Jharkhand Student Protest: रांची जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जेपीएससी-जेएसएससी (JPSC-JSSC) पेपर लीक और धांधली के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलन पर 60 दिनों के लिए ‘अर्धविराम’ लग गया है। कैबिनेट द्वारा 22 दागी परीक्षाओं को रद्द करने के फैसले को छात्र अपनी बड़ी जीत मान रहे हैं।
हालांकि, अभ्यर्थियों ने साफ कर दिया है कि यह सिर्फ स्थगन है, अंत नहीं। उन्होंने हेमंत सोरेन सरकार को सीबीआई (CBI) जांच शुरू करने के लिए 60 दिनों का कड़ा अल्टीमेटम दिया है और मांग पूरी न होने पर इससे भी बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।
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अभ्यर्थी न्याय मंच का फैसला
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, आंदोलन को 2 महीने के लिए स्थगित करने का यह निर्णय छात्रों के प्रमुख संगठन ‘जेपीएससी-जेएसएससी अभ्यर्थी न्याय मंच’ द्वारा लिया गया है। आंदोलनकारी छात्रों का कहना है कि सरकार को अपनी नीयत साफ करने के लिए 60 दिनों का समय दिया गया है। यदि इस तय समय सीमा के भीतर परीक्षाओं में हुई कथित गड़बड़ियों की सीबीआई (CBI) जांच शुरू नहीं की जाती है, तो छात्र राज्यव्यापी आंदोलन को दोबारा शुरू करने के लिए मजबूर होंगे।
खाली हुआ जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम
बता दें कि जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में 25 जुलाई से जारी धरना प्रदर्शन स्थल से अब टेंट हटाए जा रहे हैं। छात्र आंदोलन के दबाव में हाल ही में राज्य कैबिनेट ने सीआईडी (CID) जांच की रिपोर्ट के आधार पर 22 परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया था। छात्र जेएसएससी-सीजीएल (JSSC-CGL) जैसी प्रमुख परीक्षाओं में हुई धांधली की सीबीआई जांच पर अड़े हुए हैं। सरकार ने उनकी कई मांगें मान ली हैं, इसलिए उन्होंने सीबीआई जांच के फैसले के लिए सरकार को 60 दिन का समय दिया है। आंदोलन को फिलहाल रोकने और टेंट हटाने के बाद छात्र शाम को एक ‘आभार यात्रा’ भी निकाल रहे हैं।
CBI जांच ही है छात्रों की मुख्य मांग (Jharkhand Student Protest)
छात्रों का कहना है कि राज्य की एजेंसियों की जांच से उन्हें पूरी तरह संतुष्ट नहीं किया जा सकता। वहीं जेएसएससी-सीजीएल (JSSC-CGL) जैसी बड़ी परीक्षाओं में हुए बड़े घोटाले की तह तक जाने के लिए केवल सीबीआई (CBI) जांच ही एकमात्र रास्ता है। साथ ही अभ्यर्थियों ने साफ कर दिया है कि भले ही सरकार ने 22 परीक्षाएं रद्द कर दी हों, लेकिन जब तक सीबीआई जांच के आदेश नहीं होते, उनकी यह जीत अधूरी है। इसी मांग को पूरा करने के लिए सरकार को 60 दिनों का समय दिया गया है।
कुल मिलाकर, रांची का यह छात्र आंदोलन फिलहाल शांत जरूर हुआ है, लेकिन युवाओं का आक्रोश पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। सरकार द्वारा 22 परीक्षाओं को रद्द करना छात्रों की एकजुटता की एक बड़ी जीत है। हालांकि, आंदोलन का भविष्य अब पूरी तरह से हेमंत सोरेन सरकार के अगले कदम पर निर्भर करता है। यदि सरकार इन 60 दिनों के भीतर सीबीआई (CBI) जांच की मांग पर कोई ठोस फैसला नहीं लेती है, तो झारखंड में एक बार फिर छात्रों का बड़ा उग्र आंदोलन देखने को मिल सकता है।













































