Punjab Politics: पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस का प्रचार अभियान शुरू होने से पहले ही पटरी से उतरता दिख रहा है। 1984 सिख दंगों के दोषी रहे पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार के निधन के बाद उपजे “श्रद्धांजलि विवाद” ने पार्टी के अंदर ऐसा घमासान मचाया है कि सितंबर के पहले हफ्ते में प्रस्तावित राहुल गांधी की बहुप्रतीक्षित बस यात्रा पर फिलहाल ब्रेक लग गया है।
अमृतसर से हुसैनीवाला तक का था 135 किमी का प्लान| Punjab Politics
राहुल गांधी की इस बस यात्रा के जरिए कांग्रेस पंजाब में अपने औपचारिक चुनावी अभियान का बिगुल फूंकने की तैयारी में थी। तय शेड्यूल के मुताबिक:
- राहुल गांधी को सबसे पहले अमृतसर में श्री दरबार साहिब में मत्था टेकना था।
- इसके बाद अमृतसर से हुसैनीवाला तक लगभग 135 किलोमीटर लंबी बस यात्रा शुरू होनी थी।
- पहले चरण में यह यात्रा करीब 25 से 30 विधानसभा क्षेत्रों से होकर गुजरने वाली थी।
पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वडिंग का कहना है कि यह यात्रा जल्द शुरू होगी और राहुल गांधी राज्य में 2 दिन से लेकर 15 दिन तक रुककर प्रचार कर सकते हैं। हालांकि, सियासी विवाद के चलते अब यह तय समय से पिछड़ चुकी है।
दीपेंद्र हुड्डा के बयान और चन्नी के पलटवार से भड़का विवाद
इस पूरे राजनीतिक बवाल की शुरुआत सज्जन कुमार के निधन पर हरियाणा के कांग्रेस नेताओं द्वारा दी गई श्रद्धांजलि से हुई। दीपेंद्र हुड्डा के कथित तौर पर सज्जन कुमार को ‘रोल मॉडल’ बताने वाले बयान पर पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी ने तीखा पलटवार किया। 1984 के दंगों की संवेदनशीलता के कारण मामला इतना गरमा गया कि चन्नी को अपने बयान पर खेद जताना पड़ा और बार-बार सफाई देनी पड़ी। इस विवाद ने चुनाव से ठीक पहले पंजाब में कांग्रेस को बैकफुट पर धकेल दिया है।
गुटबाजी मिटाने का ‘एकजुटता प्लान’ हुआ फेल
पंजाब कांग्रेस पहले से ही गंभीर अंदरूनी गुटबाजी से जूझ रही है। एक तरफ चरणजीत सिंह चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा गुट किसी भी सूरत में प्रदेश अध्यक्ष राजा वडिंग को पद से हटाने की कोशिश में हैं, वहीं आलाकमान ने फिलहाल किसी बदलाव से इनकार किया है। पार्टी आलाकमान की रणनीति थी कि सभी विरोधी गुटों के नेताओं को राहुल गांधी के साथ एक ही बस में बैठाकर जनता के बीच ‘ऑल इज वेल’ और एकजुटता का संदेश दिया जाए, लेकिन यह एकजुटता शो शुरू होने से पहले ही टल गया।
सीएम की रेस में 5 चेहरे, सुनील कोनुगोलू की रिपोर्ट पर फिरा पानी
कांग्रेस के रणनीतिकार सुनील कोनुगोलू की आंतरिक सर्वे रिपोर्ट में आम आदमी पार्टी (AAP) सरकार के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर के चलते कांग्रेस की जीत की मजबूत संभावना जताई गई थी। मगर पार्टी के भीतर करीब 5 बड़े नेता खुद को सीएम पद का दावेदार मान रहे हैं। एक-दूसरे को नीचा दिखाने की होड़ ने पार्टी की चुनावी संभावनाओं को कमजोर कर दिया है।
विपक्षी दल बीजेपी ने भी तंज कसते हुए कहा है कि कांग्रेस की अंदरूनी लड़ाई ने राहुल गांधी के रथ को रोक दिया है। इसके बावजूद पार्टी नेताओं को भरोसा है कि राहुल गांधी की एंट्री से कार्यकर्ता और नेता एकजुट होंगे और चुनावी हवा कांग्रेस के पक्ष में मुड़ेगी।













































