Maldives India hospital project: मालदीव में राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की सरकार और एक भारतीय कंपनी के बीच अस्पताल निर्माण परियोजनाओं को लेकर विवाद सामने आया है। विपक्षी मालदीवियन डेमोक्रेटिक पार्टी (MDP) का दावा है कि सरकार ने भारतीय कंपनी के तीन अस्पताल प्रोजेक्ट रद्द कर दिए, जिसके बाद कंपनी ने मालदीव के खिलाफ करीब 70 मिलियन डॉलर, यानी लगभग ₹667 करोड़ के हर्जाने का दावा किया है।
हालांकि, प्रोजेक्ट रद्द करने की वजह को लेकर अभी मालदीव सरकार की ओर से कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। ऐसे में इस विवाद ने दोनों देशों के रिश्तों को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
तीन अस्पताल परियोजनाओं के कॉन्ट्रैक्ट रद्द| Maldives India hospital project
MDP ने एक प्रेस बयान में आरोप लगाया कि मुइज्जू सरकार ने 11 मार्च 2025 को तीन अस्पताल परियोजनाओं के कॉन्ट्रैक्ट खत्म कर दिए। इनमें काफू एटोल का थुलुसधू हॉस्पिटल, नूनू एटोल का वेलिधू हॉस्पिटल और शवियानी एटोल का मिलंधू हॉस्पिटल शामिल हैं।
मालदीव की मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, इन परियोजनाओं का निर्माण भारत की आनंद बिल्डटेक प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा गया था। थुलुसधू अस्पताल का कॉन्ट्रैक्ट करीब 91.7 मिलियन मालदीवियन रूफिया (MVR) का था, जबकि वेलिधू और मिलंधू अस्पतालों के लिए करीब 95.6 मिलियन MVR प्रति परियोजना के समझौते किए गए थे।
भारतीय कंपनी ने ठोका 70 मिलियन डॉलर का दावा
MDP के मुताबिक, कॉन्ट्रैक्ट रद्द होने के बाद भारतीय कंपनी ने मालदीव सरकार से करीब 70 मिलियन डॉलर के मुआवजे की मांग की है। भारतीय मुद्रा में यह रकम लगभग ₹667 करोड़ बैठती है। हालांकि, यह दावा किस कानूनी प्रक्रिया के तहत किया गया है और मामले की मौजूदा स्थिति क्या है, इसकी पूरी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। इसी तरह मालदीव सरकार ने इन परियोजनाओं को रद्द करने के पीछे क्या कारण बताए हैं, यह भी स्पष्ट नहीं है।
MDP ने सरकार पर लगाए गंभीर आरोप
विपक्षी पार्टी ने दावा किया कि इन अस्पतालों का काम रद्द किए जाने से पहले परियोजनाओं पर तेजी से काम चल रहा था। MDP ने स्वास्थ्य मंत्री गीला अली के उन आरोपों का भी जवाब दिया, जिनमें पिछली MDP सरकार पर 16 परियोजनाओं को रोकने का आरोप लगाया गया था। MDP का आरोप है कि मौजूदा सरकार ने जनता के हित और सरकारी खजाने पर पड़ने वाले असर की परवाह किए बिना अस्पताल परियोजनाओं को खत्म किया। पार्टी का दावा है कि बाद में इन्हीं परियोजनाओं को मालदीव की सरकारी कंपनियों यानी State-Owned Enterprises (SOEs) को ज्यादा कीमत पर दिए जाने की तैयारी की गई।
भारत-मालदीव रिश्तों के बीच बढ़ी चर्चा
मुइज्जू को चीन के करीब माना जाता है और उनके सत्ता में आने के बाद भारत-मालदीव संबंधों में तनाव भी देखने को मिला था। ऐसे में भारतीय कंपनी से जुड़े अस्पताल प्रोजेक्ट का रद्द होना एक संवेदनशील मुद्दा बन गया है।














































