SC Motor Accident Claims SIT: देशभर में मोटर दुर्घटना दावों (Motor Accident Claims) में हो रहे फर्जीवाड़े और मिलीभगत पर सुप्रीम कोर्ट ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने इसे “बहुत बड़े पैमाने पर हो रही धोखाधड़ी” करार देते हुए देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को तुरंत विशेष जांच दल (SIT) गठित करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने बीमा कंपनियों को भी आदेश दिया है कि जहां भी किसी दावे में गड़बड़ी या धोखाधड़ी का अंदेशा हो, वे उन सभी मामलों को जांच के लिए तुरंत संबंधित राज्य की एसआईटी को सौंपें।
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‘चुनिंदा केस भेजे तो टॉप मैनेजमेंट नपेगा’: सुप्रीम कोर्ट| SC Motor Accident Claims SIT
जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस पीबी वराले की पीठ ने 17 अगस्त के अपने आदेश में बीमा कंपनियों को सख्त चेतावनी दी है। कोर्ट ने साफ किया कि अगर कंपनियों ने संदिग्ध दावों को अपनी मर्जी से छांटकर (सेलेक्टिव तरीके से) जांच के लिए भेजा, तो कंपनी के शीर्ष प्रबंधन (टॉप मैनेजमेंट) को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
यह पूरा मामला तब शुरू हुआ जब कोर्ट के सामने एक दुर्घटना में शामिल वाहन की पहचान को लेकर विवाद आया। सुनवाई आगे बढ़ी तो जजों के सामने फर्जीवाड़े का एक पूरा सिंडिकेट खुलता चला गया। इसमें एक ही गाड़ी को अलग-अलग दुर्घटनाओं में दिखाकर करोड़ों रुपये के फर्जी बीमा क्लेम हड़पने का संगठित खेल चल रहा था।
ईमानदार पॉलिसीधारकों पर पड़ता है वित्तीय बोझ
सुप्रीम कोर्ट ने बेहद अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि इस तरह के फर्जी दावों का नुकसान सिर्फ बीमा कंपनियों की बैलेंस शीट तक सीमित नहीं रहता। जब फर्जीवाड़े के चलते कंपनियों का वित्तीय नुकसान बढ़ता है, तो वे उसका बोझ आम और ईमानदार उपभोक्ताओं पर डाल देती हैं, जिससे लोगों को ज्यादा प्रीमियम भरना पड़ता है।
अदालत ने राज्यों को पर्याप्त स्टाफ के साथ एसआईटी बनाने और शिकायतों की तेज जांच के लिए पूरी प्रक्रिया तय करने को कहा है। इसके अलावा, यदि एसआईटी की जांच में बीमा कंपनी के अपने कर्मचारियों या अधिकारियों की मिलीभगत सामने आती है या उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज होती है, तो कंपनियों को उन पर विभागीय कार्रवाई भी करनी होगी।
यूपी मॉडल की तारीफ: 231 FIR और 533 आरोपी
सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार ने बताया कि राज्य में पहले से गठित एसआईटी के पास अब तक 2,188 शिकायतें आई हैं। इनमें से 1,029 मामलों की जांच पूरी हो चुकी है और 533 आरोपियों के खिलाफ 231 एफआईआर दर्ज की जा चुकी हैं। शीर्ष अदालत ने यूपी की इस कार्रवाई की सराहना करते हुए बाकी राज्यों को भी यही मॉडल तेजी से लागू करने की सलाह दी।
VAHAN, SARATHI और EDAR पोर्टल से होगी डिजिटल ट्रैकिंग
फर्जीवाड़े की जड़ काटने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने IRDAI, वित्त मंत्रालय, सड़क परिवहन मंत्रालय (MoRTH) और जनरल इंश्योरेंस काउंसिल को मामले में पक्षकार बनाया है। कोर्ट ने सुझाव दिया कि फर्जी क्लेम पकड़ने के लिए VAHAN और SARATHI डेटाबेस के साथ मंत्रालय के E-Detailed Accident Report (EDAR) पोर्टल को आपस में इंटीग्रेट किया जाए। इससे एक क्लिक में पता चल सकेगा कि कोई गाड़ी या व्यक्ति पहले भी किसी हादसे या क्लेम का हिस्सा तो नहीं रहा है।
कोर्ट ने यह भी तय किया है कि अगर मोटर एक्सीडेंट क्लेम ट्रिब्यूनल (MACT) किसी दावे को फर्जी बताकर खारिज करता है, तो कंपनी उसकी आंतरिक जांच कर मामला तुरंत एसआईटी को भेजेगी। इस बड़े मामले की अगली सुनवाई अब 23 सितंबर को तय की गई है।
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