Thalapathy Vijay Rules: तमिलनाडु सरकार ने राज्य के खनन क्षेत्र से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए छोटे खनिजों (माइनर मिनरल्स) की खुदाई और बिक्री के लिए नई व्यवस्था लागू की है। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय (थलपति विजय) के नेतृत्व वाली सरकार का कहना है कि इन बदलावों का उद्देश्य खनन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाना और खदानों में प्राकृतिक रूप से मिलने वाले मूल्यवान खनिजों के उपयोग के लिए स्पष्ट नियम तय करना है।
नई व्यवस्था के तहत अब अधिकृत खनन क्षेत्रों में प्राकृतिक रूप से मिलने वाली उन चट्टानों की बिक्री की अनुमति दी जाएगी, जिनमें सामान्य निर्माण सामग्री के साथ अधिक मूल्य वाले खनिज मौजूद हों। हालांकि, इसके लिए संबंधित चट्टानों की पहले प्रयोगशाला में जांच करानी होगी और सरकार द्वारा निर्धारित अतिरिक्त शुल्क भी जमा करना होगा।
सरकार ने जारी की अधिसूचना| Thalapathy Vijay Rules
तमिलनाडु के प्राकृतिक संसाधन विभाग ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर दी है। सरकार के अनुसार, कई बार स्वीकृत खनिजों की खुदाई के दौरान ऐसी चट्टानें भी मिलती हैं, जिनमें अधिक कीमत वाले खनिज मौजूद होते हैं। पहले इनके निपटान को लेकर स्पष्ट नियम नहीं थे, लेकिन अब नई व्यवस्था के जरिए इस पूरी प्रक्रिया को कानूनी रूप से व्यवस्थित किया गया है।
23 जुलाई को लागू किए गए इन संशोधित नियमों को आधिकारिक गजट में भी प्रकाशित किया गया है। यह बदलाव माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1957 के तहत बनाए गए तमिलनाडु माइनर मिनरल कंसेशन रूल्स, 1959 में संशोधन के जरिए किया गया है।
पत्थरों के वर्गीकरण में भी बदलाव
सरकार ने केवल बिक्री प्रक्रिया ही नहीं बदली, बल्कि निर्माण और सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाले पत्थरों की श्रेणियों को भी पहले से अधिक स्पष्ट किया है। नए नियमों के तहत ग्रेनाइट के अलावा अन्य पत्थरों का वर्गीकरण दोबारा तय किया गया है। इसमें प्राकृतिक रूप से घिसे हुए काले पत्थर, बड़े बोल्डर, पत्थरों के टुकड़े, कुचले हुए पत्थर, मेटल ग्रेवल, सड़क निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और अन्य निर्माण संबंधी चट्टानों को अलग-अलग श्रेणियों में रखा गया है। सरकार का मानना है कि इससे खनिजों की पहचान और उनके व्यावसायिक उपयोग में पारदर्शिता आएगी।
बिक्री से पहले होगी लैब में जांच
नई व्यवस्था के अनुसार, यदि कोई खनन लीजधारक अपनी खदान में प्राकृतिक रूप से मिलने वाली आग्नेय चट्टानों (Igneous Rocks) को बेचना चाहता है, तो उसे सबसे पहले संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी देनी होगी। इसके बाद चट्टानों के नमूने को जियोलॉजी एंड माइनिंग डायरेक्टरेट की प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजा जाएगा। लैब जांच में यह पता लगाया जाएगा कि चट्टान में कौन-कौन से खनिज मौजूद हैं और उनका आर्थिक मूल्य कितना है।
यदि परीक्षण में अधिक मूल्य वाले खनिजों की मौजूदगी सामने आती है, तो उनकी बिक्री और उपयोग संबंधित कानूनों और निर्धारित प्रक्रियाओं के अनुसार ही किया जाएगा।
कीमती खनिज मिलने पर देनी होगी अतिरिक्त फीस
सरकार ने उन मामलों के लिए भी अलग व्यवस्था बनाई है, जहां चट्टानों में ऐसे खनिज पाए जाते हैं जिनकी कीमत या रॉयल्टी सामान्य खनिजों की तुलना में अधिक होती है। ऐसी स्थिति में संबंधित लीजधारक को सरकार द्वारा तय अतिरिक्त शुल्क जमा करना होगा। शुल्क जमा करने के बाद, नियमों के अनुसार कुछ मामलों में इन चट्टानों को प्राकृतिक काले पत्थर (Natural Black Stone) की श्रेणी में बेचने की अनुमति दी जा सकती है।
राजस्व और पारदर्शिता बढ़ाने पर सरकार का फोकस
राज्य सरकार का मानना है कि नए नियमों से खनन क्षेत्रों में मिलने वाले मूल्यवान खनिजों की पहचान, उनकी बिक्री और सरकारी राजस्व संग्रह की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक पारदर्शी होगी। इससे खनन उद्योग में स्पष्टता बढ़ेगी और नियमों के अभाव में पैदा होने वाले विवाद भी कम होंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि खनन क्षेत्र में इस तरह की स्पष्ट प्रक्रिया लागू होने से सरकार को राजस्व बढ़ाने में मदद मिल सकती है। वहीं, खनन कंपनियों और लीजधारकों को भी यह साफ रहेगा कि मूल्यवान खनिज मिलने की स्थिति में उन्हें किन नियमों का पालन करना होगा।












































