जयपुर का 290 साल पुराना मंदिर, एक ही छत के नीचे विराजती हैं राधारानी और अष्टसखियाँ! | Ladli Ji Temple History

Rajni | Nedrick News Jaipur Published: 02 सितम्बर 2026, 10:12 PM Updated: 02 सितम्बर 2026, 10:12 PM
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Ladli Ji Temple History: क्या आप जानते हैं कि जयपुर में एक ऐसा 290 साल पुराना मंदिर है, जो आपको सीधे वृंदावन की गलियों में ले जाता है? गुलाबी नगरी जयपुर के दिल में बसा है एक ऐसा 290 साल पुराना रहस्य, जहाँ कदम रखते ही इतिहास और अटूट भक्ति का संगम महसूस होता है। जयपुर अपने भव्य किलों और महलों के लिए तो दुनिया भर में मशहूर है, लेकिन रामगंज बाजार में स्थित लाडली जी का मंदिर एक ऐसा आध्यात्मिक केंद्र है जो सबसे अलग है।

इस ऐतिहासिक मंदिर के भीतर कदम रखते ही आप सीधे ब्रजभूमि की दिव्यता का अनुभव करेंगे, जहाँ राधारानी अपने भक्तों को भगवान कृष्ण और अपनी आठ शाश्वत सखियों (अष्टसखियों) के साथ दर्शन देती हैं। तो चलिए इस लेख के जरिए जयपुर के इस अनोखे मंदिर के सफर पर चलते हैं और जानते हैं इसकी पूरी कहानी, जो आज भी वृंदावन के अहसास को जीवंत रखता है।

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एक ही गर्भगृह में अष्टसखियों के दिव्य दर्शन

आपको बता दें कि इस भव्य मंदिर में राधारानी और भगवान श्रीकृष्ण के साथ उनकी आठों सखियाँ—ललिता, विशाखा, चंपकलता, रंगदेवी, चित्रलेखा, इंदुलेखा, सुदेवी और तुंगविद्या—एक साथ विराजमान हैं। मंदिर में प्रतिष्ठित इन अष्टसखियों की मूर्तियां विशेष रूप से वृंदावन से जयपुर लाई गई थीं, जो इस पूरे दरबार को ब्रजभूमि जैसा अलौकिक रूप देती हैं।

राजस्थानी हवेली शैली और अनूठी वास्तुकला

यह मंदिर पारंपरिक राजस्थानी हवेली शैली में बना हुआ है। इसके सुंदर खंभे, मेहराब और बिसात (चेसबोर्ड) जैसा फर्श जयपुर की प्राचीन वास्तुकला की भव्यता को दर्शाते हैं। इस मंदिर की महत्ता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके पास की पूरी गली का नाम ही ‘लाडली जी का खुर्रा’ पड़ गया है।

सांझी कला की जीवंत परंपरा (Ladli Ji Temple History)

लाडली जी का मंदिर (Ladli Ji Temple ) सिर्फ दर्शनों के लिए ही नहीं, बल्कि श्राद्ध पक्ष के दौरान की जाने वाली अपनी पारंपरिक ‘सांझी कला’ के लिए भी विश्व प्रसिद्ध है। यहाँ कलाकार बिना किसी स्टेंसिल (साँचे) के, केवल अपने हाथों के हुनर और रंगीन पाउडर से भगवान कृष्ण के जीवन और ब्रज के पवित्र स्थानों की बेहद खूबसूरत आकृतियां उकेरी करते हैं, जिसे देखने दूर-दूर से लोग आते हैं।

जयपुर का लाडलीजी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भक्ति, इतिहास और बेजोड़ कला का एक अनूठा संगम है। आधुनिकता की दौड़ में भी इस मंदिर ने अपनी 290 साल पुरानी आध्यात्मिक और सांस्कृतिक धरोहर को पूरी तरह सहेज कर रखा है।

अगर आप भी जयपुर की यात्रा पर हैं और महलों-किलों से इतर कुछ समय सुकून और दिव्यता के बीच बिताना चाहते हैं, तो रामगंज बाजार के इस अलौकिक दरबार में आकर राधारानी और उनकी अष्टसखियों के दर्शन जरूर करें। यहाँ का ब्रज जैसा माहौल आपके मन को एक असीम शांति से भर देगा।

Rajni

rajni@nedricknews.com

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