Taj Mahal History: दुनिया की सबसे खूबसूरत इमारतों में शामिल ताजमहल सिर्फ अपनी खूबसूरती के लिए ही नहीं, बल्कि इससे जुड़े कई सवालों और दावों को लेकर भी चर्चा में रहता है। सदियों पुरानी यह इमारत अपने अंदर इतिहास, किस्से और कई रहस्य समेटे हुए है। समय-समय पर ताजमहल को लेकर अलग-अलग दावे सामने आते रहे हैं। कुछ लोग इसे हिंदू मंदिर होने का दावा करते हैं तो कुछ बंद कमरों में कथित रूप से हिंदू प्रतीकों या मंदिर के अवशेष होने की बात कहते हैं। वहीं इतिहासकारों के अनुसार ताजमहल का निर्माण मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी पत्नी मुमताज महल की याद में कराया था।
ऐसे में सवाल उठते हैं कि आखिर ताजमहल किस जमीन पर बना था? वहां पहले क्या मौजूद था? और इसके 22 कमरे दशकों से बंद क्यों हैं? आइए जानते हैं इन सवालों से जुड़ी जानकारी।
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किसकी जमीन पर बना था ताजमहल? Taj Mahal History
इतिहास के दस्तावेजों के मुताबिक, ताजमहल जिस जमीन पर बना है, वह पहले राजपूत राजा जयसिंह के अधिकार में थी। शाहजहां के दरबारी इतिहासकार अब्दुल हमीद लाहौरी ने अपनी प्रसिद्ध किताब “बादशाहनामा” में इसका जिक्र किया है। लाहौरी के अनुसार, शाहजहां ने ताजमहल के निर्माण के लिए राजा जयसिंह से यह जमीन ली थी। इसके बदले में उन्हें आगरा में चार हवेलियां दी गई थीं। 17वीं सदी के इस ऐतिहासिक विवरण का जिक्र कई इतिहासकारों ने भी किया है। आधुनिक इतिहासकार एबा कोच और जाइल्स टिलोट्सन ने भी इस बात को स्वीकार किया है कि यह जमीन पहले राजा जयसिंह की थी।
ताजमहल से पहले वहां क्या था?
ताजमहल बनने से पहले इस जगह को लेकर कई तरह की बातें कही जाती हैं। इतिहासकारों के अनुसार, यमुना नदी के किनारे स्थित यह स्थान एक खुला भूखंड था, जिसे शाहजहां ने मकबरे के निर्माण के लिए चुना था। कुछ इतिहासकारों का मानना है कि वहां पहले छोटे निर्माण या बगीचे हो सकते थे, लेकिन इस बात के कोई पुख्ता प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं। ताजमहल का निर्माण वर्ष 1632 में शुरू हुआ और करीब 21 साल बाद 1653 में पूरा हुआ।
ताजमहल के 22 कमरे क्यों हैं बंद?
ताजमहल के बंद कमरों को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा होती है। कहा जाता है कि मुख्य मकबरे और चमेली फर्श के नीचे बने करीब 22 कमरे लंबे समय से बंद हैं। इन कमरों को लेकर कई तरह की कल्पनाएं और दावे किए जाते रहे हैं। इतिहासकारों के अनुसार, इन कमरों को मुगल काल से ही बंद रखा गया है। साल 1934 में इन्हें निरीक्षण के लिए खोला गया था, लेकिन इसके बाद फिर से बंद कर दिया गया।
ताजमहल की संरचना में यमुना की ओर नीचे जाने वाली दो सीढ़ियां भी हैं, जिन पर लोहे का जाल लगा हुआ है। इसके अलावा पहली मंजिल पर बने कुछ हिस्सों तक पहुंचने वाली सीढ़ियां भी लंबे समय से बंद हैं।
कमरों को बंद रखने की वजह क्या है?
कई विशेषज्ञों के अनुसार, इन कमरों को बंद रखने का कारण संरचना की सुरक्षा से जुड़ा हो सकता है। ताजमहल मुख्य रूप से संगमरमर से बना है और लंबे समय तक बंद स्थानों में नमी व गैसों का असर इमारत को नुकसान पहुंचा सकता है। कुछ जानकारों का कहना है कि तहखानों में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ने पर रासायनिक प्रक्रिया के कारण संगमरमर यानी कैल्शियम कार्बोनेट पर असर पड़ सकता है। इससे पत्थर कमजोर होने की संभावना रहती है।
यही वजह बताई जाती है कि ताजमहल के कुछ हिस्सों को संरक्षित रखने के लिए उन्हें आम लोगों की पहुंच से दूर रखा गया है।
इतिहास और दावों के बीच ताजमहल
ताजमहल को लेकर विवाद और दावे समय-समय पर सामने आते रहे हैं, लेकिन ऐतिहासिक दस्तावेजों में इसे शाहजहां द्वारा बनवाया गया मकबरा बताया गया है। वहीं बंद कमरों और संरचना से जुड़े कई सवाल आज भी लोगों की जिज्ञासा का कारण बने हुए हैं।













































