हें अच्छे संस्कार दिए और पूरे परिवार व पैतृक संपत्ति की जिम्मेदारी बहुत कुशलता से संभाली। जहां एक तरफ देश-विदेश के बड़े-बड़े लोग और मशहूर हस्तियां बाबा के चमत्कारों के आगे सिर झुका रहे थे, वहीं उनकी पत्नी ने हमेशा खुद को इस चकाचौंध से दूर रखा। “बाबा के आध्यात्मिक जीवन की चर्चा जितनी होती है, राम बेटी देवी हमेशा उससे दूर रहीं।
उन्होंने कभी सार्वजनिक जीवन नहीं अपनाया। वे बाबा के पैतृक गांव अकबरपुर में ही रहकर एक सात्विक और धार्मिक जीवन बिताती रहीं। बाबा की महासमाधि के बाद भी वे उनके विचारों और सेवा भाव से जुड़ी रहीं। बाबा की यादों और उनके सेवा कार्यों को जीवित रखने के लिए राम बेटी देवी ने साल 1996 में ‘श्री ठाकुर हनुमान जी ट्रस्ट’ की स्थापना की। “श्री ठाकुर हनुमान जी ट्रस्ट की स्थापना बाबा नीमकरली की पत्नी रामबेटी जी ने 1996 में की थी। आज भी यह ट्रस्ट बाबा के पैतृक आवास और वहां बने मंदिरों की देखरेख करता है।
2004 में हुआ था बाबा की पत्नी का निधन
न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार, नीम करोली बाबा की पत्नी राम बेटी देवी (Neem Karoli Baba wife) का निधन वर्ष 2004 में हुआ था।उन्होंने अपने जीवन का एक लंबा और अधिकांश समय बाबा के पैतृक गांव अकबरपुर (फिरोजाबाद, उत्तर प्रदेश) में ही बिताया। बाबा के महासमाधि लेने (1973) के कई सालों बाद तक वे जीवित रहीं और उन्होंने परिवार की पूरी देखरेख की। आज भी गांव और आश्रम से जुड़े लोग उन्हें सादगी, त्याग और धैर्य की एक अनूठी मिसाल के रूप में याद करते हैं। “उन्होंने अपने जीवन का अधिकांश समय अकबरपुर में ही बिताया। उनके निधन के बाद भी गांव में लोग उन्हें सादगी और धैर्य की एक अनुकरणीय मिसाल के रूप में याद करते हैं।













































