Nag Panchami के दिन क्यों नहीं इस्तेमाल होता है रसोई का तवा? जानें ज्योतिष और धर्म का यह बड़ा नियम

Rajni | Nedrick News Ghaziabad Published: 14 अगस्त 2026, 10:23 PM Updated: 14 अगस्त 2026, 10:23 PM
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Nag Panchami 2026: नाग पंचमी के पावन पर्व पर जब देश भर में नाग देवताओं की पूजा और उन्हें दूध अर्पित किया जाता है, तो रसोई घर में एक बेहद अनोखा नियम निभाया जाता है—तवे को छुपा दिया जाता है और घर में रोटियां नहीं बनाई जाती हैं।

आधुनिक विज्ञान भले ही इसके पीछे कोई व्यावहारिक कारण तलाशे, लेकिन प्राचीन लोक परंपराओं के अनुसार लोहे के तवे को नाग देवता के फन का प्रतीक माना जाता है। इसके नीचे आग जलाना और इसे तपाना नाग देवताओं को कष्ट देने जैसा माना जाता है, जिससे घर में अमंगल हो सकता है। तो चलिए इस लेख के जरिए जानते हैं कि कब हैं नाग पंचमी, क्यों इस दिन रोटी नहीं पकाई जाती और इसका धार्मिक महत्व।

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Nag Panchami की तिथि और पूजा का शुभ मुहूर्त

विवरणसमय एवं तिथि
नाग पंचमी तिथिसोमवार, 17 अगस्त 2026
पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 05:51 बजे से 08:29 बजे तक
पूजा की कुल अवधि2 घंटे 37 मिनट
पंचमी तिथि प्रारंभ16 अगस्त 2026 को शाम 04:52 बजे

पंचमी तिथि समाप्त

17 अगस्त 2026 को शाम 05:00 बजे

धार्मिक मान्यताओं और लोक कथाओं के अनुसार, नाग पंचमी के दिन चूल्हे पर तवा रखना और रोटी बनाना पूरी तरह वर्जित माना गया है क्योंकि लोहे के तवे को नाग देवता के फन का प्रतीक माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन तवे को आग पर रखने से नाग देवता का अपमान होता है, जिससे घर की सुख-शांति भंग हो सकती है।

राहु का प्रभाव

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, रसोई का तवा राहु ग्रह का प्रतिनिधित्व करता है। राहु का सीधा संबंध सांप की पूंछ या शरीर से माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, नाग पंचमी के दिन तवे का उपयोग करने से राहु के नकारात्मक प्रभाव बढ़ सकते हैं, जिससे परिवार में बेवजह की परेशानियां आ सकती हैं।

लोहे के बर्तनों का निषेध

नाग पंचमी (Nag Panchami) के दिन सुई, चाकू या तवे जैसी लोहे से बनी चीजों का उपयोग अशुभ माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार लोहे की धातु से नाग देवता को कष्ट पहुंच सकता है। चूंकि घरों में आमतौर पर लोहे के तवे का ही इस्तेमाल होता है, इसलिए इस दिन रोटी बनाने की मनाही होती है।

अग्नि से जुड़ा पौराणिक भय

एक अन्य पौराणिक कथा के अनुसार, राजा जन्मेजय ने अपने पिता राजा परीक्षित की सांप के काटने से हुई मृत्यु का बदला लेने के लिए एक महान ‘सर्प मेध यज्ञ’ किया था। उस यज्ञ की अग्नि में खिंचकर कई सांप भस्म हो गए थे। यही कारण है कि सांपों का अग्नि से गहरा भय माना जाता है। नाग पंचमी पर उनके सम्मान में चूल्हे पर सीधे तवा तपाना ठीक नहीं माना जाता।

Rajni

rajni@nedricknews.com

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